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    Bihar News: कुत्ते के नाम बना सरकारी दस्तावेज़! कुत्ते को मिला आवास प्रमाण पत्र

    Bihar News: बिहार में 24 जुलाई को एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया जब एक कुत्ते के नाम पर बना आवास प्रमाण पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इंसानों के लिए बनने वाला यह प्रमाण पत्र जब एक जानवर के नाम पर जारी हुआ तो प्रशासन में हड़कंप मच गया। यह मामला राज्य सरकार के डिजिटल पोर्टल RTPS से जुड़ा हुआ है। इस मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सिस्टम में बिना किसी सत्यापन के कोई भी डेटा अपलोड हो सकता है।

    सोशल मीडिया पर उड़ रहा है मजाक

    सोशल मीडिया यूजर्स इस मामले को लेकर खूब व्यंग्य कर रहे हैं। किसी ने लिखा कि अगर ‘डॉग बाबू’ को आवास प्रमाण पत्र मिल सकता है तो कल को ‘बिल्ली दीदी’ को राशन कार्ड और ‘गाय माता’ को ड्राइविंग लाइसेंस मिल जाए, तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। लोग RTPS सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं और कह रहे हैं कि शायद अब उसे एंटी वायरस की ज़रूरत है क्योंकि वह बिना पहचान के किसी भी नाम पर डाटा एक्सेप्ट कर रहा है।

    Bihar News: कुत्ते के नाम बना सरकारी दस्तावेज़! कुत्ते को मिला आवास प्रमाण पत्र

    पहले भी हुए हैं ऐसे अजीब मामले

    इससे पहले भी बिहार में डिजिटल गड़बड़ियों की खबरें आ चुकी हैं। मुंगेर जिले में एक बार सोनालिका ट्रैक्टर को भी प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया था। यह घटनाएं बताती हैं कि सिस्टम में मैन्युअल निगरानी या सत्यापन की बहुत कमी है। अगर एक पशु या मशीन के नाम पर भी सरकारी प्रमाण पत्र बन सकता है तो आम नागरिकों के दस्तावेजों की प्रमाणिकता पर भी संदेह होने लगता है।

    जांच के आदेश और प्रशासन की जवाबदेही

    जैसे ही मामला वायरल हुआ, प्रशासन ने तुरंत जांच के आदेश दे दिए। यह पता लगाया जा रहा है कि कुत्ते के नाम पर प्रमाण पत्र किसने जारी किया और इस लापरवाही के पीछे कौन जिम्मेदार है। हालांकि, यह भी देखा जा रहा है कि यह किसी की शरारत है या सिस्टम में कोई तकनीकी खामी। RTPS पोर्टल की कार्यप्रणाली और कर्मचारी की भूमिका पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

    Bihar News: कुत्ते के नाम बना सरकारी दस्तावेज़! कुत्ते को मिला आवास प्रमाण पत्र

    डिजिटल सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

    इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार सरकार के डिजिटल सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। जिस सिस्टम से जनता को आसानी होनी चाहिए, वही अगर बिना जांच के कुत्तों और ट्रैक्टरों को दस्तावेज देने लगे तो उसका औचित्य ही खत्म हो जाता है। जरूरी है कि सिस्टम को सुधारने के लिए तकनीकी अपग्रेड किया जाए और जिम्मेदार कर्मियों पर कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसा मजाक फिर ना हो।