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  • Jind News: जींद में हाइड्रोजन ट्रेन का सपना पूरा, दिवाली तक दौड़ सकती है देश की पहली गाड़ी!

    Jind News: जींद में हाइड्रोजन ट्रेन का सपना पूरा, दिवाली तक दौड़ सकती है देश की पहली गाड़ी!

    Jind News: रेलवे के नक्शे पर चीन एक बार फिर अपना नाम अलग से चमकाने की तैयारी में है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद से सोनीपत ट्रैक पर उड़ान भरने को तैयार है। यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ परिवहन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। भारत जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन के बाद हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाला 5वां देश होगा। और भारत में पहली ट्रेन जींद से चलाई जाएगी।

    इस ट्रेन को ईंधन देने के लिए जींद में हाईड्रोजन प्लांट निर्माणाधीन है। इसका कई बार निरीक्षण हो चुका है और सूत्रों की माने तो इसका 90% से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। दिवाली के आसपास यह ट्रेन यहां से चल सकती है। वहीं दूसरी ओर ट्रेन का इंजन बनकर तैयार है। जल्द ही रेलवे इस ट्रेन को शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने मंगलवार शाम को अपने एक्स हैंडल देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की झलक दिखाते हुए इसकी विशेषताओं को बताता एक वीडियो शेयर किया है।

    देश में चलने वाली पहली नई हाइड्रोजन ट्रेन दुनिया की सबसे शक्तिशाली और सबसे लंबी हाइड्रोजन चालित ट्रेन होगी, जो 2,600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम होगी। पहली हाइड्रोजन चालित ट्रेन के कोच का हाल ही में चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में परीक्षण पूरा किया गया है। यह जल्दी ही जींद पहुंचने की उम्मीद की जा रही है।

    पिछले महीने ही रेल मंत्री वैष्णव ने इस परीक्षण को भारत के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया था। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि 1,200 हार्सपावर वाली यह ट्रेन भारत को हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक में अग्रणी बनाएगी।

    Jind News: जींद में हाइड्रोजन ट्रेन का सपना पूरा, दिवाली तक दौड़ सकती है देश की पहली गाड़ी!

    हाइड्रोजन ट्रेन फार हैरिटेज पहल के तहत भारतीय रेलवे देश में 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना बना रहा है, जिनमें से प्रत्येक की लागत लगभग 80 करोड़ रुपये होगी। जींद सोनीपत के बाद जींद-चंडीगढ़ और जींद-दिल्ली ट्रेन को भी हाइड्रोजन से चलाए जाने की तैयारी की जा रही है।

    विरासत और पहाड़ी मार्गों के लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर प्रतिमार्ग 70 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस पायलट परियोजना में एक डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट रैक को हाइड्रोजन ईंधन में अपग्रेड करने की योजना है।

    जींद-गोहाना-सोनीपत ट्रैक के लिए हाइड्रोजन की आपूर्ति के लिए जींद में एक मेगावाट पालीमर इलेक्ट्रोलाइट मेम्ब्रेन प्लांट का निर्माण जारी है। यह प्लांट प्रतिदिन लगभग 430 किलो हाइड्रोजन का उत्पादन करेगा।

    जींद में ईंधन भरने वाले स्टेशन में 3,000 किलो हाइड्रोजन भंडारण, कंप्रेसर और तेज़ ईंधन भरने के लिए प्री-कूलर इंटीग्रेशन वाले दो डिस्पेंसर होंगे।

    जींद-गोहाना-सोनीपत रेलवे ट्रैक करीब 89 किलोमीटर लंबा है। हाइड्रोजन ट्रेन की गति 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की होगी। ट्रेन में एक बार में 2,638 यात्री सफर कर सकेंगे।

    हाइड्रोजन फ्यूल सेल द्वारा संचालित ये ट्रेन डीजल ट्रेनों के विपरीत इमिशन के रूप में सिर्फ वाटर और हीट जेनरेट करती हैं। आठ कोच वाली ट्रेन एक ऐसी रेलगाड़ी है जो हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक पर आधारित होगी।

