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  • Mohan Bhagwat का साहसिक बयान- महिलाओं में हैं पुरुषों से अधिक गुण, कब मानेगा समाज?

    Mohan Bhagwat का साहसिक बयान- महिलाओं में हैं पुरुषों से अधिक गुण, कब मानेगा समाज?

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने महाराष्ट्र के सोलापुर में आयोजित ‘उद्योगवर्धिनी’ कार्यक्रम में महिलाओं को लेकर एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ कहा कि महिलाओं को अब उन पुरानी परंपराओं और रूढ़ियों से बाहर निकलना होगा जो उन्हें पीछे खींचती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राष्ट्र की तरक्की तभी हो सकती है जब महिलाएं सशक्त हों और समाज उन्हें बराबरी का दर्जा दे।

    महिलाएं सिर्फ काम नहीं करतीं बल्कि भविष्य गढ़ती हैं

    मोहन भागवत ने पुरुषों और महिलाओं की भूमिका को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दोनों ही जीवनभर मेहनत करते हैं लेकिन महिलाओं का योगदान सिर्फ काम तक सीमित नहीं रहता। वे भावी पीढ़ियों को संस्कार देती हैं। उनका स्नेह, धैर्य और मार्गदर्शन बच्चों के निर्माण में बड़ी भूमिका निभाता है। इसलिए महिलाओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    Mohan Bhagwat का साहसिक बयान- महिलाओं में हैं पुरुषों से अधिक गुण, कब मानेगा समाज?

    पुरुषों की सोच को बताया भ्रम

    भागवत ने उन पुरुषों की सोच पर सवाल उठाया जो खुद को महिलाओं का उद्धारक मानते हैं। उन्होंने कहा कि पुरुषों को यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि वे महिलाओं को ऊपर उठाएंगे। ईश्वर ने महिलाओं को पहले से ही वो सारे गुण दिए हैं जो पुरुषों में होते हैं बल्कि कई ऐसे गुण भी दिए हैं जो पुरुषों से अलग और विशेष हैं। ये गुण उन्हें आत्मनिर्भर और प्रभावशाली बनाते हैं।

    संघ के 100 वर्ष पूरे होने की तैयारी

    मोहन भागवत के इस कार्यक्रम का समय भी विशेष था क्योंकि 2 अक्टूबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने 100 वर्ष पूरे कर रहा है। खास बात यह है कि 2 अक्टूबर को गांधी जयंती भी है और इसी दिन विजया दशमी भी है। यही वह दिन है जब संघ की स्थापना हुई थी। इस ऐतिहासिक मौके पर पूरे देश में संघ के स्वयंसेवकों को शाखाओं में भाग लेने का आह्वान किया गया है।

    संघ का ‘गृह संपर्क’ और बड़े आयोजन

    संघ की योजना है कि इस शताब्दी वर्ष पर बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचा जाए। इसके तहत ‘गृह संपर्क’ अभियान चलाया जाएगा जिसमें स्वयंसेवक 25 से 30 घरों में जाकर संघ के कार्यों की जानकारी देंगे। इसके अलावा जिलों में 100 से 200 लोगों की गोष्ठियां आयोजित की जाएंगी। ग्रामीण इलाकों में मंडल स्तर पर और शहरों में बस्ती स्तर पर हिन्दू सम्मेलन भी किए जाएंगे। बड़े स्तर पर पथ संचलन और रामधुन के आयोजन की भी योजना है।