Tag: Naqvi BJP statement

  • अहिल्यानगर में ‘I Love Mohammed’ विवाद से उपजी हिंसा, 30 लोग हिरासत में, पुलिस ने शहर में कड़ी सुरक्षा की

    अहिल्यानगर में ‘I Love Mohammed’ विवाद से उपजी हिंसा, 30 लोग हिरासत में, पुलिस ने शहर में कड़ी सुरक्षा की

    महाराष्ट्र के अहिल्यानगर से बड़ी खबर सामने आई है। शहर में “I Love Mohammed” का स्लोगन लिखे जाने को लेकर हिंसा भड़क गई। पुलिस के अनुसार, कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने एक रांगोली में यह स्लोगन बनाया। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इसे पैगंबर मोहम्मद के अपमान के रूप में लिया और बड़ी संख्या में कचहरी पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन करने जुट गए।

    पुलिस की कार्रवाई और स्थिति नियंत्रण

    पुलिस ने घटना की गंभीरता को देखते हुए रांगोली बनाने वालों की पहचान की और दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इनमें से एक आरोपी पुलिस हिरासत में है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कुछ स्थानों पर हल्के बल का इस्तेमाल किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भीड़ को समझाया कि पूरे मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। इसके बावजूद, कुछ उग्र तत्व अशांति फैलाते रहे।

    अहिल्यानगर में ‘I Love Mohammed’ विवाद से उपजी हिंसा, 30 लोग हिरासत में, पुलिस ने शहर में कड़ी सुरक्षा की

    सुरक्षा व्यवस्था और गिरफ्तारी

    पुलिस ने शहर में सुरक्षा बढ़ा दी है और लोगों को अफवाहों पर विश्वास न करने की सलाह दी। अब तक 30 लोगों को हिरासत में लिया गया है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण में है और विभिन्न स्थानों पर पुलिस टीमों की गश्त जारी है।

    प्रारंभिक जानकारी और घटनाक्रम

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कुछ अज्ञात लोगों ने अहिल्यानगर की सड़क पर “I Love Mohammed” शब्द लिखे। यह कार्य धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना गया। इसके बाद सैकड़ों मुस्लिम समुदाय के लोग कोतवाली पुलिस स्टेशन के सामने इकट्ठा हुए और प्रदर्शन किया। पुलिस प्रशासन सतर्क है और जांच जारी है।

    देश में नया विवाद और प्रतिक्रिया

    यह घटना “I Love Mohammed” और “I Love Mahadev” पोस्टरों को लेकर देश में नए विवाद को जन्म दे रही है। कई स्थानों पर लोग सड़कों पर उतरकर इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। अधिकारियों ने जनता से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

  • कैथल खाटू श्याम जागरण में स्टेडियम नाम विवाद, महाराजा सूरजमल को महाराजा सूरज खान बताने से जाट समाज भड़का

    कैथल खाटू श्याम जागरण में स्टेडियम नाम विवाद, महाराजा सूरजमल को महाराजा सूरज खान बताने से जाट समाज भड़का

    कैथल में आयोजित खाटू श्याम जागरण के दौरान ‘महाराजा सूरजमल स्टेडियम’ को “महाराजा सूरज खान स्टेडियम” बताने के विवाद ने तूल पकड़ लिया है। जाट समाज के लोगों ने कन्हैया मित्तल के पोस्टरों पर कालिख पोतते हुए उनका कड़ा विरोध जताया है।

    यह जागरण कैथल के महाराजा सूरजमल स्टेडियम में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध भजन गायक कन्हैया मित्तल मुख्य गायक के रूप में शामिल हुए। विवाद तब शुरू हुआ जब कार्यक्रम के लाइव प्रसारण में स्टेडियम का नाम गलत तरीके से “महाराजा सूरज खान स्टेडियम” लिखा गया। जैसे ही यह प्रसारण सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जाट समाज में नाराजगी फैल गई और उन्होंने इसे महाराजा सूरजमल के सम्मान का अपमान बताया।

    कैथल खाटू श्याम जागरण में स्टेडियम नाम विवाद, महाराजा सूरजमल को महाराजा सूरज खान बताने से जाट समाज भड़का

    नाराज लोगों ने स्टेडियम के गेट पर ताला जड़ दिया और कार्यक्रम का सारा सामान रोक दिया। जाट समाज ने मांग की है कि कन्हैया मित्तल को अपने सोशल मीडिया पेज पर लाइव आकर सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए। चेतावनी दी गई कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो भविष्य में ऐसे धार्मिक कार्यक्रमों की अनुमति नहीं दी जाएगी और कन्हैया मित्तल का कैथल में प्रवेश वर्जित रहेगा।

