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  • Punjab News: एक पेड़ ने बचाई चार लोगों की जान, पेड़ ना होता तो पहुंच जाते पाकिस्तान

    Punjab News: एक पेड़ ने बचाई चार लोगों की जान, पेड़ ना होता तो पहुंच जाते पाकिस्तान

    Punjab News: कहते हैं पेड़ मनुष्य को जीवन देने का काम करते हैं। यूं तो यह बात 100% सत्य है लेकिन पंजाब में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर एक ऐसा वाक्या भी हुआ है कि अगर एक पेड़ ना होता तो चार आदमी बच भी जाते तो पाकिस्तान की जेल में बंद होते। एक पेड़ ने न केवल उनका जीवन बचाया बल्कि उन्हें कई तरह की मुसीबत से भी बचाने का काम किया।

    भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर पंजाब में गांव के गांव डूब गए हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में एक बड़ा बचाव अभियान चलाया गया। इस दौरान NDRF की टीम ने चार युवाओं को बचाया। ये सभी बाढ़ के पानी में एक यूकेलिप्टस के पेड़ से चिपके हुए थे। यह पेड़ पाकिस्तान बॉर्डर पर है। रेस्क्यू टीम ने बताया कि अगर युवक पेड़ से चिपककर न रुकते तो बहकर पाकिस्तान चले गए होते।

    Punjab News: एक पेड़ ने बचाई चार लोगों की जान, पेड़ ना होता तो पहुंच जाते पाकिस्तान

    जिन लड़कों को रेक्स्यू किया गया है, उनमें एक 16 साल का लड़का भी शामिल था। वह लड़का फाजिल्का के तेजा रोहेल्ला गांव का रहने वाला है और बाढ़ के पानी में बह गया था। यह गांव जीरो लाइन पर स्थित है। एनडीआरएफ टीम ने बताया कि 16 साल के फंसे लड़के को बचाने के लिए तीन युवा आगे आए। वे उसे बचाने की कोशिश कर रहे थे कि अचानक तेज बहाव में वे भी उसके साथ बह गए। लेकिन वे चारों बहकर पाकिस्तान में चले जाते।

    लेकिन एक यूकेलिप्टस के पेड़ ने उन्हें बचा लिया। वे सभी अपनी जान बचाने के लिए उस पेड़ से कसकर चिपक गए। वे वहीं चिपके रहे और मदद का इंतजार करते रहे। काफी देर बाद जब टीम वहां पहुंची तो उन्होंने चारों से वहां से निकाला। यह पेड़ पाकिस्तान बॉर्डर पर ही है। युवक उस पेड़ की दूसरी तरफ निकल जाते तो पानी के साथ सीधा बहकर पाकिस्तान जाते। उनकी जान को भी खतरा था लेकिन भगवान ने उनकी जान बचा ली। कुछ दिन पहले, ग्रामीणों ने मिलकर एक नाव को पाकिस्तान में बहने से बचाया था।

  • राष्ट्रपति तटरक्षक अवार्ड से सम्मानित होंगे सफीदों के कमांडेंट राजकमल अत्री, पाकिस्तानी जहाज से बचाये थे 7 भारतीय मछुआरे

    राष्ट्रपति तटरक्षक अवार्ड से सम्मानित होंगे सफीदों के कमांडेंट राजकमल अत्री, पाकिस्तानी जहाज से बचाये थे 7 भारतीय मछुआरे

    सफीदों उपमंडल के गांव सरनाखेड़ी के छोरे एवं इंडियन कोस्ट गार्ड में बतौर कमांडेंट तैनात राजकमल अत्री का राष्ट्रपति तटरक्षक अवार्ड के लिए चयन हुआ है और जल्द ही उन्हे राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्म द्वारा उन्हे यह अवार्ड प्रदान किया जाएगा। यह पदक उनके विशिष्ट वीरता, असाधारण कर्तव्यनिष्ठा और सराहनीय सेवा के सम्मान में प्रदान किया जाएगा। उनके इस उच्च स्तरीय अवार्ड के चयन की खबर पाकर गांव ही नहीं बल्कि पूरे सफीदों क्षेत्र में खुशी की लहर है। उनके निवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। गण्यमान्य लोग उनके पिता एडवोकेट नरेश कुमार अत्री से मिलकर बधाई दे रहे हैं।

