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  • ज्योति मल्होत्रा ने मांगी डिफाल्ट बेल, शनिवार को होगी सुनवाई, जाने पूरा मामला

    ज्योति मल्होत्रा ने मांगी डिफाल्ट बेल, शनिवार को होगी सुनवाई, जाने पूरा मामला

    पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में गिरफ्तार ज्योति मल्होत्रा मामले की सुनवाई सिविल जज सुनील कुमार की अदालत में हुई। ज्योति मल्होत्रा को चार्जशीट की प्रति दिए जाने पर बहस हुई। अदालत में सरकारी वकील ने कहा कि अभी जांच पूरी नहीं हुई है। ऐसे में संवेदनशील जानकारी देने से जांच प्रभावित हो सकती है। इसलिए आरोपी पक्ष को खुफिया जानकारी नहीं दी जाए। ज्योति मल्होत्रा के वकील ने इस बिंदु को आधार बनाते हुए डिफॉल्ट बेल (वैधानिक जमानत) की याचिका दायर की है, जिस पर अदालत ने पुलिस से शनिवार को जवाब मांगा है।

    अदालत में शुक्रवार को ज्योति मल्होत्रा के वकील कुमार मुकेश ने कहा कि पुलिस ने अभी तक जांच पूरी नहीं की है। भारतीय न्याय संहिता के अनुसार 14 अगस्त को पुलिस को ज्योति मल्होत्रा के खिलाफ जांच पूरी करनी थी। 14 अगस्त को पुलिस ने अधूरा चार्जशीट पेश करी थी। ज्योति को अब तक चार्जशीट की प्रति नहीं दी गई है।

    ज्योति मल्होत्रा ने मांगी डिफाल्ट बेल, शनिवार को होगी सुनवाई, जाने पूरा मामला

    इस तरह के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के आर्डर हैं कि अधूरी पुलिस जांच के मामले में आरोपी पक्ष का बेल का अधिकार है, जिसकी कॉपी कोर्ट में जमा कर दी गई है। अदालत चाहे तो बिना पुलिस का पक्ष सुने भी डिफ़ॉल्ट बेल भी दे सकती थी। इस मामले में पुलिस ने अधूरी चार्जशीट पेश की थी, इसी के चलते अदालत ने पुलिस को अपना पक्ष रखने का मौका दिया है।

    ज्योति के वकील कुमार मुकेश ने 193 की धारा 7 का हवाला देते हुए कहा कि यह हम चार्जशीट का पूरा हिस्सा नहीं दे सकते। पुलिस ने 14 अगस्त का चालान पेश किया, इसके 11 दिन बाद 25 अगस्त को एप्लीकेशन दी कि हम पूरी चार्जशीट नहीं दे सकते। 11 दिन बाद इस एप्लीकेशन का क्या अर्थ है। पुलिस को उसी दिन एप्लीकेशन देनी चाहिए थी। ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट का हवाला देकर पुलिस दस्तावेज देने से इन्कार नहीं कर सकती। पुलिस दोनों चालान की प्रति हमें दे, ताकि हम अपना जवाब तैयार कर सकें।

    मीडिया ब्रीफिंग रोकने की एप्लीकेशन पर कुमार मुकेश ने कहा कि पुलिस ने इस मामले में ब्रीफिंग कर ज्योति मल्होत्रा पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाए। ज्योति मल्होत्रा को देशद्रोही तक करार दिया जा रहा है। ज्योति के पिता का घर से निकलना दूभर हो गया है। अगर मैं ज्योति के मामले की कवरेज जनता तक नहीं जाएगी तो लोगों में बनी उसकी छवि कैसे ठीक होगी।

  • Safidon Murder Case: SIT की जांच में बड़ा खुलासा होगा? मुठभेड़ में घायल आरोपी से पूछताछ में जुटी पुलिस

    Safidon Murder Case: SIT की जांच में बड़ा खुलासा होगा? मुठभेड़ में घायल आरोपी से पूछताछ में जुटी पुलिस

    Safidon Murder Case: सफीदों में निजी अस्पताल संचालित करने वाले विकास शर्मा की हत्या की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह ने एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। इस टीम का नेतृत्व डीएसपी सफीदों को सौंपा गया है। एसआईटी में थाना शहर सफीदों के प्रभारी, सीआईए सफीदों प्रभारी और सीआईए जींद प्रभारी को शामिल किया गया है।

    एसआईटी इस हत्याकांड से जुड़े सभी तथ्यों की गहराई से जांच करेगी। इस मामले में पुलिस ने मुठभेड़ के बाद मुख्य आरोपी जयसिंहपुरा गांव वासी प्रदीप को राउंडअप कर लिया है, जो मुठभेड़ के दौरान पुलिस की गोली लगने से घायल होने पर इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

    घटना 24 जुलाई की देर रात रामपुर रोड पर हुई, जब विकास शर्मा पर हमला करके उसकी हत्या कर दी गई। उस समय उनके साथ निजी अस्पताल संचालक अनिल और उनका साढ़ू यशपाल भी कार में सवार थे। हमले में वे दोनों भी घायल हो गए, जिन्हें बाद में पानीपत के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    Safidon Murder Case: SIT की जांच में बड़ा खुलासा होगा? मुठभेड़ में घायल आरोपी से पूछताछ में जुटी पुलिस

    शहर थाना सफीदों पुलिस ने मृतक विकास के पिता शिवकुमार की शिकायत के आधार पर अनिल और यशपाल उर्फ़ हैप्पी को नामजद करते हुए आठ अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत हत्या का मामला दर्ज किया है।

    पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह ने स्पष्ट किया है कि डॉ. विकास हत्याकांड की जांच पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता और बिना किसी बाहिय दबाव के साथ की जा रही है। दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। इसके अतिरिक्त उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित पक्ष किसी भी जानकारी या शिकायत के लिए सीधे पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर सकते हैं।

    जिला पुलिस जींद ने हत्याकांड का पर्दाफाश करने के निष्पक्ष जांच की जा रही है और अपराधियों को सख्त सजा दिलवाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। पुलिस अधीक्षक ने भरोसा दिलाया है कि न्याय की प्रक्रिया में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।