    जाट समाज के लोगों का कहना है कि यह मामला केवल एक नाम की गलती नहीं, बल्कि समाज की भावनाओं का मुद्दा है। उन्होंने जाट समिति से भी स्पष्ट किया कि आगे से ऐसे आयोजनों में सावधानी बरती जाए ताकि क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक तनाव न फैले और माहौल शांतिपूर्ण बना रहे।

    कैथल खाटू श्याम जागरण में स्टेडियम नाम विवाद, महाराजा सूरजमल को महाराजा सूरज खान बताने से जाट समाज भड़का

    इस मामले में कन्हैया मित्तल की प्रतिक्रिया नहीं आई है। इस मामले में अभी तक कन्हैया मित्तल के पेज पर सार्वजनिक माफी भी नहीं मांगी गई है। लेकिन उनके पेज पर अब वह पोस्ट लाइव भी नजर नहीं आ रही है, जिसको लेकर विवाद चल रहा है। यह कार्यक्रम 22 सितंबर को आयोजित किया गया था।

  • सिरसा में बाढ़ से बर्बाद धान की फसल पर कुमारी शैलजा का हमला, बीमा कंपनियों और सरकार को चेतावनी

    सिरसा में बाढ़ से बर्बाद धान की फसल पर कुमारी शैलजा का हमला, बीमा कंपनियों और सरकार को चेतावनी

    अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी शैलजा ने कहा है कि सिरसा सहित प्रदेश के 12 जिलों में धान की फसल बाढ़ और जलभराव से पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है, लेकिन बीमा कंपनियां इसे नुकसान मानने से साफ इंकार कर रही हैं। जिन किसानों ने पूरी ईमानदारी से फसल बीमा योजना के तहत प्रीमियम भरा, परंतु जब मुआवज़ा देने की बारी आई तो कंपनियां और सरकार दोनों ही किसानों से मुंह मोड़ रही हैं। ऐसे में भाजपा सरकार बीमा कंपनियों की मनमानी रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

    मीडिया को जारी बयान में कुमारी शैलजा ने कहा है कि यह किसानों के साथ खुला अन्याय है। बीमा कंपनियों को यह अधिकार किसने दिया कि वे डूबी हुई फसल को ‘नुकसान’ ही न मानें? उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा सरकार इन कंपनियों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है और आखिर इन्हें इस तरह की मनमानी करने की छूट क्यों दी जा रही है। ऐसा लग रहा है कि सरकार और बीमा कंपनियां आपस में मिली हुई है और किसानों को मुआवजे के नाम पर गुमराह कर रही है। सांसद कुमारी शैलजा ने कहा है कि किसान इस विश्वास में प्रीमियम भरते हैं कि विपरीत परिस्थिति में उन्हें मुआवज़ा मिलेगा लेकिन भाजपा सरकार और बीमा कंपनियों की मिलीभगत से किसानों को उनके अधिकार से वंचित किया जा रहा है। यह सरकार की किसान विरोधी मानसिकता का जीता-जागता उदाहरण है।

    सिरसा में बाढ़ से बर्बाद धान की फसल पर कुमारी शैलजा का हमला, बीमा कंपनियों और सरकार को चेतावनी

    सांसद कुमारी शैलजा ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि तुरंत विशेष गिरदावरी करवाई जाए और बर्बाद हुई फसल का उचित मूल्यांकन किया जाए, सभी प्रभावित किसानों को बिना किसी देरी के मुआवज़ा दिया जाए, बीमा कंपनियों की मनमानी रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं और दोषियों पर कार्रवाई की जाए। सांसद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसानों की लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ेगी और जब तक प्रभावित किसानों को उनका हक़ नहीं मिल जाता, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। साथ ही सांसद ने कहा कि अगर सरकार संकट की घड़ी में किसानों की मदद करने से पीछे हट रही है तो उसे स्वयं को किसान हितेषी कहने को कोई हक नहीं है। किसान हितों को लेकर भाजपा सरकार की नीयत में शुरू से ही खोट दिखाई दे रहा है।

    सांसद कुमारी शैलजा 15 को ऐलनाबाद में

    सांसद कुमारी शैलजा 15 सितंबर को ऐलनाबाद विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न कार्यक्रमों शामिल होंगी। सोमवार सुबह 09.30 बजे सुनिल गोदारा के निवास स्थान नजदीक अशोका बेकरी, गांधी चौक, ऐलनाबाद जिला सिरसा पहुंचेगी, इसके बाद सुबह 10.00 बजे ऐलनाबाद क्षेत्र के गांव गुडियाखेड़ा, लुदेसर, मानक दीवान, दड़बा कलां, शाहपुरिया और गांव शक्कर मंदोरी में जलभराव से प्रभावित गांवों का दौरा करेंगी।

