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  • Supreme Court: बिल्डरों और बैंकों के गठजोड़ पर सुप्रीम प्रहार, दिल्ली NCR समेत छह राज्यों में होगी CBI जांच

    Supreme Court: बिल्डरों और बैंकों के गठजोड़ पर सुप्रीम प्रहार, दिल्ली NCR समेत छह राज्यों में होगी CBI जांच

    Supreme Court: घर खरीदने के नाम पर लोगों को चूना लगाने वाले बिल्डरों और बैंकों के गठजोड़ पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कड़ा रुख दिखाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने और मामलों में CBI को FIR दर्ज करने और जांच शुरू करने की अनुमति दे दी। ये मामले केवल दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, मोहाली और प्रयागराज जैसे शहरों से जुड़े हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि केवल बिल्डर और बैंक ही नहीं, बल्कि कुछ सरकारी अधिकारी भी इस खेल में शामिल हो सकते हैं। अदालत ने CBI को इन मामलों की तेजी से जांच करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आम नागरिकों की मेहनत की कमाई को इस तरह से हड़पना गंभीर अपराध है और इसमें किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    यह विवाद बिल्डरों की सबवेंशन स्कीम से जुड़ा है। इस स्कीम में फ्लैट खरीदारों को यह भरोसा दिया जाता है कि जब तक उन्हें घर का कब्जा नहीं मिल जाता, तब तक उन्हें EMI नहीं चुकानी होगी। इस दौरान बैंक सीधे बिल्डर को भुगतान करता है और बिल्डर को यह जिम्मेदारी दी जाती है कि वह EMI का बोझ खरीदार पर न डाले। लेकिन हकीकत में कई बिल्डरों ने इस नियम का खुला उल्लंघन किया। उन्होंने बीच में EMI देना बंद कर दिया, जिसके बाद बैंक सीधे घर खरीददारों से किस्त की मांग करने लगे। अचानक बढ़े इस आर्थिक बोझ से हजारों खरीदार मुश्किल में फंस गए। दिल्ली NCR के लगभग 1,200 से अधिक घर खरीदारों ने इस धोखाधड़ी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बिल्डर और बैंक मिलकर योजनाबद्ध तरीके से ग्राहकों को जाल में फंसाते हैं और फिर उन पर कर्ज का बोझ डालते हैं।

    CBI ने अदालत को जानकारी दी कि शुरुआती जांच में न केवल NCR, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं। मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, मोहाली और प्रयागराज जैसे शहरों में भी बिल्डरों और बैंकों के बीच अवैध गठजोड़ पाया गया है। CBI का कहना है कि कई प्रोजेक्ट्स में ग्राहकों से वादे किए गए, लेकिन न तो घर समय पर मिले और न ही वित्तीय नियमों का पालन किया गया। घर खरीदने वालों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के इन आदेशों से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। कई खरीदार सालों से अपने मकान का इंतजार कर रहे हैं और साथ ही बैंक का कर्ज भी चुका रहे हैं।

    Supreme Court: बिल्डरों और बैंकों के गठजोड़ पर सुप्रीम प्रहार, दिल्ली NCR समेत छह राज्यों में होगी CBI जांच

    पहले भी हुई थी कार्रवाई

    यह पहला मौका नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल दिया है। इससे पहले 22 जुलाई को कोर्ट ने दिल्ली-NCR के बिल्डरों के खिलाफ 22 मामलों में CBI को FIR दर्ज करने की अनुमति दी थी। उन मामलों में भी यह सामने आया था कि बैंकों और बिल्डरों की मिलीभगत से हजारों परिवारों को आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान किया गया।

    CBI किस पर दर्ज करेगी मुकदमा?

    वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, CBI के मुकदमे में मुख्य आरोपी बिल्डर बनाए जाएंगे, क्योंकि उन्होंने सबवेंशन स्कीम के नियमों का उल्लंघन किया। बिल्डरों ने समय पर EMI चुकाना पर बंद दिया। इसके साथ ही खरीदारों को घर भी नहीं दिया। इसके अलावा इस मामले में बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी, क्योंकि खरीदारों को सही जानकारी दिए बिना बैंकों ने बिल्डरों को लोन दे दिया। इसके बाद लोन की EMI नहीं मिलने पर सीधे खरीदारों से वसूली शुरू कर दी। इसमें उन अधिकारियों पर भी एक्‍शन हो सकता है, जिन्होंने नियमों की अनदेखी करते हुए बिल्डरों का साथ दिया।

    आगे क्या होगा?

