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  • Haryana News: हरियाणा में कुत्तों का आतंक! अंबाला में सात साल के मासूम पर हमला, चीखों से कांप उठा गांव

    Haryana News: हरियाणा में कुत्तों का आतंक! अंबाला में सात साल के मासूम पर हमला, चीखों से कांप उठा गांव

    Haryana News: हरियाणा के अंबाला जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। गांव टोबा में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक सात साल के मासूम पर 10 आवारा कुत्तों ने एक साथ हमला कर दिया। बच्चा गली में अपने दोस्त के साथ खेल रहा था तभी अचानक कुत्तों ने उसे घेर लिया। कुत्तों ने उसके सिर का हिस्सा तक फाड़ दिया जिससे वह लहूलुहान हो गया।

    बच्चे की चीखें सुनकर दौड़े लोग

    जैसे ही अवीराज की दर्दभरी चीखें सुनाई दीं वैसे ही आस-पास के लोग लाठियां लेकर दौड़े और किसी तरह कुत्तों को वहां से भगाया। बच्चा बुरी तरह घायल हो चुका था। लोगों ने तुरंत उसे अंबाला छावनी के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन हालात गंभीर होने के चलते डॉक्टरों ने उसे चंडीगढ़ रेफर कर दिया।

    Haryana News: हरियाणा में कुत्तों का आतंक! अंबाला में सात साल के मासूम पर हमला, चीखों से कांप उठा गांव Haryana News: हरियाणा में कुत्तों का आतंक! अंबाला में सात साल के मासूम पर हमला, चीखों से कांप उठा गांव

    अकेली मां की दास्तान

    मासूम की मां ने बताया कि उसके तीन बच्चे हैं और उसके पति की पहले ही मौत हो चुकी है। अवीराज पड़ोसी के बच्चे के साथ खेल रहा था जब यह घटना घटी। पड़ोसी का बच्चा कुत्तों को आता देख भाग गया और अवीराज अकेला रह गया। कुत्तों ने उसके हाथ पैर पीठ और कमर पर भी गंभीर चोटें पहुंचाई हैं।

    सर्जरी ही अब आखिरी उम्मीद

    डॉक्टरों ने कहा है कि अवीराज के सिर की सर्जरी जरूरी है क्योंकि चमड़ी बुरी तरह से फट चुकी है। इसके अलावा शरीर के अन्य हिस्सों पर भी प्लास्टिक सर्जरी करनी होगी ताकि घाव भर सकें। परिवार पर पहले से ही आर्थिक संकट है और अब इलाज का खर्च उनकी चिंता का बड़ा कारण बन गया है।

    प्रशासन पर उठते सवाल

    इस दर्दनाक घटना के बाद लोग प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि आखिर कब तक ये आवारा कुत्ते यूं ही लोगों की जान के दुश्मन बने रहेंगे। गांव वालों का कहना है कि पहले भी कई बार कुत्तों की शिकायत की गई थी लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब जब मासूम की जान पर बन आई है तो सभी लोग डरे हुए हैं और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

  • Meenakshi Lekhi: कैलाश मानसरोवर यात्रा में बड़ा हादसा! घोड़े से गिरकर घायल हुई पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी

    Meenakshi Lekhi: कैलाश मानसरोवर यात्रा में बड़ा हादसा! घोड़े से गिरकर घायल हुई पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी

    पूर्व केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री Meenakshi Lekhi कैलाश मानसरोवर यात्रा के दूसरे दल में शामिल थीं। तिब्बत के दारचिन क्षेत्र में घोड़े से गिरने के कारण उनकी कमर में गंभीर चोट आई है। इस हादसे के चलते अब वे यात्रा को पूरा नहीं कर पाएंगी। घटना के बाद तुरंत उन्हें प्राथमिक इलाज के लिए पास के अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट की पुष्टि हुई है।

    एक्स-रे में हुआ गंभीर चोट का खुलासा

    घटना के बाद मीनाक्षी लेखी को तुरंत यात्रा मार्ग पर मौजूद अस्पताल ले जाया गया। यहां उनकी जांच कर एक्स-रे किया गया जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी है। डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल आराम की सलाह दी और उनकी हालत को देखते हुए भारत वापस लाने का निर्णय लिया गया। यह हादसा न केवल प्रशासन के लिए चुनौती बन गया बल्कि यात्रियों के बीच चिंता का विषय भी बन गया है।

    Meenakshi Lekhi: कैलाश मानसरोवर यात्रा में बड़ा हादसा! घोड़े से गिरकर घायल हुई पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी

    रेस्क्यू के लिए प्रशासन ने बनाई रणनीति

    पिथौरागढ़ प्रशासन ने मीनाक्षी लेखी को सुरक्षित भारत लाने के लिए रेस्क्यू योजना तैयार कर ली है। उन्हें वाहन के माध्यम से लिपुलेख लाया जाएगा। इसके बाद एक टीम उन्हें स्टेचर या अन्य संसाधनों की सहायता से पैदल नाभीढांग तक ले जाएगी। यहां से हेलीकॉप्टर की मदद से उन्हें देहरादून एयरलिफ्ट किया जाएगा। रेस्क्यू ऑपरेशन में सावधानी और त्वरित कार्रवाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

    यात्रियों के लिए बना सबक और चेतावनी

    इस हादसे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कैलाश मानसरोवर जैसी कठिन यात्रा के लिए पर्याप्त सुरक्षा और चिकित्सा इंतजाम मौजूद हैं। घोड़े की सवारी जैसे जोखिम भरे साधनों का उपयोग करना कई बार भारी पड़ सकता है। मीनाक्षी लेखी जैसी वरिष्ठ और अनुभवी यात्री के साथ यह घटना साबित करती है कि हर कदम पर सतर्कता बेहद जरूरी है।

    यात्रा अधूरी लेकिन हौसला कायम

    हालांकि मीनाक्षी लेखी अपनी इस पवित्र यात्रा को पूरा नहीं कर सकेंगी लेकिन उनका साहस और आस्था सभी के लिए प्रेरणा है। प्रशासन ने तत्परता से रेस्क्यू की योजना बनाकर यह दिखा दिया कि संकट की घड़ी में व्यवस्था मुस्तैद है। अब सभी की दुआएं हैं कि वे जल्द स्वस्थ हों और भविष्य में एक बार फिर यह यात्रा पूरी कर सकें।