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  • दीपेंद्र हुड्डा ने कहा MSP पर किसानों को बोनस चाहिए, चुनावी वादे और सरकारी खरीद में बड़ा फासला नजर आया

    दीपेंद्र हुड्डा ने कहा MSP पर किसानों को बोनस चाहिए, चुनावी वादे और सरकारी खरीद में बड़ा फासला नजर आया

    पानीपत, 28 सितंबर। सांसद दीपेंद्र हुड्डा आज समालखा के कई सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि हरियाणा का किसान बाढ़ की मार से उबर भी नहीं पाया कि अब उसे सरकारी मार ने अपनी चपेट में ले लिया। सरकार ने बड़े-बड़े वादे तो किए लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह नाकाम रही। सरकारी खरीद बंद रहने से किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ रही है। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार किसान और मंडी तंत्र को बर्बाद करने पर तुली हुई है। मंडियों में सरकारी खरीद न होने के कारण किसानों को अपनी धान 300 से 400 रुपये प्रति क्विंटल कम रेट पर बेचनी पड़ रही है। नमी का बहाना बनाकर सरकारी एजेंसियाँ खरीद से इनकार कर रही हैं, जिससे किसानों को कई दिन-रात इंतज़ार करना पड़ रहा है। दीपेन्द्र हुड्डा ने मांग करी कि किसानों से MSP पर खरीद के साथ उन्हें बोनस दिया जाए।

    दीपेंद्र हुड्डा ने कहा MSP पर किसानों को बोनस चाहिए, चुनावी वादे और सरकारी खरीद में बड़ा फासला नजर आया

    दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि बीजेपी ने चुनाव से पहले धान के किसानों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल का रेट देने का वादा किया था, लेकिन न पिछले सीजन में और न ही इस सीजन में यह वादा पूरा हुआ। आज प्रदेश की मंडियों में धान की आवक तेज़ है, लेकिन खरीद न होने से किसान भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। धान, बाजरा, कपास और अन्य फसलों की सरकारी खरीद समय पर न होने से किसान मंडियों में भटक रहे हैं। उपज बिकने की जगह खुले आसमान के नीचे खराब हो रही है। कई जगह पोर्टल पर वेरिफिकेशन न होने के कारण गेट पास नहीं बन पा रहे हैं। कहीं राइस मिलर्स के रजिस्ट्रेशन न होने की वजह से दिक्कत आ रही है। इस सारी व्यवस्था का बिचौलिये उठा रहे हैं। 2,369 रुपये MSP की धान को 1,900 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर खरीदा जा रहा है।

    दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि भारतीय उत्पादों पर 50% अमेरिकी टैरिफ का जवाब देने की बजाय बीजेपी सरकार ने विदेशी कपास पर 11% आयात शुल्क को ख़त्म करके अमेरिका और विदेशी कंपनियों को खुश तो कर दिया लेकिन भारतीय किसानों की पीठ में छुरा मार दिया है। स्वदेशी का नारा लगाने वाली बीजेपी सरकार किसानों की नहीं, बल्कि बड़े पूंजीपतियों और विदेशी कंपनियों की जेब भरने के लिए काम कर रही है। उन्होंने मांग करी कि विदेशी कपास पर 11% इम्पोर्ट ड्यूटी वापस बहाल की जाए। टेक्सटाइल इंडस्ट्री को घरेलू कपास खरीदने के लिए बाध्यकारी नीति बनाई जाए। हरियाणा, पंजाब समेत सभी राज्यों के कपास किसानों को MSP गारंटी मिले, सरकारी खरीद हो।

  • Haryana: अभय सिंह चौटाला ने सरकार से किसानों को 50 हजार रूपए प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की।

    Haryana: अभय सिंह चौटाला ने सरकार से किसानों को 50 हजार रूपए प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की।

    Haryana के आठ जिलों में भारी बारिश के चलते खेतों में पानी भर गया है जिससे करीब 55 हजार एकड़ की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। धान नरमा बाजरा मूंगफली और सब्जियां सब कुछ जलभराव की भेंट चढ़ गईं। इससे किसानों की मेहनत और पूंजी दोनों तबाह हो गई हैं।

    जिलेवार नुकसान की भयावह तस्वीर

    अभय चौटाला ने जिन जिलों में सर्वाधिक नुकसान बताया उनमें रोहतक में सबसे ज्यादा 19000 एकड़ में फसल बर्बाद हुई है। इसके बाद भिवानी में 12000 एकड़ झज्जर में भी इतनी ही जमीन डूबी है। हिसार में 7000 एकड़ सिरसा में 2000 फतेहाबाद में 1800 कुरुक्षेत्र में 800 और यमुनानगर में 500 एकड़ जमीन बर्बाद हो गई है।

    Haryana: अभय सिंह चौटाला ने सरकार से किसानों को 50 हजार रूपए प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की।

    प्रशासन की लापरवाही बनी किसानों की मुसीबत

    इनेलो नेता का आरोप है कि प्रशासन ने जलभराव से निपटने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। जिन खेतों में पानी भरा है वहां से निकासी की व्यवस्था तक नहीं हुई है। किसान अपनी फसलों की बर्बादी से परेशान हैं और कर्ज के बोझ तले दब चुके हैं। सरकार की बेरुखी ने हालात को और गंभीर बना दिया है।

    मुआवजे की मांग और खर्चों का आंकलन

    अभय चौटाला ने कहा कि एक एकड़ में किसान का खर्च 50000 रुपये से अधिक बैठता है जिसमें ठेका खाद बीज दवाइयां और डीजल जैसी चीजें शामिल हैं। ऐसे में सरकार को तुरंत विशेष गिरदावरी करवा कर किसानों को कम से कम 50000 रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा देना चाहिए। ताकि किसान अगली फसल की तैयारी कर सके।

    इनेलो ने सरकार पर बोला हमला

    अभय चौटाला ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों के प्रति पूरी तरह असंवेदनशील है। हर साल जलभराव से फसलें बर्बाद होती हैं लेकिन सरकार कोई ठोस समाधान नहीं निकालती। किसानों की मदद की बजाय उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। इनेलो ने यह मांग दोहराई है कि यदि सरकार समय रहते कार्रवाई नहीं करती तो किसान आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।