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBI छह राज्यों के मामलों की जांच करेगी। इसमें बिल्डरों और बैंकों के बीच हुए समझौते की जांच होगी। इसके बाद खरीदारों से वसूले गए पैसे और बैंकों द्वारा बिल्डरों को किए गए भुगतान का ऑडिट किया जाएगा। इसमें यह देखा जाएगा कि किस स्तर पर नियमों का उल्लंघन किया गया है? साथ ही ग्राहकों के साथ कैसे धोखाधड़ी की गई? अगर सीबीआई को धोखाधड़ी के पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो बिल्डरों की गिरफ्तारी हो सकती है। इसके बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होगी और मुकदमा चलेगा। इस मामले में दोषी मिलने पर कोर्ट बिल्डरों को जेल भेज सकती है। साथ ही जुर्माना और प्रॉपर्टी अटैच की कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरे कराने के लिए किसी नई एजेंसी को जिम्मेदारी दी जा सकती है।

  • Crime News: 22 महीने में पैसे दोगुने करने का झांसा देकर कंपनी ने ठगे साढ़े पांच करोड़! पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ किया मामला दर्ज

    Crime News: 22 महीने में पैसे दोगुने करने का झांसा देकर कंपनी ने ठगे साढ़े पांच करोड़! पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ किया मामला दर्ज

    Crime News: यह धोखाधड़ी नवंबर 2021 में शुरू हुई, जब करनैल सैनी निवासी रेहड़ा ने अपने कुछ परिचितों की मुलाकात सुनील वर्मा और भारत दलवाड़ी से करवाई। कैथल में हुई इस मुलाकात में दोनों ने खुद को इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट बताते हुए ‘IGT Global Trend’ नामक कंपनी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कंपनी दुबई से रजिस्टर्ड है और क्रिप्टो करेंसी “Arma Token” को प्रमोट करती है। निवेश के बदले 22 महीनों में रकम दोगुनी करने और 6 प्रतिशत साप्ताहिक रिटर्न का लालच देकर लोगों को फंसाया गया।

    आरमा टोकन और डबल रिटर्न का झांसा

    आरोपियों ने दावा किया कि उनकी कंपनी के साथ निवेश करने पर 14 प्रतिशत मार्केटिंग फंड मिलेगा और पूंजी की पूरी गारंटी वे खुद देंगे। उनकी बातों पर भरोसा कर राकेश कुमार, दीपक, अनिल और अन्य करीब 50-60 लोगों ने मिलकर 1.80 करोड़ रुपये का निवेश किया। शुरुआती छह महीनों तक कुछ रिटर्न मिला, जिससे लोगों का भरोसा और बढ़ गया, लेकिन फिर अचानक भुगतान बंद हो गया।

    Crime News: 22 महीने में पैसे दोगुने करने का झांसा देकर कंपनी ने ठगे साढ़े पांच करोड़! पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ किया मामला दर्ज

    नई वेबसाइट और नए बहाने: ठगी का दूसरा चरण

    जब लोगों ने रिटर्न की मांग की, तो आरोपियों ने “Pay Naft Global” नाम से नई वेबसाइट लॉन्च करने का दावा किया। इसमें निवेशकों को 50% ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और 50% अमेरिकी डॉलर से निवेश करने को कहा गया। बदले में डबल अमाउंट और Arma Token देने का वादा किया गया। इसी स्कीम के तहत ₹1.35 करोड़ का निवेश करवाया गया, लेकिन एक बार फिर कुछ समय बाद भुगतान बंद हो गया।

     ‘फाइनेंशियल फ्रीडम फार्मूला’ में लगाया 9 करोड़

    धोखाधड़ी की तीसरी कड़ी में आरोपियों ने “Financial Freedom Formula” नाम की नई योजना बताकर सभी पिछली हानि की भरपाई का वादा किया। इसमें निवेशकों ने लगभग ₹9 करोड़ का निवेश कर डाला, जिसमें से ₹4 करोड़ वापस आया और फिर स्कीम दोबारा ठप हो गई। इस बीच कई पीड़ितों को पता चला कि आरोपी घर बेचकर फरार हो चुके हैं।

