Haryana News: हरियाणा जिसे भारत का अन्नदाता प्रदेश कहा जाता है देश की अर्थव्यवस्था में कृषि के माध्यम से अहम योगदान देता है। यहां की उपजाऊ मिट्टी मेहनती किसान और आधुनिक कृषि तकनीकों ने हरियाणा को गेहूं और धान की फसल उत्पादन में अव्वल बनाया है। लेकिन इन दिनों हरियाणा के खेतों में फसलों की कटाई (Harvesting Season) का समय चल रहा है और गर्मी के बढ़ते तापमान के साथ ही फसलों में आग लगने (Crop Fire) की घटनाएं तेजी से बढ़ती जा रही हैं। इस संकट से निपटने के लिए हरियाणा की नवगठित सैनी सरकार ने एक्शन मोड (Action Mode) में आते हुए सख्त कदम उठाए हैं।
खेतों में आग की घटनाओं ने मचाई अफरा-तफरी
हरियाणा के विभिन्न जिलों से लगातार खेतों में आग लगने की खबरें आ रही हैं। गर्म हवा (loo) शॉर्ट सर्किट और कंबाइन हार्वेस्टर से निकल रही चिंगारी जैसे कई कारण इन घटनाओं के पीछे माने जा रहे हैं। बीते कुछ दिनों में फतेहाबाद हिसार कैथल करनाल और सिरसा जैसे जिलों में सैकड़ों एकड़ गेहूं की फसल (Wheat Crop) जलकर राख हो गई। कुछ जगहों पर तो कटाई के बाद खुले में पड़े अनाज को बारिश (Unseasonal Rain) ने भी नुकसान पहुंचाया जिससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ी।
इन घटनाओं से आहत होकर मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सख्त रुख अपनाया है और सभी जिलों के उपायुक्तों (DCs) को निर्देश जारी किए हैं कि वो फायर सेफ्टी (Fire Safety) को लेकर तत्काल प्रभाव से ठोस कदम उठाएं।
हर शुक्रवार देनी होगी रिपोर्ट
सरकार की तरफ से सभी जिलों के डीसी को पत्र भेजा गया है जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि गेहूं की कटाई पूरी होने तक हर शुक्रवार को आग की घटनाओं की जानकारी और उठाए गए सुरक्षा उपायों की रिपोर्ट मुख्यालय भेजनी अनिवार्य होगी। यह रिपोर्ट उपायुक्तों को व्यक्तिगत तौर पर देनी होगी जिससे किसी भी तरह की लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी किसान को फसल जलने की वजह से नुकसान न उठाना पड़े। रिपोर्ट में आग लगने के स्थान (location) समय (time) और कारण (cause) का पूरा विवरण मांगा गया है।
कृषि विभाग को मिली बड़ी जिम्मेदारी
सीएम सैनी ने कृषि विभाग को सख्त हिदायत दी है कि हर आग की घटना की विस्तृत जांच की जाए और एक ठोस रिपोर्ट तैयार कर उसे शासन को सौंपा जाए। इसके अलावा खेतों के पास फायर ब्रिगेड की तैनाती और जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
कृषि विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक कई बार किसान खुद भी एहतियात नहीं बरतते। कंबाइन चलाते वक्त अगर थ्रेशर में कोई तकनीकी खराबी हो जाए या पास में कोई ज्वलनशील वस्तु हो तो आग लगने की आशंका बढ़ जाती है। अब इन बातों को लेकर भी ट्रेनिंग (Training) दी जाएगी।
फायर सेफ्टी के लिए ग्राम स्तर तक पहुंचा संदेश
गांवों में पंचायत स्तर पर फायर सेफ्टी मीटिंग कराई जा रही हैं। किसानों को बताया जा रहा है कि गेहूं के ढेर के पास बीड़ी-सिगरेट न पिएं कंबाइन में अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguisher) जरूर रखें और सूखी फसल के आसपास किसी भी प्रकार की चिंगारी या धुआं न आने दें।
सरकार ने यह भी निर्देश दिए हैं कि अगर किसी किसान की फसल जलती है तो तत्काल सर्वे कर मुआवजा निर्धारित किया जाए ताकि किसानों को आर्थिक सहायता मिल सके।
अनाज मंडियों में भी विशेष सतर्कता
फसलों के साथ-साथ अब मंडियों (Grain Markets) में भी सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हाल ही में रोहतक और झज्जर की मंडियों में भारी बारिश के कारण खुले में रखा अनाज भीग गया था। इससे सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ा।
अब सभी मंडी सचिवों को कहा गया है कि अनाज को ढककर रखें और मंडियों में जल निकासी व्यवस्था को सुधारें। साथ ही फायर अलार्म सिस्टम बाल्टियां रेत और पानी की सुविधा हर शेड में अनिवार्य की गई है।
सीएम सैनी का साफ संदेश
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने अपने अधिकारियों से साफ तौर पर कहा है हरियाणा का किसान मेहनतकश है। उसकी मेहनत को इस तरह आग में जलते नहीं देखा जा सकता। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि समय रहते हर संभव कदम उठाए जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि इस बार किसी भी किसान को मुआवजे के लिए चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सभी मामलों में फास्ट ट्रैक सर्वे कर मुआवजा राशि सीधे किसान के खाते में भेजी जाएगी।