Haryana New Sector: हरियाणा जो कभी सिर्फ कृषि प्रधान राज्य के रूप में जाना जाता था अब तेजी से (urban development) की ओर बढ़ रहा है। आज ये राज्य न केवल औद्योगिक नक्शे पर उभर कर सामने आ रहा है बल्कि (infrastructure projects) (real estate) और सरकारी योजनाओं के जरिए ग्रामीण इलाकों में भी विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। खासकर (NCR) यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आने वाले हरियाणा के जिलों जैसे रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत में जमीन अधिग्रहण और सेक्टर डेवलेपमेंट का काम काफी तेजी से हो रहा है।
इसी कड़ी में रोहतक जिले के गांव पारा (Para Village Rohtak) में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) द्वारा प्रस्तावित सेक्टर 6 के लिए की गई भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर हाल ही में बड़ा फैसला आया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस अधिग्रहण को पूरी तरह वैध करार देते हुए इसके खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है।
हाईकोर्ट का दो टूक फैसला
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच जिसमें जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस विकास सूरी शामिल थे ने अपने फैसले में साफ-साफ कहा कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड अधिनियम 1985 (NCRPB Act) दोनों का उद्देश्य अलग-अलग है। ये कानून एक-दूसरे को निष्प्रभावी नहीं करते और दोनों अपने-अपने दायरे में पूरी तरह से लागू होते हैं।
यानी अगर हरियाणा सरकार ने (Land Acquisition Act) के तहत जमीन का अधिग्रहण किया है तो इसे इस आधार पर अवैध नहीं ठहराया जा सकता कि वो योजना एनसीआरपीबी की उप-क्षेत्रीय योजना में शामिल नहीं है।
याचिकाकर्ता ने उठाया था मंजूरी का मुद्दा
इस मामले में याचिका दायर करने वाले राजबीर सिंह ने कोर्ट के सामने ये दलील रखी थी कि चूंकि रोहतक एनसीआर का हिस्सा है इसलिए यहां कोई भी डेवलपमेंट तभी किया जा सकता है जब उसे (NCR Planning Board) से अनुमोदन मिल चुका हो। उन्होंने RTI के जरिए प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए कहा था कि एचएसवीपी को इस योजना के लिए एनसीआरपीबी से कोई मंजूरी नहीं मिली थी।
कोर्ट ने दी सफाई
हालांकि कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 का उद्देश्य है ‘public purpose’ के लिए जमीन हासिल करना जबकि NCRPB अधिनियम का उद्देश्य है क्षेत्रीय स्तर पर योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित करना।
जब दोनों अधिनियमों में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि एक कानून दूसरे पर प्रभावी होगा तो ऐसे में दोनों को अलग-अलग माना जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि भूमि अधिग्रहण जनता के हित में किया गया है और इसका उचित मुआवजा भी निर्धारित किया गया है। इसलिए इसे अवैध नहीं कहा जा सकता।
हरियाणा सरकार को बड़ी राहत
इस फैसले के बाद हरियाणा सरकार को एक बड़ी राहत मिली है क्योंकि कई बार एनसीआर क्षेत्र में प्रस्तावित विकास योजनाएं ऐसे ही कानूनी पेचों में उलझ जाती हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले से भविष्य में एचएसवीपी या अन्य प्राधिकरणों द्वारा किए जा रहे भूमि अधिग्रहण और (town planning) संबंधी कार्यों को बल मिलेगा। अब सरकार रोहतक जिले के गांव पारा में सेक्टर 6 के डेवलेपमेंट को बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ा सकती है।
क्या होगा गांव पारा में?
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की योजना के अनुसार गांव पारा में विकसित किए जाने वाले सेक्टर 6 में आवासीय प्लॉट्स के साथ-साथ (commercial plots) सड़कों का जाल पार्क स्कूल और अन्य पब्लिक यूटिलिटी सुविधाएं बनाई जाएंगी। इससे न केवल इलाके में (real estate) की कीमतें बढ़ेंगी बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के भी नए अवसर मिलेंगे।
NCR क्षेत्र में विकास के लिए कोर्ट की हरी झंडी
ये फैसला इस लिहाज से भी अहम है कि इससे ये स्पष्ट हो गया है कि एनसीआर में आने वाले हरियाणा के इलाकों में विकास कार्यों के लिए एनसीआरपीबी की मंजूरी जरूरी नहीं है जब तक कि वो योजना भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत सार्वजनिक हित में की जा रही हो।
इससे पहले भी कई परियोजनाएं सिर्फ इस आधार पर अटक गई थीं कि उन्हें एनसीआरपीबी की मास्टर प्लान में जगह नहीं मिली। लेकिन कोर्ट के इस फैसले के बाद सरकार अब ज्यादा आत्मविश्वास के साथ ऐसे प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ा सकेगी।