    यह ट्रेन पारंपरिक डीजल ट्रेनों का एक पर्यावरण एवं अनुकूल विकल्प होगी। हाइड्रोजन ट्रेन में हाइड्रोजन गैस को ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाएगा। यह ट्रेन शून्य कार्बन उत्सर्जन करती है। इसके इंधन धुएं की बजाय पानी व भाप छोड़ेंगे, जिससे प्रदूषण नहीं फैलेगा। हाइड्रोजन ट्रेन मौजूदा रेल संसाधनों के साथ आसानी से काम कर सकती हैं। यह तकनीक पर्यावरण को स्वच्छ रखती है।

  • Haryana का हर घर बनेगा बिजली घर, छत पर बनेगी बिजली, पहले खुद प्रयोग करो, बचे तो बेच दो

    Haryana का हर घर बनेगा बिजली घर, छत पर बनेगी बिजली, पहले खुद प्रयोग करो, बचे तो बेच दो

    Haryana News: प्रदेश में बिजली संकट से निपटने के लिए सरकार क्रांतिकारी कदम उठा रही है। हरियाणा में अब छतें सिर्फ धूप नहीं समेटेंगी, बल्कि ऊर्जा भी पैदा करेंगी। राज्य सरकार ने हरित ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए वर्ष 2026-27 तक दो लाख से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है। इससे दिन के समय में 4 लाख यूनिट प्रति घंटा बिजली पैदा हो सकेगी। इस हरित बिजली की खासियत यह भी होगी कि इसके लिए कुछ अलग से प्रयास नहीं करना होगा। इसके लिए बजट का प्रावधान किया जा रहा है।

    इस योजना का उद्देश्य न केवल पर्यावरण संरक्षण है, बल्कि हरियाणा के लाखों परिवारों को बिजली के खर्च से राहत और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाना है।

    मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में चंडीगढ़ में हुई राज्य स्तरीय समन्वय समिति की बैठक में बताया गया कि फिलहाल प्रदेश में 30 हजार 631 रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। इनसे हजारों उपभोक्ताओं को कम बिजली बिल और अतिरिक्त आय का लाभ मिला है। रूफटॉप सोलर को सुलभ और आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए सरकार दोहरी सब्सिडी दे रही है।

    केंद्र सरकार की सहायता सीधे उपभोक्ता के खाते में 15 दिन के भीतर पहुंच रही है। वहीं हरियाणा सरकार ‘पहले आओ-पहले पाओ’ आधार पर एक लाख अंत्योदय परिवारों को अतिरिक्त वित्तीय मदद दे रही है। इससे सोलर प्लांट लगाने की लागत आम आदमी की पहुंच में आ गई है। बिजली निगमों ने एक एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल और 280 से अधिक हेल्प डेस्क शुरू किए हैं ताकि उपभोक्ताओं को आवेदन, स्वीकृति और सब्सिडी संबंधी प्रक्रियाओं में कोई परेशानी न हो।

    Haryana का हर घर बनेगा बिजली घर, छत पर बनेगी बिजली, पहले खुद प्रयोग करो, बचे तो बेच दो

    ग्रामीण इलाकों में सौर क्रांति

    कैथल का बालू गांव प्रदेश का पहला आदर्श सौर ग्राम बनकर सामने आया है, जहां पूरी ग्राम व्यवस्था सौर ऊर्जा से संचालित हो रही है। आने वाले समय में हर जिले में एक ऐसा आदर्श गांव बनाने की योजना है, जिससे गांव आत्मनिर्भर और प्रदूषण मुक्त बनें।