     पुलिस ने चार आरोपियों पर दर्ज किया मामला

    अब उचाना थाना पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत के आधार पर सुनील वर्मा, भरत दलवाड़ी, विपिन जोशी और मयूर जोशी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में गहन जांच शुरू कर दी है। इन्वेस्टमेंट योजनाओं के नाम पर की गई इस संगठित ठगी ने कई परिवारों की मेहनत की कमाई को डुबो दिया। पुलिस अब अन्य निवेशकों से भी संपर्क कर रही है ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके और आरोपियों को सजा दिलाई जा सके।

  • Haryana: शेयर मार्केट में डबल मनी का झांसा, किसान से 2.21 करोड़ ठगे, जमीन बेचने पर मजबूर

    Haryana: शेयर मार्केट में डबल मनी का झांसा, किसान से 2.21 करोड़ ठगे, जमीन बेचने पर मजबूर

    Haryana: हरियाणा के जींद जिले के जुलाना क्षेत्र के नंदगढ़ गांव में किसान से शेयर मार्केट में ज्यादा पैसा कमाने का लालच देकर 2 करोड़ 21 लाख 32 हजार 700 रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। इस मामले ने गांव और क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। पीड़ित किसान रामशरण, जो अपनी मेहनत और ईमानदारी से खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा था, अचानक ऐसी ठगी का शिकार हो गया जिसने उसकी वर्षों की कमाई और सपनों को उजाड़ दिया। रामशरण ने अपनी मेहनत की कमाई और जमीन बेचकर जो पैसे इकट्ठे किए थे, वह लालच और धोखे का शिकार होकर गंवा बैठा।

    गांव के ही छह लोगों ने रची ठगी की साजिश

    पीड़ित किसान रामशरण ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि गांव के ही छह लोगों ने उसे शेयर मार्केट में पैसा लगाकर दोगुना-तिगुना मुनाफा कमाने का लालच दिया। इन लोगों में राहुल, किरण, रोहित, उषा, पायल और मोहित शामिल हैं। उन्होंने रामशरण को यह कहकर फंसाया कि शेयर बाजार में निवेश करने से उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो जाएगी और उसे खेती से कहीं ज्यादा लाभ मिलेगा। रामशरण ने शुरुआत में कुछ रकम निवेश की, जिस पर आरोपियों ने उसे दिखावटी लाभ भी दिखाए, जिससे रामशरण का विश्वास बढ़ता गया और उसने धीरे-धीरे अपनी जमा पूंजी, उधारी और जमीन बेचकर इन लोगों के कहने पर 2 करोड़ से ज्यादा की रकम अलग-अलग खातों में जमा करवा दी।

    Haryana: शेयर मार्केट में डबल मनी का झांसा, किसान से 2.21 करोड़ ठगे, जमीन बेचने पर मजबूर

    पैसे मांगने पर दी धमकी, जमीन बेचकर भी नहीं बच पाया किसान

    रामशरण ने बताया कि 20 फरवरी 2021 से लेकर 14 मई 2024 तक अलग-अलग खातों में पैसे जमा कराए गए। जब उसने आरोपियों से अपने पैसे वापस मांगे तो शुरुआत में आरोपियों ने बहाने बनाकर उसे टालना शुरू किया। बाद में जब रामशरण ने बार-बार पैसे वापस मांगने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उसे धमकाना शुरू कर दिया। इस दौरान रामशरण को अपनी चार एकड़ जमीन तक बेचनी पड़ी ताकि वह इन लोगों को और पैसे दे सके और अपना पैसा वापस ले सके। लेकिन आरोपियों ने न तो उसका पैसा लौटाया और न ही वादे के अनुसार उसे किसी प्रकार का लाभ दिया। ठगी का यह मामला पीड़ित किसान और उसके परिवार के लिए मानसिक और आर्थिक रूप से बेहद बड़ा आघात साबित हुआ।

