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  • राहुल गांधी को टीवी डिबेट में मौत की धमकी, कांग्रेस ने अमित शाह को पत्र लिखकर तुरंत कार्रवाई की मांग की

    राहुल गांधी को टीवी डिबेट में मौत की धमकी, कांग्रेस ने अमित शाह को पत्र लिखकर तुरंत कार्रवाई की मांग की

    कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने भाजपा के प्रवक्ता द्वारा किए गए विवादास्पद बयान का उल्लेख किया, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को मौत की धमकी देने का आरोप लगाया गया। कांग्रेस ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई की मांग की है।

    पत्र में लगाए गए आरोप

    वेणुगोपाल ने पत्र में कहा कि भाजपा प्रवक्ता और पूर्व एबीवीपी नेता प्रिंटु महादेव ने एक मलयालम टीवी चैनल पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी को लक्षित किया। उन्होंने कहा कि महादेव ने स्पष्ट रूप से कहा, “राहुल गांधी को सीने में गोली मार दी जाएगी।” कांग्रेस नेता का कहना है कि यह न केवल एक भाषण की गलती या अनजाने में कहा गया बयान नहीं बल्कि जानबूझकर किया गया भयावह और घातक धमकी है।

    राहुल गांधी को टीवी डिबेट में मौत की धमकी, कांग्रेस ने अमित शाह को पत्र लिखकर तुरंत कार्रवाई की मांग की

    सुरक्षा और संवैधानिक चिंता

    कांग्रेस महासचिव ने कहा कि भाजपा के आधिकारिक प्रवक्ता के ऐसे जहरिले शब्द राहुल गांधी के जीवन के लिए खतरा हैं। साथ ही, ऐसे बयान संविधान, कानून और हर नागरिक की सुरक्षा की बुनियादी गारंटी के खिलाफ हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि विपक्ष के नेता के खिलाफ यह खुला और घातक बयान पूरी तरह अस्वीकार्य है।

    सीआरपीएफ को भी लिखे पत्र

    वेणुगोपाल ने कहा कि राहुल गांधी की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) को पहले भी कई पत्र लिखे गए हैं। इसके अलावा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखा गया एक समान पत्र मीडिया में लीक हुआ था, जो गंभीर सवाल खड़े करता है कि इसकी गुप्त भूमिका क्या है। कांग्रेस नेताओं ने इसे गंभीर और चिंताजनक बताया।

    बड़ी साजिश की आशंका

    वेणुगोपाल ने कहा कि भाजपा प्रवक्ता की यह घोर और खुली धमकी सिर्फ व्यक्तिगत हमला नहीं बल्कि व्यापक और कुटिल साजिश की झलक देती है। उनका कहना है कि इस तरह की धमकियां हिंसा को जायज ठहराने की कोशिश जैसी लगती हैं। कांग्रेस ने केंद्रीय गृह मंत्री से तत्काल कार्रवाई करने और प्रवक्ता के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की मांग की है, ताकि लोकतंत्र और विपक्ष के नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

  • हरियाणा मंत्री अनिल विज का राहुल गांधी पर तंज, कहा- मानसिक स्वास्थ्य के लिए साइकोलॉजिस्ट से इलाज कराएं

    हरियाणा मंत्री अनिल विज का राहुल गांधी पर तंज, कहा- मानसिक स्वास्थ्य के लिए साइकोलॉजिस्ट से इलाज कराएं

    हरियाणा कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने एक बार फिर राहुल गांधी पर हमला बोला। अंबाला में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि राहुल गांधी नेगेटिव सोच के शिकार हैं और उन्हें मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि विपक्ष के नेता का दृष्टिकोण देश के हित में नहीं है और हमेशा आलोचनात्मक दृष्टिकोण अपनाते हैं।

    विश्व भारत के साथ हाथ मिलाना चाहता है

    अनिल विज ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत के साथ जुड़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि 2011 में भारत की अर्थव्यवस्था 11वें स्थान पर थी, लेकिन आज यह तीसरे स्थान पर पहुंच चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को आत्मविश्वास और सम्मान दिलाया है। आज भारत विश्व स्तर पर आर्थिक और राजनीतिक रूप से सम्मानित है।

    हरियाणा मंत्री अनिल विज का राहुल गांधी पर तंज, कहा- मानसिक स्वास्थ्य के लिए साइकोलॉजिस्ट से इलाज कराएं

    राहुल गांधी ने मोदी को बताया कमजोर प्रधानमंत्री

    राहुल गांधी ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के H-1B वीजा फीस बढ़ाने के फैसले पर पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “भारत का प्रधानमंत्री कमजोर है।” इसके साथ ही राहुल ने 2017 का पुराना पोस्ट भी साझा किया, जिसमें उन्होंने मोदी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अमेरिका के साथ H-1B वीजा मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं की। यही कारण है कि अनिल विज ने राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला।

