Haryana Dhaaga King: हरियाणा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मेहनत हुनर और जज्बे से कोई भी मुकाम पाया जा सकता है। कभी सिर्फ खेती-बाड़ी के लिए पहचाना जाने वाला हरियाणा अब इंडस्ट्री और मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) में भी देश-दुनिया में झंडे गाड़ रहा है। पानीपत (Panipat) जिसे पहले ही टेक्सटाइल सिटी (Textile City) के नाम से जाना जाता था अब धागा (Yarn) उत्पादन में भी पूरी दुनिया में नंबर वन बन चुका है। पानीपत ने इटली (Italy) जैसे विकसित देश को पछाड़ते हुए सबसे बड़ा धागा हब (Yarn Hub) बनने का गौरव हासिल किया है।
पानीपत बना वर्ल्ड का सबसे बड़ा धागा हब
अब से जब भी दुनिया में कहीं भी जुराब (Socks) टी-शर्ट (T-Shirts) या पैंट (Pants) की बात होगी तो वहां पानीपत के धागे का ज़िक्र ज़रूर होगा। यहां पुराने रग्ज (Rugs) और वेस्ट कपड़ों से धागा बनाकर इंटरनेशनल मार्केट (International Market) में एक्सपोर्ट किया जा रहा है। पानीपत की 200 से ज्यादा धागा यूनिट्स रोजाना 30-35 लाख किलोग्राम तक धागे का उत्पादन कर रही हैं। ये आंकड़ा हर महीने करीब 10.5 करोड़ किलोग्राम तक पहुंच जाता है। बीते दो सालों में यह उत्पादन 10 लाख किलोग्राम तक बढ़ चुका है जो इस क्षेत्र की प्रगति का मजबूत सबूत है।
50 नई यूनिट्स ने बढ़ाई ताकत
इस दौरान पानीपत में 50 नई धागा मिलें भी स्थापित हुई हैं जिससे उत्पादन क्षमता और ज्यादा बढ़ गई है। जबकि इटली में अभी भी प्रतिदिन 20-25 लाख किलोग्राम धागे का ही निर्माण हो रहा है। यानि पानीपत अब इटली को भी पछाड़ चुका है। यहां की क्वालिटी भी किसी से कम नहीं है। अब तो धागा मिलों में जर्मनी (Germany) से लाई गई सुपर मॉडर्न मशीनें (Advanced Machines) लगाई गई हैं जो पुराने सिस्टम से कहीं ज्यादा बेहतर आउटपुट दे रही हैं।
मशीनों ने लाया इंडस्ट्री में क्रांति
पानीपत में मौजूद 510 मशीनें अब धागा उत्पादन कर रही हैं। एक नई मशीन का काम तीन पुरानी मशीनों के बराबर होता है और क्वालिटी भी दोगुनी होती है। इससे न केवल उत्पादन तेज हुआ है बल्कि पर्यावरण (Environment) और पॉल्यूशन (Pollution) पर भी नियंत्रण पाया गया है। यानी टेक्नोलॉजी (Technology) और पर्यावरण के बीच अब संतुलन बन रहा है।
पानीपत बना री-साइक्लिंग का ग्लोबल हब
पानीपत आज सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा रिसाइक्लिंग (Recycling) हब बन चुका है। यहां 80 से ज्यादा देशों से वेस्ट मटीरियल आता है जिसे पानीपत के उद्यमी नई जान देकर धागे में बदलते हैं। इस प्रोसेस को रिसाइक्लिंग कॉटन यार्न (Recycled Cotton Yarn) कहा जाता है। इस कारोबार का साइज 6000 करोड़ रुपये सालाना से ज्यादा है। इसने न केवल पानीपत की इकोनॉमी (Economy) को बूस्ट दिया है बल्कि हजारों लोगों को रोजगार (Employment) भी दिया है।
अमेरिका से मिली टैरिफ छूट
अब अमेरिका (USA) ने रिसाइक्लिंग धागे पर टैरिफ में छूट दे दी है जिससे यहां के उद्यमियों ने उत्पादन और भी तेज कर दिया है। लेकिन साथ ही साथ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। हाल ही में हरियाणा सरकार ने इंडस्ट्रीज के लिए बिजली के रेट में करीब 56 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है। पहले जहां एक किलोवाट पर 165 रुपये का खर्च आता था अब वही खर्च 290 रुपये तक जा पहुंचा है।
बढ़ती बिजली दरों से संकट में धागा इंडस्ट्री
पानीपत के उद्यमियों का कहना है कि एक यूनिट जिसका बिजली बिल पहले 1.65 लाख रुपये आता था अब वह 2.90 लाख रुपये का बिल दे रही है। अब जबकि एक किलोग्राम धागे पर मुनाफा महज 2 रुपये है और उत्पादन लागत बढ़कर 3 रुपये तक हो गई है तो कई धागा मिलें घाटे में जा सकती हैं। इससे इस उभरते उद्योग पर बड़ा संकट आ सकता है।