    पुलिस ने आरोपियों पर दर्ज किया धोखाधड़ी का केस, जांच शुरू

    जुलाना थाना प्रभारी रविंद्र सिंह ने बताया कि पीड़ित किसान रामशरण की शिकायत पर गांव के छह लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने गांव के ही व्यक्ति के साथ संगठित तरीके से धोखाधड़ी कर करोड़ों रुपये हड़प लिए हैं। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, लेन-देन और मोबाइल रिकॉर्ड की जांच कर रही है ताकि ठगी के पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। पुलिस ने ग्रामीणों और अन्य किसानों से अपील की है कि कोई भी व्यक्ति यदि शेयर मार्केट में निवेश करने का लालच देकर उनसे मोटी रकम मांगता है तो पहले उसकी पूरी जांच पड़ताल कर लें और किसी भी परिस्थिति में अपने पैसे किसी के निजी खातों में न डालें। इस मामले ने दिखा दिया है कि लालच और अंधविश्वास में आकर मेहनत की कमाई को दूसरों के हवाले कर देना किस तरह जीवन की शांति और भविष्य को तबाह कर सकता है।

  • Haryana: प्लाट बेचने के नाम पर महिला से 1.70 लाख ठगे, असली मालिक ने कहा- मैंने नहीं बेची जमीन

    Haryana: प्लाट बेचने के नाम पर महिला से 1.70 लाख ठगे, असली मालिक ने कहा- मैंने नहीं बेची जमीन

    Haryana: हरियाणा के जींद में जमीन के सौदे के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। शहर के भिवानी रोड पर रहने वाली एक महिला से एक व्यक्ति ने प्लॉट का सौदा कर 1 लाख 70 हजार रुपये की ठगी कर ली। इस मामले में महिला की शिकायत पर जींद शहर थाना पुलिस ने आरोपी व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। यह मामला उन लोगों के लिए चेतावनी है जो बिना जांच-पड़ताल किए जमीन खरीदने का सौदा कर लेते हैं और बाद में धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं।

    ऐसे हुआ धोखाधड़ी का खुलासा

    शर्मा नगर निवासी पूजा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसने 8 अक्टूबर 2024 को राममेहर नाम के व्यक्ति से 49 वर्ग गज का प्लॉट 3 लाख 5 हजार रुपये में खरीदा था। पूजा ने सौदे के समय बयाना के रूप में 1 लाख 31 हजार रुपये दे दिए थे और बाकी की रकम 15 जनवरी 2025 तक देने की बात तय हुई थी। जब पूजा प्लॉट की शेष राशि देने और रजिस्ट्री करवाने के लिए राममेहर के पास गई, तो राममेहर बार-बार रजिस्ट्री के लिए समय आगे बढ़ाता रहा। पूजा ने बताया कि रजिस्ट्री करवाने के नाम पर राममेहर ने उससे 40 हजार रुपये और ले लिए, लेकिन अब तक रजिस्ट्री नहीं करवाई गई।

    Haryana: प्लाट बेचने के नाम पर महिला से 1.70 लाख ठगे, असली मालिक ने कहा- मैंने नहीं बेची जमीन

    असली मालिक से बातचीत में हुआ सच का खुलासा

    जब पूजा को राममेहर की नीयत पर संदेह हुआ, तो उसने प्लॉट की असलियत जानने के लिए उसकी असली मालिक से संपर्क किया। जांच में पता चला कि प्लॉट की असली मालिक घोली नाम की महिला है, जो बूढ़ा बाबा बस्ती की निवासी है। घोली ने पूजा को बताया कि उसने राममेहर को अपना कोई भी प्लॉट नहीं बेचा है और राममेहर का उससे कोई लेन-देन नहीं हुआ है। इसके बाद पूजा को समझ आया कि उसके साथ ठगी हो गई है और राममेहर ने बिना किसी अधिकार के प्लॉट बेचने का फर्जीवाड़ा कर उससे बड़ी रकम ठग ली है।

    पुलिस ने दर्ज किया केस, जांच जारी

    घटना की जानकारी मिलते ही पूजा ने जींद शहर थाना पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने पूजा की शिकायत के आधार पर आरोपी राममेहर के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और धोखाधड़ी में शामिल व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जल्द ही राममेहर को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा और मामले की गहराई से जांच की जाएगी ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके।

    इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि जमीन खरीदने से पहले उसकी रजिस्ट्री और असली मालिक की पुष्टि करना बेहद जरूरी है ताकि लोग धोखाधड़ी का शिकार न हों। आम लोगों को चाहिए कि किसी भी संपत्ति की खरीद-फरोख्त के समय उसके कागजात की पूरी तरह जांच करें और रजिस्ट्री ऑफिस में जाकर असली मालिक की पुष्टि अवश्य करें ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की ठगी से बचा जा सके।

