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  • Hindi Diwas 2025: पीएम मोदी और अमित शाह ने दी शुभकामनाएं, भारतीय भाषाओं का गौरव बढ़ाने का संदेश!

    Hindi Diwas 2025: पीएम मोदी और अमित शाह ने दी शुभकामनाएं, भारतीय भाषाओं का गौरव बढ़ाने का संदेश!

    Hindi Diwas 2025: हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। इस साल 14 सितंबर को 76वां राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने देशवासियों को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के माध्यम से कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं बल्कि हमारी संस्कृति, भावनाओं और पहचान की आत्मा है। उन्होंने देशवासियों से यह संकल्प लेने की अपील की कि हिंदी के साथ-साथ सभी भारतीय भाषाओं को और समृद्ध किया जाएगा और आने वाली पीढ़ियों तक गर्व से पहुँचाया जाएगा।

    हिंदी और भारतीय भाषाओं का वैश्विक सम्मान

    गृह मंत्री अमित शाह ने भी हिंदी दिवस की शुभकामनाएं दी और कहा कि आज हिंदी केवल संचार का माध्यम नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने वाली भाषा भी बन गई है। विज्ञान, तकनीक और शोध की दुनिया में हिंदी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आपातकाल जैसे कठिन समय में हिंदी ने देशवासियों को एकजुट रखा। भारतीय भाषाएं संस्कृति और इतिहास की वाहक रही हैं और भविष्य में विकसित भारत और भाषाई आत्मनिर्भरता के रास्ते में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

    Hindi Diwas 2025: पीएम मोदी और अमित शाह ने दी शुभकामनाएं, भारतीय भाषाओं का गौरव बढ़ाने का संदेश!

    भारतीय भाषाएं: संस्कृति और एकता का प्रतीक

    अमित शाह ने अपने वीडियो संदेश में बताया कि भारत एक भाषाई प्रधान देश है। हमारी भाषाओं ने सदियों से संस्कृति, परंपरा, ज्ञान, दर्शन, विज्ञान और आध्यात्मिकता को पीढ़ी दर पीढ़ी पहुँचाया है। हिमालय की ऊँचाइयों से लेकर दक्षिण के समुद्रों तक, रेगिस्तान और जंगलों से लेकर गांव की चौपालों तक, भाषाओं ने मानव को एकजुट और संगठित रहना सिखाया है। भिन्न-भिन्न राज्यों और भाषाई परंपराओं के माध्यम से हमारी सांस्कृतिक धरोहर आज भी जीवित है और युवाओं में देशभक्ति और सांस्कृतिक प्रेम को बढ़ावा देती है।

    भाषाओं का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान

    गृह मंत्री ने कहा कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने जिले और गांव की भाषाओं को जोड़कर समाज में आज़ादी के लिए चेतना पैदा की। हिंदी के साथ-साथ सभी भाषाओं के कवियों, नाट्यकारों और साहित्यकारों ने लोककथाओं, लोकगीतों और लोकनाट्यों के माध्यम से स्वतंत्रता की भावना को जन-जन तक पहुँचाया। ‘वन्दे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ जैसे नारे हमारी भाषाई चेतना का परिणाम हैं। 14 सितंबर 1949 को देवनागरी लिपि में लिखी गई हिंदी को राजभाषा के रूप में अपनाया गया।

    प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाषाओं का स्वर्णिम युग

    अमित शाह ने आगे कहा कि भारतीय भाषाओं और संस्कृति का स्वर्णिम युग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आया है। संयुक्त राष्ट्र, G-20 और SCO जैसे मंचों पर पीएम मोदी ने हिंदी और भारतीय भाषाओं के महत्व को बढ़ाया है। 2014 के बाद सरकारी कामकाज में हिंदी का उपयोग बढ़ाया गया। हमारा लक्ष्य है कि हिंदी और अन्य भाषाएं तकनीक, विज्ञान, शिक्षा और प्रशासन के क्षेत्र में प्रमुख आधार बनें। डिजिटल इंडिया, ई-गवर्नेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में भारतीय भाषाओं को वैश्विक स्तर पर सशक्त और तकनीकी बनाना हमारी प्राथमिकता है।

  • Padma Awards के लिए नामांकन का आखिरी मौका बढ़ा! जानिए कैसे 15 अगस्त तक ऑनलाइन नामांकन करे

    Padma Awards के लिए नामांकन का आखिरी मौका बढ़ा! जानिए कैसे 15 अगस्त तक ऑनलाइन नामांकन करे

    भारत सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए Padma Awards के नामांकन की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2025 से बढ़ाकर अब 15 अगस्त 2025 कर दी है। यह फैसला उन लोगों के लिए राहतभरा है जो किसी असाधारण व्यक्ति के योगदान को सम्मानित कराना चाहते थे लेकिन समय पर नामांकन नहीं कर पाए थे। इस फैसले से लाखों लोगों को और दो हफ्ते का अतिरिक्त समय मिल गया है ताकि वे सही तरीके से नामांकन प्रक्रिया पूरी कर सकें।

     केवल ऑनलाइन पोर्टल से होगा नामांकन

    पद्म पुरस्कारों के लिए नामांकन अब केवल राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल पर ही स्वीकार किए जा रहे हैं। इच्छुक लोग https://awards.gov.in वेबसाइट पर जाकर अपने नामांकन या सिफारिश जमा कर सकते हैं। यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से की जा रही है जिससे पारदर्शिता बनी रहे और हर नागरिक को बराबर का मौका मिले। यह पोर्टल उपयोग में सरल है और इसमें जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं।

    Padma Awards के लिए नामांकन का आखिरी मौका बढ़ा! जानिए कैसे 15 अगस्त तक ऑनलाइन नामांकन करे

     किन क्षेत्रों में दिए जाते हैं पद्म पुरस्कार

    पद्म पुरस्कार भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल हैं। यह पुरस्कार कला शिक्षा उद्योग साहित्य विज्ञान खेल चिकित्सा समाज सेवा और सार्वजनिक मामलों जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को दिया जाता है। हर साल गणतंत्र दिवस पर यह पुरस्कार घोषित किए जाते हैं और राष्ट्रपति द्वारा भव्य समारोह में इन्हें प्रदान किया जाता है।

    कोई भी कर सकता है नामांकन

    सबसे खास बात यह है कि पद्म पुरस्कार के लिए कोई भी व्यक्ति किसी को नामांकित कर सकता है। इसके लिए नामांकित व्यक्ति की जाति धर्म लिंग या राष्ट्रीयता कोई मायने नहीं रखती। नामांकन के लिए उस व्यक्ति के योगदान का विवरण देना होता है साथ ही यह भी बताना होता है कि वह क्यों इस सम्मान का हकदार है। यह पहल भारत सरकार की ‘जनभागीदारी’ की सोच को दर्शाती है।

    पहचानें छिपे हुए रत्नों को

    पद्म पुरस्कार केवल प्रसिद्ध हस्तियों तक सीमित नहीं हैं बल्कि सरकार की कोशिश रहती है कि समाज में चुपचाप क्रांतिकारी काम करने वाले अनसुने और अनदेखे हीरे भी सम्मानित हों। ऐसे लोगों को सामने लाने के लिए आम नागरिकों की भूमिका बेहद अहम है। यदि आपके आसपास कोई ऐसा व्यक्ति है जिसने समाज के लिए अविस्मरणीय कार्य किया है तो अब आपके पास उसे पहचान दिलाने का सुनहरा मौका है।