  • कुमारी सैलजा का हमला- हरियाणा सरकार किसानों के साथ कर रही अपमानजनक मजाक

    कुमारी सैलजा का हमला- हरियाणा सरकार किसानों के साथ कर रही अपमानजनक मजाक

    अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा में हाल ही में आई बाढ़ से किसानों को हुए भारी नुकसान को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार ने इस आपदा में किसानों को जो मुआवजा देने की घोषणा की है वह किसानों के साथ घोर अन्याय है के साथ-साथ उनका अपमान भी है। फसलों के नुकसान का पंजाब सरकार हरियाणा से अधिक मुआवजा दे रही है जबकि हरियाणा स्वयं को सबसे ज्यादा विकसित राज्य बताता है। सांसद ने मांग की है कि मुआवजा राशि बढ़ाई जाए।

    मीडिया को जारी बयान में सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि जहां पंजाब सरकार ने बाढ़ प्रभावित किसानों को 20,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की घोषणा की है, वहीं हरियाणा सरकार केवल 7,000 से 15,000 रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा दे रही है। हरियाणा जो अपने आप को विकसित राज्य कहता है, वहां किसानों को इतना कम मुआवजा देना उनके साथ मज़ाक है।

    कुमारी सैलजा का हमला- हरियाणा सरकार किसानों के साथ कर रही अपमानजनक मजाक

    सांसद ने कहा कि सरकार ने मुआवजे को पाने की प्रक्रिया को इतना जटिल बना दिया है कि किसानों को पोर्टल पर बार-बार अपलोडिंग और सत्यापन जैसी परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। यह किसान के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। सरकार को किसानों को परेशान करने की सोच से बाहर आना चाहिए। सांसद ने सरकार से मांग की है कि इस मुआवजा राशि को तुरंत पंजाब की तर्ज पर कम से कम 20,000 रुपये प्रति एकड़ किया जाए।

    सरकार को पता है कि फसल का लागत खर्च कि तना आता है, कम से कम उसका ही ध्यान रखते हुए मुआवजे की राशि तय की जानी चाहिए थी। सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि किसानों को पोर्टल के जाल में न फंसाया जाए। मुआवजे की प्रक्रिया को सरल बनाकर ग्राम स्तर पर ही पटवारी और राजस्व अधिकारियों के माध्यम से भुगतान सुनिश्चित किया जाए। संपूर्ण नुकसान का सही आकलन करने के लिए स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि किसी भी किसान को वंचित न रहना पड़े।

    सांसद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हरियाणा के किसानों की इस लड़ाई में उनके साथ खड़ी है और यदि सरकार ने जल्द राहत राशि बढ़ाने का निर्णय नहीं लिया तो कांग्रेस किसानों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन शुरू करेगी। सांसद सैलजा ने कहा कि अब तक 2897 गांवों के एक लाख 69 हजार 738 किसानों ने 09 लाख 96 हजार 701 एकड़ क्षेत्र में खराब हुई फसलों का पंजीकरण करवाया है।

    इसके अलावा मकानों को हुए आंशिक या पूर्ण नुकसान का सर्वे कराकर उनकी भरपाई करने की घोषणा की गई है, जो मकान मालिक 20 साल से अगर एक जगह पर बैठा है और उसकी छत को नुकसान हुआ है तो उसकी सहायता भी सरकार करेगी। सैलजा ने कहा कि हरियाणा में मकान क्षतिग्रस्त होने पर एक लाख 30 हजार रुपये मुआवजा देने की घोषणा की गई है जबकि हिमाचल प्रदेश में यह मुआवजा राशि सात लाख रुपये है। सांसद ने कहा है कि सरकार को एक बार फिर मुआवजा राशि को लेकर मंथन करना चाहिए। किसानों के जख्मों पर नमक छिडकने के बजाए उस पर मरहम लगाना चाहिए।

  • ABVP vs Yogi Govt: राजभर के बयान से भड़के कार्यकर्ता, सड़कों पर प्रदर्शन से लेकर लाठीचार्ज तक मचा बवाल!

    ABVP vs Yogi Govt: राजभर के बयान से भड़के कार्यकर्ता, सड़कों पर प्रदर्शन से लेकर लाठीचार्ज तक मचा बवाल!