    अमेरिका ने H-1B वीजा फीस बढ़ाई

    पिछले शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा फीस में बड़ी वृद्धि की घोषणा की। नए आदेश के तहत H-1B वीजा की वार्षिक फीस $100,000 (लगभग 88 लाख रुपये) कर दी गई है। इस फैसले का भारतीय पेशेवरों पर बड़ा असर पड़ सकता है। अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय H-1B वीजा पर काम करते हैं, और इस नए शुल्क से उनकी नौकरी और कर खर्च पर असर पड़ेगा।

    अनिल विज का संदेश और भारत की उपलब्धियां

    अनिल विज ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विश्व स्तर पर सम्मान और आर्थिक मजबूती हासिल की है। उन्होंने लोगों से कहा कि राहुल गांधी जैसी नेगेटिव सोच से प्रभावित न हों और देश के विकास और अंतरराष्ट्रीय सम्मान पर ध्यान दें। विज ने यह भी कहा कि भारत आज विश्व समुदाय में एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में उभरा है।

  • Vice President election India: सुदर्शन रेड्डी का लालू यादव से मुलाकात, BJP ने कहा- देश की आत्मा बचाने का दिखावा कर रहे

    Vice President election India: सुदर्शन रेड्डी का लालू यादव से मुलाकात, BJP ने कहा- देश की आत्मा बचाने का दिखावा कर रहे

    Vice President election India: देश में उपराष्ट्रपति के चुनाव का महत्व हमेशा ही हाई प्रोफाइल रहता है। इस बार यह चुनाव मंगलवार, 9 सितंबर को होने वाला है। इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी पर हमला किया है। बीजेपी नेता रवि शंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बी. सुदर्शन रेड्डी विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी न्यायाधीशों का सम्मान करते हैं, लेकिन जब कोई न्यायाधीश चुनावी मैदान में आकर बड़े-बड़े बयान देता है तो सवाल उठते हैं। उन्होंने बताया कि रेड्डी देश की आत्मा बचाने के लिए वोट की बात कर रहे हैं, जबकि वे लालू यादव से मुलाकात कर रहे हैं।

    लालू यादव से मुलाकात को लेकर बीजेपी का सवाल

    रवि शंकर प्रसाद ने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ चल रहे मामलों का जिक्र करते हुए कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आप किस तरह के न्यायाधीश हैं, जो भ्रष्टाचार में दोषी पाए गए व्यक्ति से मुलाकात कर रहे हैं। लालू यादव फोडर घोटाले में सजा पाए हैं और रेल संपत्ति बेचने के मामले में भी उनके खिलाफ चार्जशीट है। ऐसे में किसी भी न्यायाधीश का लालू यादव से मिलकर देश की आत्मा की बात करना पूरी तरह दिखावा है। रवि शंकर प्रसाद ने बी. सुदर्शन रेड्डी और उनके समर्थन करने वाले न्यायाधीशों को भी आड़े हाथों लिया।

    सुदर्शन रेड्डी का लालू यादव से मुलाकात, BJP ने कहा- देश की आत्मा बचाने का दिखावा कर रहे

    देश की आत्मा बचाने की बात पर बीजेपी का हमला

    बीजेपी नेता ने कहा कि हम पार्टी के मंच से यह दिखाने आए हैं कि यह केवल दिखावा है। किसी भी न्यायाधीश को देश की आत्मा बचाने या किसी की अंतरात्मा की बात करने का अधिकार नहीं बनता। उन्होंने कहा कि बी. सुदर्शन रेड्डी के बयान पूरी तरह से नकली हैं और यह पद की गरिमा को ठेस पहुंचा सकता है। रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि ऐसे बयान देने वाले न्यायाधीश देश के लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था की गरिमा के लिए सही उदाहरण नहीं हैं।

    उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया और तारीख

    देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई की शाम को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनकी अवधि 10 अगस्त 2027 तक थी। इस कारण से उपराष्ट्रपति चुनाव करवाया जा रहा है। चुनाव प्रक्रिया मंगलवार, 9 सितंबर को सुबह 10 बजे शुरू होगी और परिणाम शाम 6 बजे घोषित किए जाएंगे। इस चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य वोट डालते हैं। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए एनडीए के उम्मीदवार की जीत लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है क्योंकि उनके पास संसद में बहुमत है।

