पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री रहे लियाकत अली खान की पारिवारिक जमीन के मामले की जांच CBI करेगी। खान की पारिवारिक जमीन हरियाणा के करनाल जिले के गांव डबकौली खुर्द में है। जमीन भी पांच-सात एकड़ नहीं बल्कि 1200 एकड़ है। इसके अलावा शहर में भी दुकानें और आवासीय संपत्ति है, जिनकी बाजार कीमत 2500 करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी गई है।
यह जमीन लियाकत अली खान के चचेरे भाई उमरदराज अली खान की मलकियत थी, जिनकी साल 1935 में मौत हो गई थी। बाद में उनके वारिसों के नाम इंतकाल दर्ज हुआ। हालांकि देश के बंटवारे के बाद वारिस पाकिस्तान चले गए थे। इसके बाद से इस जमीन को खुर्द-बुर्द करने का खेल शुरू हुआ। साल 2022 में कुछ ग्रामीणों ने इसकी शिकायत हरियाणा के तत्कालीन गृहमंत्री अनिल विज से की थी। इस मामले को लेकर शिकायतें लगातार होती रहीं, लेकिन जांच अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण के चलते न्याय नहीं हुआ।
कहीं से न्याय न मिलता देख कुछ ग्रामीणों ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाई। जिस पर सुनवाई करते हुए 12 सितंबर को हाईकोर्ट ने CBI को जांच सौंप दी। CBI को इस मामले की चार माह में जांच पूरी करके रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपनी है। अदालत ने इस मामले में 12 जनवरी 2026 की अगली सुनवाई तय की है।

लियाकत अली खान का जन्म करनाल के डबकौली गांव में हुआ। उनका परिवार जमींदार मुस्लिम परिवार था। उनके पिता नवाब रुकनुद्दौला बड़े जमींदार थे और ब्रिटिश सरकार से नवाबी उपाधि प्राप्त कर चुके थे। खान प्रारंभिक शिक्षा भारत में हुई और फिर वह उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड गए, जहां उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। इसी जमींदार परिवार से थे उमरदराज अली खान। जिनकी जमीन को लेकर सारा विवाद है।
इस केस को देख रहे एडवोकेट कर्ण शर्मा बताते हैं कि गांव डबकौली के सोनू, धनप्रकाश, वेदप्रकाश, विष्णु, लखमीर, सतपाल सरपंच, विक्रम ने 4 मई 2022 को हरियाणा के तत्कालीन गृह मंत्री को शिकायत दी। इसमें कहा कि वे गांव डबकौली खुर्द में लंबे समय से खेती कर रहे हैं। 1935 में उमरदराज अली खान की मृत्यु के बाद उनकी करीब 1200 एकड़ भूमि का इंतकाल पांच पुत्रों नवाबजादा शमशाद अली खां, इरशाद अली खां, एजाज अली खां, मुमताज अली खां और इम्तियाज अली खां के नाम हुआ। उनकी बेटी जहांगीर बेगम का विवाह 1918 में प्रधानमंत्री नवाबजादा लियाकत अली खान से हुआ।
1945-46 में डबकौली खुर्द गांव उजड़ गया और इसका रकबा यमुना नदी के बहाव के साथ उत्तर प्रदेश की ओर चला गया। आजादी के बाद उमरदराज अली खान के सभी औलाद पाकिस्तान चले गई। 1950 में उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘जमींदारी एबोलिशन लैंड रिफॉर्म्स एक्ट’ लागू किया। इसके तहत राज्य ने सारी भूमि अपने हाथों में ले ली और उमरदराज अली खान के वारिसों की जमीन ‘एवाक्यूई प्रॉपर्टी’ घोषित हो गई। ये वो संपत्ति होती है, जो उन लोगों द्वारा छोड़ दी गई थी, जो विभाजन के समय भारत से पाकिस्तान या पाकिस्तान से भारत माइग्रेट हुए। 1962 में जनरल कस्टोडियन ऑफ इंडिया ने अंतिम फैसला दिया कि यह जमीन अब कस्टोडियन के अधीन होगी।
1990 के दशक में कुछ भूमाफियाओं ने झूठी वसीयत और फर्जी वारिस दिखाकर करीब 6000 बीघा यानी लगभग 1200 एकड़ कृषि भूमि पर कब्जा कर लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि इसमें पटवारियों, कानूनगो, चकबंदी अधिकारियों, राजस्व विभाग के बड़े अधिकारियों, सरकारी वकीलों और कुछ राजनीतिक लोगों की मिलीभगत रही। 2005 में ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हरियाणा को 150-200 शिकायतें सौंपीं। इसके आधार पर इंद्री थाने में एफआईआर नंबर 291 दर्ज हुई। इसमें धारा 420, 465, 467, 468, 471 और 120-बी लगाई गई। मगर, जांच अधिकारियों ने भूमाफियाओं से मिलीभगत कर शिकायत पत्रों और अंतिम जांच रिपोर्ट को दबा दिया। यह रिपोर्ट आज भी पंचकूला स्थित पुलिस मुख्यालय में दबाकर रख रखी है।