  • Haryana: कनाडा भेजने का सपना दिखाया, 15 लाख की ठगी, मोहाली में गिरफ्तार गिरोह पर जींद में मामला दर्ज

    Haryana: कनाडा भेजने का सपना दिखाया, 15 लाख की ठगी, मोहाली में गिरफ्तार गिरोह पर जींद में मामला दर्ज

    Haryana: हरियाणा के जींद जिले में विदेश भेजने के नाम पर एक युवक से 15 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। सफीदों शहर थाना पुलिस ने इस मामले में पीड़ित युवक की शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है। पीड़ित युवक ललित, जो सफीदों शहर के पीपल वाला मोहल्ला का निवासी है, लंबे समय से कनाडा जाने की तैयारी कर रहा था और इसके लिए वह एक ओवरसीज कंपनी के संपर्क में आया था। उसे उम्मीद थी कि उसके सपनों को पंख मिलेंगे और वह जल्द ही कनाडा जाकर अपने भविष्य को नई दिशा देगा, लेकिन लालच और धोखाधड़ी ने उसकी मेहनत की कमाई को हड़प लिया।

    रुद्राक्ष ओवरसीज ग्रुप ने किया भरोसा, लिया मोटा पैसा

    ललित ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि जून 2023 में उसकी मुलाकात रुद्राक्ष ग्रुप ओवरसीज सॉल्यूशन के मालिक राकेश रिखी से हुई थी। बातचीत के बाद उसके पिता ने भी कंपनी मालिक और उसके साथियों से मिलकर कंपनी की सच्चाई जाननी चाही। कंपनी के लोगों ने पूरे विश्वास और भरोसे के साथ यह कहकर उन्हें आश्वस्त किया कि वह ललित को मात्र तीन महीनों में कनाडा भेज देंगे। इसके बदले कंपनी ने 15 लाख रुपये की मोटी रकम मांगी, जिसे ललित के परिवार ने अपनी मेहनत की कमाई से पूरा किया। परिवार ने यह रकम इसलिए दी ताकि उनके बेटे का भविष्य सुधर सके और वह विदेश जाकर अच्छा जीवन जी सके।

    Haryana: कनाडा भेजने का सपना दिखाया, 15 लाख की ठगी, मोहाली में गिरफ्तार गिरोह पर जींद में मामला दर्ज

    न विदेश भेजा, न पैसे लौटाए, गिरफ्तारी की मिली जानकारी

    पैसे लेने के बाद कंपनी के लोग लगातार ललित को तीन महीने में वीजा लगवाकर कनाडा भेजने का आश्वासन देते रहे। ललित और उसका परिवार लंबे समय तक इनका इंतजार करता रहा, लेकिन समय बीतने पर भी न तो वीजा आया और न ही कोई टिकट। जब ललित ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए तो कंपनी के लोगों ने टालमटोल करनी शुरू कर दी। करीब छह महीने पहले उन्होंने 20 दिनों में पैसे लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन वह भी पूरा नहीं किया गया। बाद में ललित को पता चला कि कंपनी के मालिक राकेश रिखी और उसके साथी मोहाली पुलिस द्वारा किसी अन्य केस में गिरफ्तार कर लिए गए हैं। इसके बाद से ललित का इन लोगों से कोई संपर्क नहीं हो पाया और न ही उसे उसकी रकम वापस मिली।

    पुलिस ने तीन आरोपियों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज कर शुरू की जांच

    पैसों और समय दोनों की बर्बादी झेलने के बाद पीड़ित ललित ने न्याय की उम्मीद में सफीदों शहर थाना पुलिस में शिकायत दी। पुलिस ने ललित की शिकायत पर राकेश रिखी, राखी गिल और मनराज सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस इस पूरे मामले में आरोपी कंपनी की बैंक डिटेल, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि ललित की रकम वापस दिलवाई जा सके। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि विदेश भेजने के नाम पर चल रही कई फर्जी ओवरसीज कंपनियां भोले-भाले युवाओं से उनकी खून-पसीने की कमाई ऐंठकर उनके सपनों को तोड़ रही हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि विदेश जाने की योजना बनाने से पहले कंपनी की प्रमाणिकता और उसके पिछले रिकॉर्ड की पूरी जांच कर लें ताकि किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके।

