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  • सम्मान दिवस रैली से Abhay Singh Chautala तोलेंगे अपनी ताकत, ‘राइट टू रिकॉल’ से 2029 का सफर आसान बनाने की तैयारी

    सम्मान दिवस रैली से Abhay Singh Chautala तोलेंगे अपनी ताकत, ‘राइट टू रिकॉल’ से 2029 का सफर आसान बनाने की तैयारी

    इनेलो सुप्रीमो Abhay Singh Chautala 25 सितंबर को रोहतक में सम्मान दिवस रैली से अपनी राजनीतिक ताकत तोलने का काम करेंगे। विधानसभा चुनाव में इनेलो को दो सीटों पर जीत हासिल हुई थी। खुद अभय चौटाला चुनाव हार गए थे। अभय चौटाला ने विधानसभा चुनाव के बाद से ही पूरे हरियाणा में इनेलो के संगठन को मजबूत करने का अभियान चलाया है। इस एक साल में उन्होंने जो अभियान चलाया है इसका असर कितना है वह इस रैली से पता चलेगा।

    यह आयोजन केवल पूर्व उपप्रधानमंत्री दिवंगत चौ. देवीलाल की जयंती तक सीमित नहीं है, इसे हरियाणा की राजनीति में इनेलो की पुनर्स्थापना की बड़ी कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में इनेलो से अलग हुए और इनके ही परिवार के अजय चौटाला और दुष्यंत चौटाला को जबर्दस्त झटका लगा था। रोहतक लंबे समय से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गढ़ माना जाता है। जाटलैंड की इस धरती पर पैर जमाना किसी भी राजनीतिक दल के लिए भविष्य की राजनीति का दरवाजा खोल सकता है।

    Abhay Singh Chautala यहां रैली आयोजित कर न केवल कांग्रेस को सीधी चुनौती देने का संकेत कर रहे हैं, बल्कि यह भी दिखाना चाहते हैं कि इनेलो अब फिर से जाट बेल्ट में पैठ बनाने की तैयारी में है। इनेलो के लिए पिछले कुछ साल बेहद कठिन रहे। 2019 में परिवार में फूट पड़ी और अजय सिंह चौटाला ने जजपा बनाकर अलग राह पकड़ ली। इस बिखराव का असर पहले 2019 और फिर 2024 के विधानसभा चुनावों में साफ दिखाई दिया, जब इनेलो का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। अब अभय चौटाला एक बार फिर संगठन को खड़ा करने और कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने की कोशिश कर रहे हैं।

    सम्मान दिवस रैली से Abhay Singh Chautala तोलेंगे अपनी ताकत, ‘राइट टू रिकॉल’ से 2029 का सफर आसान बनाने की तैयारी

    ताऊ देवीलाल की विरासत का सहारा और ‘राइट टू रिकॉल’ जैसे मुद्दे को हथियार बनाकर वे यह संदेश देना चाहते हैं कि चौटाला परिवार की राजनीति अब भी जिंदा है। 2029 की ओर बढ़ती रणनीति में यह रैली उनका पहला बड़ा दांव होगी।

    अभय चौटाला का असली लक्ष्य 2029 है। उनका फोकस फिलहाल संगठन को मजबूत करने और धीरे-धीरे जनता के बीच भरोसा जीतने पर है। वे जाट बेल्ट में पकड़ बनाकर इनेलो को भाजपा और कांग्रेस दोनों के विकल्प के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं। रोहतक की रैली इस मिशन का पहला बड़ा पड़ाव है।

    पूर्व उपप्रधानमंत्री चौ. देवीलाल ने सबसे पहले संविधान में संशोधन कर ‘राइट टू रिकॉल’ लागू करने की आवाज उठाई थी। अभय चौटाला ने घोषणा की है कि 25 सितंबर की रैली में इस मुद्दे को फिर से जोर-शोर से उठाया जाएगा। इस अधिकार का मतलब है कि जनता किसी भी विधायक या सांसद को जो वादे पूरे न करे, बीच कार्यकाल में वापस बुला सके और नया प्रतिनिधि चुन सके। अभय का कहना है कि यह अधिकार लागू होते ही झूठे वादों पर रोक लगेगी और कुर्सी जाने के डर से नेता ईमानदारी से जनता की सेवा करेंगे।