Haryana News: हरियाणा की सड़कों की कहानी किसी से छुपी नहीं है। चाहे शहर हों या गांव सड़कों पर चलना कभी-कभी ऐसा लगता है जैसे किसी एडवेंचर ट्रैक पर चल रहे हों। कहीं बड़े-बड़े गड्ढे (potholes) तो कहीं टूटी हुई टाइल्स और उखड़े डिवाइडर। आम आदमी के लिए बाइक चलाना भी रिस्क (risk) से खाली नहीं रहा। लेकिन अब सरकार ने ठान लिया है कि इस सड़क संकट का स्थायी हल निकाला जाएगा।
मुख्यमंत्री नायब सैनी ने अधिकारियों की बैठक में जो तेवर दिखाए हैं उससे साफ है कि अब लापरवाही नहीं चलेगी। सरकार ने पूरे राज्य की सड़कों को गड्ढा मुक्त (pothole-free) करने का मिशन लॉन्च कर दिया है और डेडलाइन रखी है 15 जून 2025। यानी मानसून से पहले हर गली हर हाईवे और हर कॉलोनी की सड़क दुरुस्त होनी चाहिए।
गड्ढा मुक्त सड़क अभियान
सीएम नायब सैनी ने आदेश दिए हैं कि हर जिले में गड्ढा मुक्त सड़क अभियान (Pothole-Free Road Campaign) चलाया जाए। इसका मकसद सिर्फ गड्ढे भरना नहीं बल्कि लोगों को सुरक्षित और बेहतर यात्रा का अनुभव देना है। क्योंकि मानसून में जब सड़कें और ज्यादा खराब होती हैं तब हादसों की संभावना भी बढ़ जाती है। इसी खतरे को भांपते हुए यह मिशन पहले ही शुरू कर दिया गया है।
हर जिले के डीसी (Deputy Commissioner) को हुक्म मिला है कि वे अपने-अपने क्षेत्र की सड़कों का सर्वे करें खराब सड़कों की लिस्ट बनाएं और तुरंत मरम्मत का काम शुरू करवाएं। जो सड़कें थोड़ी-बहुत टूटी हुई हैं उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी ताकि आमजन को राहत मिल सके।
अब जनता भी बनेंगी निगरानीकर्ता
अब बात करते हैं उस बड़े बदलाव की जो आम जनता को सीधे इस मिशन से जोड़ता है। 25 अप्रैल को हरियाणा सरकार ‘हर पथ 2.0’ नाम का मोबाइल ऐप लॉन्च करने जा रही है। ये ऐप खासतौर पर लोगों की शिकायतों को दर्ज करने के लिए डिजाइन किया गया है। अगर आपको कहीं गड्ढा नजर आए सड़क टूटी हो या काम अधूरा हो—बस फोटो खींचो ऐप में डालो और सीधे सरकार तक पहुंचा दो।
इस ऐप में जियो टैगिंग (Geo-tagging) ट्रैकिंग सिस्टम और टाइमलाइन भी दी जाएगी। यानी आप ये भी देख सकेंगे कि आपकी शिकायत कब तक हल की जाएगी और किस अधिकारी के जिम्मे है।
मुख्यमंत्री का कहना है कि इस ऐप के जरिए अफसरों की जवाबदेही भी तय होगी। अब कोई बहाना नहीं चलेगा—“सर जानकारी नहीं मिली” या “शिकायत नहीं आई”। अब हर नागरिक एक वॉचडॉग की तरह सिस्टम को मॉनिटर कर सकेगा।
ठेकेदारों पर सख्ती
एक और बड़ा फैसला सरकार ने यह लिया है कि जिन सड़कों की मरम्मत जल्दी खराब हो जाती है उनकी मरम्मत वही ठेकेदार करेगा जिसने पहली बार सड़क बनाई थी। यानि अब “कच्चा काम” करने वाले कॉन्ट्रैक्टर की खैर नहीं। ठेकेदार की गारंटी तय होगी और सड़क की क्वालिटी से कोई समझौता नहीं होगा।
इसके अलावा सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे टेंडर प्रक्रिया को लंबा न खींचें। कम समय वाले टेंडर (Short-Term Tender) की इजाजत दी गई है ताकि फटाफट काम शुरू हो सके।
मानसून से पहले डेडलाइन
हरियाणा में आमतौर पर जून के अंत तक मानसून दस्तक देता है। लेकिन बारिश शुरू होने से पहले ही सड़कें कमजोर हो जाएं तो हालात बिगड़ जाते हैं। पानी भरने से गड्ढे छुप जाते हैं और वाहन चालकों को बड़ा खतरा हो सकता है।
इसीलिए मुख्यमंत्री ने 15 जून 2025 की डेडलाइन तय की है। इसका मतलब साफ है जो भी करना है अगले डेढ़ महीने में कर लो। कोई बहाना नहीं कोई एक्सक्यूज़ (excuse) नहीं।
