Pratibha Shukla: कानपुर जिले में उस वक्त सियासी हलचल तेज हो गई जब योगी सरकार की राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला खुद धरने पर बैठ गईं। आमतौर पर विपक्ष द्वारा धरने और प्रदर्शन किए जाते हैं लेकिन इस बार खुद सरकार का हिस्सा होने के बावजूद मंत्री को धरने का सहारा लेना पड़ा। मंत्री का आरोप है कि कानपुर के एक पुलिस अधिकारी ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर झूठा एससी-एसटी एक्ट का मामला दर्ज किया है जो पूरी तरह गलत है।
मंत्री ने पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप
प्रभा शुक्ला ने आरोप लगाया कि पुलिस इंस्पेक्टर सतीश सिंह ने साजिश के तहत भाजपा कार्यकर्ताओं को फंसाया है। उन्होंने कहा कि जब तक इंस्पेक्टर को सस्पेंड नहीं किया जाएगा तब तक उनका धरना जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह सपा सरकार नहीं बल्कि योगीराज है जहां न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने पुलिस पर पक्षपात करने और स्थानीय गुंडों के साथ मिलकर झूठे मुकदमे दर्ज करने का आरोप भी लगाया।

पांच घंटे चले धरने का असर दिखा
इस धरने का असर अधिकारियों पर भी पड़ा। करीब पांच घंटे तक मंत्री धरने पर बैठीं रहीं। इस दौरान पुलिस महकमा हरकत में आ गया और चौकी प्रभारी को तत्काल हटा दिया गया। साथ ही एसएचओ के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए। यह निर्णय होते ही मंत्री ने धरना समाप्त किया।
निर्माण कार्य को लेकर शुरू हुआ विवाद
पूरी घटना की शुरुआत एक सड़क निर्माण प्रोजेक्ट को लेकर हुई। स्थानीय पार्षद शमशाद खान ने इस निर्माण कार्य को रोक दिया था जिससे मंत्री ने हस्तक्षेप किया। इस दौरान ठेकेदार जहूर अहमद ने खान पर जबरन वसूली और धमकी देने का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कराई। इसके जवाब में बाबूराम गौतम ने भी कई लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया। यहीं से विवाद और गहरा गया।
सियासी संग्राम बना प्रशासनिक लड़ाई
यह मामला अब सिर्फ एक सड़क निर्माण का विवाद नहीं रहा बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता और राजनीतिक दबाव का प्रतीक बन चुका है। भाजपा की राज्य मंत्री का इस तरह धरने पर बैठना यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच संघर्ष बढ़ता जा रहा है। इससे यह भी साफ हो गया कि सरकार में रहते हुए भी मंत्री अपने कार्यकर्ताओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।