    गौरतलब है कि 17 नवंबर 2024 को समुंद्र में भारत-पाक सीमा के पास करीब 7 मछुआरे मछलियां पकड़ते-पकड़ते गलती से पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर गए। पाकिस्तानी मैरीटाइम सिक्योरिटी एजेंसी (पीएमएसए) का जहाज पीएमएस नुसरत इन मछुआरों को जबरदस्ती गिरफ्तार करके अपनी सीमा पर ले जा रहा था।

    
राष्ट्रपति तटरक्षक अवार्ड से सम्मानित होंगे सफीदों के कमांडेंट राजकमल अत्री, पाकिस्तानी जहाज से बचाये थे 7 भारतीय मछुआरे

    दोपहर करीब साढे तीन बजे भारतीय तटरक्षक बल के जहाज आईसीजी अग्रिम (आईसीजी अग्रिम) के पास भारतीय फिशिंग बोट कालभैरव से एक इमरजेंसी कॉल आई। इस डिस्ट्रेस कॉल के माध्यम से मदद मांगी गईं। मदद की कॉल आने के बाद इंडियन कोस्ट गार्ड में बतौर कमांडेंट तैनात राजकमल अत्री मौके पर पहुंचे और वे जान को जोखिम में डालकर मछुआरों को बचाने के लिए अदम्य साहस का परिचय देते हुए पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर गए। उन्होंने करीब पाकिस्तानी जहाज के साथ संघर्ष करते हुए सातो मछुआरों को बचा लिया और उन्हे सुरक्षित तरीके से भारतीय सीमा में प्रवेश करवाते हुए समुंद्री तट पर ले आए।

    सातों मछुआरों को पकड़कर पाकिस्तान ले जाने का प्लान था, जोकि असफल रहा। कमांडेंट राजकमल अत्री के इस साहसिक कार्य की इंडियन कोस्ट गार्ड में काफी प्रशंसा हुई। इंडियन कोस्ट गार्ड के अधिकारियों ने भी उनकी तारीफ करते हुए उन्हे अनेक प्रशंसा पत्र प्रदान किए गए और उनका नाम राष्ट्रपति तटरक्षक अवार्ड के लिए भेजा गया। अब उनका इस अवार्ड के लिए चयन हो गया है।

    पिता नरेश कुमार अत्री ने बताया कि उनका परिवार शुरू से ही देश सेवा के प्रति समर्पित है। राजकमल अत्री शुरू से ही देश सेवा में जाना चाहता था। काफी मेहनत करके वह आगे बड़ा और उसकी नियुक्त भारतीय तटरक्षक सेवा में हो गई। राजकमल शुरू से ही निडर स्वभाव का रहा है और उसी के बल पर उसने पाकिस्तानी सेना के छक्के छुडाते हुए 7 भारतीय मछुआरों को वह सुरक्षित बचाकर ले आया।

    उसकी उपलब्धि को देखते हुए उसका चयन राष्ट्रपति तटरक्षक अवार्ड के लिए हुआ है, जोकि स्वयं उनके लिए, परिवार के लिए, गांव के लिए व समूचे सफीदों इलाके के लिए गौरवपूर्ण बात है। उनका सीना आज गर्व के साथ चौड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि जब राजकमल गांव में आएगा तो उसका भव्य स्वागत किया जाएगा।

    देश सेवा से जुड़ा है परिवार

    कमांडेंट राजकमल अत्री का परिवार शुरू से ही देश सेवा से जुड़ा हुआ है। ख्खुद तो राजकमल अत्री भारतीय तटरक्षक सेवा में कंमाडेंट हैं ही, साथ ही साथ उनके छोटे भाई भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर हैं। वहीं उनके पिता नरेश कुमार अत्री भारतीय वायुसेना व परमाणू ऊर्जा विभाग से रिटायर्ड हैं। फिलहाल वे सफीदों सिविल कोर्ट में वकालत कर रहे हैं।