    ऊर्जा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एके सिंह ने बताया कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ उपभोक्ता संतुष्टि पर भी ध्यान दिया जा रहा है। शिकायत प्रबंधन प्रणाली (जीएमएस) के माध्यम से अब तक 1,414 में से 1,164 शिकायतों का समाधान हो चुका है। बैठक में उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम के प्रबंध निदेशक अशोक कुमार मीणा, वित्त विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़ और हरेडा की निदेशक डॉ़ प्रियंका सोनी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

    भविष्य की छत, रूफटॉप सोलर सिस्टम केवल बिजली उत्पादन का जरिया नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण का आधार बनते जा रहे हैं। हरियाणा सरकार की यह पहल राज्य को जल्द ही ‘सौर ऊर्जा युक्त’और ‘ऊर्जा आत्मनिर्भर’ प्रदेश की श्रेणी में लाकर खड़ा कर सकती है।

  • राज्यसभा में ई-वाहन सब्सिडी पर Kiran Chaudhary का सवाल, सरकार ने खोली योजना की परतें

    राज्यसभा में ई-वाहन सब्सिडी पर Kiran Chaudhary का सवाल, सरकार ने खोली योजना की परतें

    Kiran Chaudhary: सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 29 सितंबर 2024 को एक नई योजना की शुरुआत की है जिसका नाम पीएम ई-ड्राइव योजना है। इस योजना के लिए 10,900 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है। इस योजना के तहत दो पहिया, तीन पहिया, ई-एम्बुलेंस और ई-ट्रकों पर सीधी सब्सिडी दी जाएगी। इसका मतलब है कि वाहन खरीदने वाले ग्राहकों को सीधा लाभ मिलेगा और बाद में निर्माता कंपनी सरकार से उसका दावा कर सकेगी।

    ई-वाहनों की खरीद के लिए बड़ा आवंटन

    केंद्र सरकार ने योजना के तहत विभिन्न इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बजट को अलग-अलग भागों में बांटा है। ई-2डब्ल्यू, ई-3डब्ल्यू, ई-एम्बुलेंस और ई-ट्रकों के लिए कुल 3,679 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वहीं, 14,028 ई-बसों की खरीद के लिए 4,391 करोड़ रुपए का अलग से बजट तय किया गया है। इससे पब्लिक ट्रांसपोर्ट में भी बड़ी क्रांति आने की उम्मीद है और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

    राज्यसभा में ई-वाहन सब्सिडी पर Kiran Chaudhary का सवाल, सरकार ने खोली योजना की परतें

    उद्योगों को मिलेगा प्रोत्साहन

    सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन और उससे जुड़े पुर्जों के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए पीएलआई ऑटो योजना को भी लागू किया है। इस योजना को सितंबर 2021 में मंजूरी दी गई थी और इसके लिए 25,938 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। इस योजना के तहत ई-वाहन बनाने वाली कंपनियों को उनकी बिक्री के आधार पर 13% से 18% तक की प्रोत्साहन राशि मिलेगी। वहीं, एडवांस ऑटो टेक्नोलॉजी घटकों के लिए 8% से 13% तक का लाभ मिलेगा।

    बैटरी निर्माण में आत्मनिर्भरता की ओर कदम

    सरकार ने मई 2021 में 18,100 करोड़ रुपए की पीएलआई योजना को मंजूरी दी थी जिसका मकसद देश में ही एडवांस कैमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरियों का निर्माण करना है। इसका लक्ष्य 50 गीगावाट घंटे की बैटरी उत्पादन क्षमता को स्थापित करना है। इस कदम से भारत न केवल आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि वैश्विक बैटरी निर्माण में भी प्रतिस्पर्धा कर सकेगा।

    योजनाओं की होगी नियमित समीक्षा

    केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने जानकारी दी है कि सरकार द्वारा शुरू की गई सभी योजनाओं की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि योजनाओं का क्रियान्वयन सही दिशा में हो और उसका लाभ वास्तव में आम जनता और उद्योग जगत को मिले। इससे देश में स्वच्छ और हरित ऊर्जा की ओर एक मजबूत कदम बढ़ेगा।