Tag: journalist murder case

  • जेल में राखियों की बाढ़, Gurmeet Ram Rahim के नाम पर डाक विभाग में मचा हड़कंप

    जेल में राखियों की बाढ़, Gurmeet Ram Rahim के नाम पर डाक विभाग में मचा हड़कंप

    Gurmeet Ram Rahim जो कि साध्वियों के यौन शोषण मामले में दोषी हैं और उम्रकैद की सजा काट रहे हैं, उन्हें 40 दिन की पैरोल पर सिरसा डेरा भेजा गया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि राखियों का सिलसिला अब भी सुनारिया जेल के पते पर ही जारी है। मंगलवार और बुधवार को पोस्टल विभाग के अनुसार लगभग 500 राखियां जेल में भेजी गईं जबकि गुरमीत अब जेल में मौजूद ही नहीं हैं।

    डाक विभाग की तकनीकी दिक्कत ने बढ़ाई परेशानी

    पिछले कुछ दिनों से डाक विभाग की सॉफ्टवेयर प्रणाली में दिक्कत चल रही है। इसके कारण अन्य पोस्टमैन भी राखियां और पत्रों की जानकारी अपडेट नहीं कर पा रहे हैं। सोमवार को ही गुरमीत के नाम दो बोरियों में राखियां जेल में पहुंचीं। मंगलवार को वह डेरा सिरसा चले गए लेकिन डाकिया अब भी जेल के पते पर राखियां पहुंचा रहे हैं।

    जेल में राखियों की बाढ़, Gurmeet Ram Rahim के नाम पर डाक विभाग में मचा हड़कंप

    2020-21 में 40 हजार से ज्यादा राखियां पहुंची थीं

    हालांकि इस बार राखियों की संख्या कम नजर आ रही है लेकिन 2020 और 2021 में लगभग 30 से 40 हजार राखियों के पैकेट गुरमीत के लिए डाक से भेजे गए थे। इस बार संख्या कम है लेकिन भावना उतनी ही गहरी दिख रही है। पिछले साल की तुलना में भी इस बार राखियां ज्यादा नजर आ रही हैं। डाक विभाग ने छंटाई के लिए खास स्टाफ की तैनाती की है।

    गुनाह के बावजूद बना हुआ है गुरमीत का प्रभाव

    गुरमीत राम रहीम को 25 अगस्त 2017 को दो साध्वियों के यौन शोषण के मामले में दोषी ठहराया गया था। 27 अगस्त को उन्हें गिरफ्तार किया गया और 28 अगस्त को 20 साल की कठोर सजा सुनाई गई। इसके बाद जनवरी 2019 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में भी उन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली। बावजूद इसके उनके अनुयायियों में अब भी एक भावनात्मक जुड़ाव बना हुआ है।

    जेल में नहीं फिर भी बहनों ने नहीं छोड़ा साथ

    इस बार राखियां सीधे गुरमीत तक नहीं पहुंच पा रहीं फिर भी बहनों ने विश्वास का धागा नहीं तोड़ा। डाक विभाग के अफसरों के मुताबिक आने वाले दो दिनों में और भी राखियां पहुंचने की संभावना है। फिलहाल जो दो बोरियां आई हैं उनमें राखियों की छंटनी का काम जारी है और इसके लिए अलग स्टाफ लगाया गया है। यह मामला दिखाता है कि दोषी करार दिए जाने के बाद भी गुरमीत का प्रभाव और श्रद्धा कितनी गहरी है।