    एनडीए की जीत की संभावना और राजनीतिक माहौल

    भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की वर्तमान स्थिति को देखते हुए, उनका उम्मीदवार आसानी से चुनाव जीत सकता है। विपक्ष के उम्मीदवार पर बीजेपी के हमले और लालू यादव से मुलाकात को लेकर उठाए गए सवालों ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। चुनाव से पहले यह बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा बन गए हैं। देश की जनता और संसद सदस्य इस चुनाव में संविधान और लोकतंत्र की गरिमा को ध्यान में रखकर मतदान करेंगे। उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 का यह मुकाबला न सिर्फ पद के लिए, बल्कि राजनीतिक संदेश देने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • Monsoon session of Parliament: संसद में मानसून सत्र का दूसरा दिन विपक्ष के विरोध और मांगों के नाम! हंगामे से भरी रही लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही

    Monsoon session of Parliament: संसद में मानसून सत्र का दूसरा दिन विपक्ष के विरोध और मांगों के नाम! हंगामे से भरी रही लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही

    Monsoon session of Parliament: संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन यानी मंगलवार को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया। उनकी मुख्य मांग यह रही कि केंद्र सरकार पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर जैसे गंभीर मामलों पर बयान दे। विपक्षी सांसदों का कहना है कि देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार की चुप्पी अस्वीकार्य है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इन विषयों पर सदन में खुद आकर जवाब देना चाहिए।

    पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर बना चर्चा का केंद्र

    विपक्ष की मांग है कि पहलगाम में हुए हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर खुलकर चर्चा की जाए। इन दोनों ही घटनाओं ने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का मानना है कि इन विषयों को संसद में नजरअंदाज करना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। संसद वह स्थान है जहां जनता की चिंता को आवाज मिलती है और ऐसे संवेदनशील मामलों पर चर्चा अनिवार्य होनी चाहिए।

    Monsoon session of Parliament: संसद में मानसून सत्र का दूसरा दिन विपक्ष के विरोध और मांगों के नाम! हंगामे से भरी रही लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही

    कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित

    जैसे ही हंगामा बढ़ा लोकसभा और राज्यसभा दोनों को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर नारेबाजी करने लगे। स्पीकर ने शांति बनाए रखने की अपील की लेकिन हंगामा नहीं थमा। कार्यवाही बाधित होने से कई महत्वपूर्ण विधायी कामकाज ठप हो गए। संसद का मानसून सत्र सरकार और विपक्ष दोनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है लेकिन शुरुआत से ही यह गतिरोध का शिकार हो गया है।

    संसद परिसर के बाहर भी हुआ विरोध प्रदर्शन

    बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी विपक्ष सड़क पर उतर आया। संसद भवन के मकर द्वार के बाहर विपक्षी नेताओं ने जमकर नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, डीएमके, शिवसेना (यूबीटी) और लेफ्ट के सांसद भी शामिल हुए। विपक्ष का आरोप है कि वोटर लिस्ट में धांधली की जा रही है ताकि चुनाव में सरकार को फायदा मिल सके।

    सत्ता और विपक्ष की बैठकों का दौर

    सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही शुरू होने से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने रणनीतिक बैठकें कीं। संसद भवन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जेपी नड्डा व अन्य मंत्रियों के साथ मुलाकात की और सत्र के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दों पर चर्चा की। वहीं विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. के नेताओं ने भी बैठक कर यह तय किया कि किन-किन मुद्दों पर सरकार को घेरा जाए। साफ है कि मानसून सत्र केवल कानून बनाने का नहीं बल्कि सियासी मोर्चेबंदी का भी मैदान बना रहेगा।

  • 8th Central Pay Commission की घोषणा से कर्मचारियों में उमंग की लहर! जल्द आएगा नया वेतनमान का तोहफा

    8th Central Pay Commission की घोषणा से कर्मचारियों में उमंग की लहर! जल्द आएगा नया वेतनमान का तोहफा

    भारत सरकार ने आखिरकार 8वें वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) को गठित करने का निर्णय ले लिया है। इस फैसले की आधिकारिक पुष्टि वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा लोकसभा में दिए गए उत्तर से हुई है। लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए यह एक बड़ी राहत और उत्साह की खबर है। लंबे समय से वे इस घोषणा का इंतजार कर रहे थे।

    कई मंत्रालयों से लिए गए सुझाव

    इस नए वेतन आयोग को गठित करने से पहले सरकार ने रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, कार्मिक विभाग और राज्यों से राय मांगी थी। इन सभी विभागों ने अपने सुझाव भेज दिए हैं और सरकार ने इन सुझावों को ध्यान में रखते हुए अगला कदम उठाने की तैयारी कर ली है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारियों को उनका वेतन और भत्ते मौजूदा महंगाई दर और जरूरतों के अनुसार मिलें।