  • Haryana: इंटरव्यू में पास कराने का वादा, 23 लाख ले उड़े, डॉक्टर और साथी पर पुलिस ने कसा शिकंजा

    Haryana: इंटरव्यू में पास कराने का वादा, 23 लाख ले उड़े, डॉक्टर और साथी पर पुलिस ने कसा शिकंजा

    Haryana: सदर थाना पुलिस ने जलालपुर कलां गांव के एक व्यक्ति की शिकायत पर दो लोगों के खिलाफ सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर 23 लख रुपए की धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

    गांव जलालपुर कलां के खुशी राम ने पुलिस को भी शिकायत में कहा है कि वीएलडीए डॉक्टर सुरेश कुमार, निवासी गांव कथूरा (जिला सोनीपत), जो वर्तमान में पंचकूला में रह रहा है, ने अपने साथी हरीश शर्मा के साथ मिलकर उनसे 23 लाख रुपये की ठगी की है। शिकायतकर्ता के अनुसार डॉक्टर सुरेश कुमार और हरीश शर्मा ने उनकी बेटी को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति दिलवाने का झांसा दिया था।

    Haryana: इंटरव्यू में पास कराने का वादा, 23 लाख ले उड़े, डॉक्टर और साथी पर पुलिस ने कसा शिकंजा

    इस भरोसे में आकर खुशी राम ने 23 लाख रुपये आरोपियों को दे दिए। लेकिन महीनों बीतने के बाद भी न नौकरी मिली और न ही रुपये वापस किए गए। जब उन्होंने बार-बार पैसे वापस मांगे, तो उन्हें टालने और धमकाने की कोशिश की गई। बताया गया है कि चार लाख रुपए सुरेश के खाते में डाले गए थे जबकि 19 लाख रुपए हरीश शर्मा के खाते में डलवाए गए।

    खुशीराम ने बताया कि उसकी डॉक्टर सुरेश के साथ जानकारी थी और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर की पोस्ट निकली हुई थी जिसमें रिटन टेस्ट नहीं था। यह एकेडमिक मेरिट और इंटरव्यू बेस पर भर्ती होनी थी और उसकी बेटी मेरिट में थी। इन लोगों ने इंटरव्यू के नाम पर 23 लाख रुपए लिए और बाद में देने से इनकार कर दिया।

    जींद सदर थाना पुलिस ने खुशीराम की शिकायत पर वीएलडीए डॉक्टर सुरेश कुमार और उसके साथी हरीश शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

  • Haryana: कोर्ट में समझौता कर चेक दिया, बाद में स्टॉप पेमेंट कर 36.5 लाख की ठगी, जींद में केस दर्ज

    Haryana: कोर्ट में समझौता कर चेक दिया, बाद में स्टॉप पेमेंट कर 36.5 लाख की ठगी, जींद में केस दर्ज

    Haryana के जींद जिले में ठगी का एक अनोखा मामला सामने आया है, जिसमें भंभेवा गांव के जयवीर ने अदालत में समझौता कर मालसरी खेड़ा गांव के अजमेर को साढ़े 36 लाख रुपये का चूना लगा दिया। दरअसल, अजमेर ने जयवीर से 25 कनाल 5 मरले जमीन खरीदी थी, लेकिन बाद में जयवीर ने वही जमीन किसी अन्य व्यक्ति को भी बेच दी। इस मामले में विवाद उत्पन्न होने पर मामला अदालत में पहुंच गया। अदालत में जयवीर ने मामले को उलझता देख अजमेर से समझौता कर लिया और उसे साढ़े 36 लाख रुपये देने की बात कही। समझौते के बाद जयवीर ने अदालत में चेक भी सौंप दिए, जिससे अजमेर को विश्वास हो गया कि उसे उसकी राशि वापस मिल जाएगी।

    कोर्ट में समझौते के बाद भी स्टॉप पेमेंट करवा दिया

    समझौते के बाद अजमेर ने जयवीर द्वारा दिए गए चेक को बैंक में जमा कराया, लेकिन बैंक में जमा करने के बाद पता चला कि जयवीर ने चुपचाप बैंक में जाकर उस चेक का ‘स्टॉप पेमेंट’ करवा दिया। यह जानने के बाद अजमेर के पैरों तले जमीन खिसक गई। अजमेर ने कई बार जयवीर से संपर्क कर अपनी राशि की मांग की, लेकिन हर बार जयवीर कोई न कोई बहाना बनाकर टालता रहा। कई बार फोन करने और मिलने के बाद भी जयवीर ने रकम लौटाने से इंकार कर दिया। इससे साफ है कि जयवीर ने पहले अदालत में समझौता कर खुद को कानूनी कार्रवाई से बचा लिया और फिर बाद में जानबूझकर स्टॉप पेमेंट करवाकर अजमेर की बड़ी राशि हड़प ली।

    Haryana: कोर्ट में समझौता कर चेक दिया, बाद में स्टॉप पेमेंट कर 36.5 लाख की ठगी, जींद में केस दर्ज

    पुलिस ने दर्ज किया धोखाधड़ी का मामला

    थक-हारकर अजमेर ने न्याय की उम्मीद में सफीदों शहर थाना पुलिस में शिकायत दी। शिकायत में अजमेर ने जयवीर पर धोखाधड़ी और रकम हड़पने का आरोप लगाया। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भंभेवा गांव के जयवीर के खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की बारीकी से जांच की जाएगी और जांच में जयवीर दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस इस केस में बैंक ट्रांजेक्शन, चेक की कॉपी और कोर्ट में हुए समझौते के दस्तावेज खंगाल रही है ताकि केस को मजबूत बनाया जा सके।

    जमीन विवाद में बढ़ रही धोखाधड़ी की घटनाएं

    इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि जमीन से जुड़े विवादों में लोग किस प्रकार नए-नए तरीके निकालकर धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं। पहले जमीन को एक से अधिक लोगों को बेचना, फिर अदालत में समझौता कर केस से पीछा छुड़ाना और बाद में चेक पर स्टॉप पेमेंट कर रकम हड़प लेना, यह तरीका अब नए तरह की ठगी के रूप में सामने आया है। इस प्रकार की घटनाएं आम लोगों को सतर्क रहने की सीख देती हैं कि जमीन खरीदते समय पूरी जांच-पड़ताल कर लें और अदालत में हुए समझौतों के बाद भी सतर्कता बरतें। अब देखना यह है कि पुलिस जांच में जयवीर पर क्या कार्रवाई होती है और अजमेर को उसका हक कब तक वापस मिलता है। वहीं, इस घटना ने गांव और जिले में चर्चा का माहौल बना दिया है, और लोगों में जमीन से जुड़े लेन-देन में पारदर्शिता बनाए रखने की जागरूकता भी पैदा की है।

  • Jind में 164 दुकानदारों से 18 करोड़ की ठगी, महावीर मित्तल और बेटे पर धोखाधड़ी का केस

    Jind में 164 दुकानदारों से 18 करोड़ की ठगी, महावीर मित्तल और बेटे पर धोखाधड़ी का केस

    Jind थाना शहर पुलिस ने अनाज मंडी के एक आढ़ती के खिलाफ 18 करोड रुपए की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। इस मामले में महावीर मित्तल और उसके बेटे प्रवीण मित्र और सुमित मित्तल को आरोपी बनाया गया है। यहां बता दें कि इससे पहले महावीर मित्तल और उनकी पत्नी राजबाला के खिलाफ भी 46 लाख की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। यह मामला पिछले महीने ही दर्ज हुआ है।

    ताजा मामले में अनाज मंडी के प्रधान सुशील सिहाग ने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि मंडी में महावीर मित्तल और उनके परिवार की दो दुकानें हैं। इन लोगों ने वर्ष 2024 में मंडी के दुकानदारों की मार्फत धान की फसल की खरीद की थी लेकिन उसके बाद इस फर्म ने दुकानदारों का पैसा नहीं लौटाया जिस कारण दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    Jind में 164 दुकानदारों से 18 करोड़ की ठगी, महावीर मित्तल और बेटे पर धोखाधड़ी का केस

    अनाज मंडी के प्रधान सुशील सिहाग के अनुसार महावीर मित्तल और उसके परिवार की फर्मों ने यहां मंडी के करीब 164 दुकानदारों को 18 करोड़ रुपए से ज्यादा का चूना लगाया है। बताया गया है कि फरवरी से महावीर मित्तल की दोनों फर्मों पर ताला लगा हुआ है। इतने दिनों से दुकान पर ताला लगे होने के कारण दुकानदारों को उनके साथ ठगी होने का एहसास हुआ।