    8th Central Pay Commission की घोषणा से कर्मचारियों में उमंग की लहर! जल्द आएगा नया वेतनमान का तोहफा

    जल्द होगी अधिसूचना जारी

    वित्त मंत्रालय के अनुसार सरकार अब जल्द ही 8वें वेतन आयोग के गठन की अधिसूचना जारी करेगी। इस अधिसूचना के बाद आयोग के चेयरपर्सन और अन्य सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी। ये सदस्य वेतन संरचना, भत्तों और पेंशन में संशोधन से जुड़े विषयों का अध्ययन करेंगे और अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेंगे।

    वेतन और पेंशन में बदलाव की प्रक्रिया

    वेतन आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सरकार उसकी सिफारिशों की समीक्षा करेगी। यदि सरकार को ये सिफारिशें उपयुक्त लगती हैं तो उन्हें स्वीकृति दी जाएगी। इसके बाद नए वेतनमान और पेंशन संरचना को लागू किया जाएगा। हालांकि इसमें कुछ समय लग सकता है लेकिन प्रक्रिया की शुरुआत ने ही कर्मचारियों में सकारात्मक उम्मीदें जगा दी हैं।

    लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को होगा लाभ

    8वें वेतन आयोग के लागू होने से लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 60 लाख पेंशनर्स को सीधा फायदा मिलेगा। महंगाई की मार झेल रहे इन परिवारों के लिए यह एक आर्थिक संजीवनी जैसा साबित हो सकता है। यह फैसला आगामी लोकसभा चुनावों से पहले एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है जिससे सरकार को राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना है।

  • Justice Yashwant Verma पर गिरी महाभियोग की गाज, संसद से उठी हड़कंप की लहर!

    Justice Yashwant Verma पर गिरी महाभियोग की गाज, संसद से उठी हड़कंप की लहर!

    Justice Yashwant Verma: संसद में इन दिनों एक बड़ा राजनीतिक और संवैधानिक घटनाक्रम सामने आया है। करीब 208 सांसदों ने एक न्यायाधीश को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन किया है। यह प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ को सौंपा गया है। लोकसभा में 145 सांसदों के हस्ताक्षर हैं जिसमें राहुल गांधी, रविशंकर प्रसाद और अनुराग ठाकुर जैसे प्रमुख नेता भी शामिल हैं। वहीं राज्यसभा में 63 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर दस्तखत किए हैं। यह प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत लाया गया है।

    न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया कितनी जटिल है

    भारत के संविधान में किसी जज को हटाने की प्रक्रिया बेहद कठिन और कई स्तरों से होकर गुजरती है। सबसे पहले प्रस्ताव के समर्थन में लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर होने चाहिए। इस बार वह संख्या पूरी कर ली गई है। हालांकि प्रस्ताव स्वीकार करना या अस्वीकार करना लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति के विशेषाधिकार में आता है। यदि वे प्रस्ताव स्वीकार कर लेते हैं तो अगला कदम जांच समिति का गठन होता है।

    Justice Yashwant Verma पर गिरी महाभियोग की गाज, संसद से उठी हड़कंप की लहर!

     जांच समिति का गठन और उसकी भूमिका

    यदि महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है तो एक विशेष समिति बनाई जाती है। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों को शामिल किया जाता है। यह समिति 1 से 3 महीने के भीतर उस न्यायाधीश के खिलाफ लगे आरोपों की जांच करती है। समिति यह तय करती है कि क्या आरोप गंभीर और प्रमाणिक हैं या नहीं। समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही अगला संवैधानिक कदम उठाया जाता है।

    संसद में बहुमत की अग्निपरीक्षा

    अगर समिति अपनी रिपोर्ट में आरोपों को सही ठहराती है तो महाभियोग प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाता है। यहां सबसे कठिन चरण आता है क्योंकि प्रस्ताव को पास करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। यह सामान्य बहुमत से अलग और ज्यादा कठिन है क्योंकि इसमें सभी उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों में से दो-तिहाई की सहमति जरूरी होती है।

     राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद होता है अंतिम निर्णय

    अगर प्रस्ताव दोनों सदनों से दो-तिहाई बहुमत से पारित हो जाता है तो इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद संबंधित न्यायाधीश को उनके पद से हटा दिया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया भारतीय लोकतंत्र की पारदर्शिता और संतुलन की मिसाल है। हालांकि ऐसा बहुत ही कम हुआ है जब किसी न्यायाधीश को वास्तव में हटाया गया हो। इसलिए यह प्रस्ताव आने वाले समय में बड़ा संवैधानिक उदाहरण बन सकता है।