    इससे पहले ईश्वर सिंह सिंधु नामक एक आढ़ती ने महावीर मित्तल और उसकी पत्नी राजबाला के खिलाफ 46 लख रुपए से ज्यादा की धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया था। इस मामले में जांच अधिकारी जसबीर सिंह का कहना है कि पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और इस मामले में आरोपियों से पूछताछ के बाद इसमें आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • Ashok Buwaniwala का बड़ा दावा, पौधारोपण में करोड़ों की हेराफेरी, हरियाली घोटाले की खुली परतें

    Ashok Buwaniwala का बड़ा दावा, पौधारोपण में करोड़ों की हेराफेरी, हरियाली घोटाले की खुली परतें

    भिवानी, 24 जुलाई। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस उद्योग सैल के चेयरमैन Ashok Buwaniwala ने शासन और प्रशासन पर प्रदेश में हरियाली बढ़ाने के नाम पर प्रत्येक वर्ष बड़ें घोटालों को अंजाम दिए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पौधारोपण पर करोड़ों की राशि खर्च करने के बाद भी हरियाली सिकुड़ती जा रही है। जिसके पीछें वन विभाग की लापरवाही और बड़ें घोटालों की साजिश नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में 2020 से लेकर 2025 तक 970 करोड़ रूपए खर्च कर 4.19 करोड़ पौधे लगाए गए है।

    उसके बावजूद प्रदेश में हरियाली का दायरा मात्र 10.72 वर्ग कि.मी. बढ़ा है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य राजस्थान में हरियाणा से 6 गुना कम राशि खर्च की गई और वहां हरियाणा से 39 गुना ज्यादा हरियाली बढ़ है। बुवानीवाला ने 2020 के दौरान पलवल में सामने आए घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि साल 2020 के दौरान पलवल जिले के अंदर पौधारोपण के लिए 1.5 करोड़ रूपए का बजट आवंटित किया गया जिसके तहत 10 लाख पौधे लगाने का दावा किया गया था, लेकिन वहां 60 प्रतिशत पौधे सूख गए या कभी लगाए ही नहीं गए जिसकी बाद में मीडिय़ा के माध्यम से रिपोर्ट आई थी कि फर्जी बिलों के माध्यम से इस अभियान में घोटाले को अंजाम दिया गया था।

    Ashok Buwaniwala का बड़ा दावा, पौधारोपण में करोड़ों की हेराफेरी, हरियाली घोटाले की खुली परतें

    उन्होंने कहा कि आज जब पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गंभीर कदम उठाने की जरूरत है, तब शासन और प्रशासन ने प्रदेश में पौधारोपण जैसी पवित्र और जरूरी मुहिम को भ्रष्टाचार और घोटाले का जरिया बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की जांच करवाई जाएं तो साल-दर-साल जिलास्तर पर चलाए गए पौधारोपण अभियानों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं, आंकड़ों में हेराफेरी और कागजी पौधारोपण के मामले सामने आ सकते हैं। यह घोटाला केवल आर्थिक नहीं, बल्कि पर्यावरण, पारदर्शिता और जनहित से सीधा खिलवाड़ है।

    बुवानीवाला ने कहा कि जिन स्थानों पर लाखों पौधे लगाए जाने का दावा किया गया है, वहां या तो पौधे लगे ही नहीं, या फिर गिनती भर के पौधे लगाए गए और वे भी रख-रखाव न होने के कारण कुछ ही दिनों में सूख गए। जबकि सरकारी रिकार्ड में संबंधित विभागों ने उन्हें सफलतापूर्वक रोपित और विकसित दिखाया है। इस हरियाली के खेल में नर्सरियों से खरीद, पौधों की संख्या, परिवहन, मजदूरी और देखरेख जैसे खर्चों में जमकर घोटाले हुए हैं।

    प्रदेश सरकार और वन विभाग ने पौधारोपण अभियान के नाम पर पारदर्शिता को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है न पौधों की सही गिनती है, न उनके रख-रखाव की निगरानी, न ही किसी स्तर पर जवाबदेही तय की गई है। पेड़ लगने की बजाय सिर्फ बजट खर्च हो गया और धरती पहले से ज्यादा सूखती जा रही है। बुवानीवाला ने मांग करते हुए कहा कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए और घोटालों के प्रयाय बन चुके हरियाली के दुश्मनों पर सख्त कार्यवाही करनी चाहिए।