    ABVP vs Yogi Govt:  उत्तर प्रदेश में इन दिनों छात्र राजनीति और सत्ता के गलियारों में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), जो भारतीय जनता पार्टी से जुड़ा छात्र संगठन है, अपनी ही सरकार पर भड़क उठा है। मामला बाराबंकी की श्रीराम स्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ और लखनऊ तक आ पहुंचा। यहां छात्रों ने योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर के आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। विवाद की जड़ लॉ कोर्स की मान्यता और छात्रों के निलंबन से जुड़ी है।

    लॉ कोर्स की मान्यता पर विवाद और पुलिस लाठीचार्ज

    सोमवार (1 सितंबर) को एलएलबी कोर्स की मान्यता और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के निलंबन के खिलाफ छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना है कि 2022 से यूनिवर्सिटी बिना बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की मान्यता के लॉ कोर्स चला रही है, जिससे उनके भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। भारी बारिश के बावजूद छात्र सड़कों पर उतरे, लेकिन भीड़ बढ़ने पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पुलिस बुला ली। इसके बाद छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई और पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसमें 25 से ज्यादा छात्र और पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन के इशारे पर बाहरी लोगों ने भी छात्रों पर हमला किया।

    ABVP vs Yogi Govt: राजभर के बयान से भड़के कार्यकर्ता, सड़कों पर प्रदर्शन से लेकर लाठीचार्ज तक मचा बवाल!

    ओपी राजभर के बयान से भड़की आग

    घटनाक्रम यहीं खत्म नहीं हुआ। योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर छात्र गुंडागर्दी करेंगे तो पुलिस कार्रवाई करेगी और एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर हुई लाठियां सही थीं। उन्होंने यहां तक कहा कि देश कानून से चलता है और कानून तोड़ने पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक को जेल जाना पड़ सकता है। इस बयान के बाद एबीवीपी कार्यकर्ताओं का गुस्सा और भड़क गया और उन्होंने मंगलवार देर रात लखनऊ में ओपी राजभर के आवास के बाहर पुतला फूंका और जोरदार प्रदर्शन किया।

    सीएम योगी का एक्शन और बढ़ती मांगें

    मामले ने तूल पकड़ते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने घटना की जांच के आदेश दिए और तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया। बाराबंकी के सीओ सिटी हर्षित चौहान को हटा दिया गया और कोतवाली प्रभारी समेत अन्य पर भी कार्रवाई की गई। सरकार ने अयोध्या रेंज के आईजी और बाराबंकी मंडलायुक्त को जांच सौंपी है। दूसरी ओर, एबीवीपी ने स्पष्ट मांग रखी है कि यूनिवर्सिटी के कुलपति को बर्खास्त किया जाए, निष्कासित छात्रों को बहाल किया जाए और लॉ कोर्स की मान्यता पर स्थिति साफ की जाए।

    यूनिवर्सिटी प्रशासन का बचाव

    यूनिवर्सिटी के कुलपति विकास मिश्रा ने छात्रों और एबीवीपी पर ही आरोप मढ़े हैं। उन्होंने कहा कि यह विवाद बाहरी लोगों की वजह से भड़का और इसमें यूनिवर्सिटी के छात्रों की भूमिका नहीं थी। कुलपति का दावा है कि यूनिवर्सिटी के पास पहले से 2023 तक बीसीआई की मान्यता है और 2027 तक नवीनीकरण के लिए आवेदन किया जा चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने मुख्य गेट बंद कर दिया था, जिससे अंदर मौजूद हजारों छात्र डर गए और उनके अभिभावक कैंपस पहुंच गए। मिश्रा का कहना है कि प्रशासन और लॉ विभाग के छात्र हिंसा में शामिल नहीं थे।

  • यमुनानगर में प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों का हंगामा, 12 घंटे की हड़ताल में जताया विरोध

    यमुनानगर में प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों का हंगामा, 12 घंटे की हड़ताल में जताया विरोध

    यमुनानगर के प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टरों ने शुक्रवार को प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध जताते हुए 12 घंटे की हड़ताल की। यह हड़ताल उस घटना के विरोध में की गई जिसमें आरोप है कि आयुष्मान कार्ड के मरीजों की जांच के लिए आए रेड टीम के डॉक्टरों ने एक महिला डॉक्टर के साथ अभद्र व्यवहार किया।

    काले बैंड पहनकर जताया विरोध

    घटना से गुस्साए प्राइवेट अस्पताल संचालक और डॉक्टर काले बैंड पहनकर जिला सचिवालय पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की अनदेखी और टीम के डॉक्टरों के असभ्य व्यवहार के कारण स्वास्थ्य सेवा बाधित हो रही है।

    यमुनानगर में प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों का हंगामा, 12 घंटे की हड़ताल में जताया विरोध

    डॉ. प्रियांका गर्ग ने किया खुलासा

    डॉ. प्रियांका गर्ग ने बताया कि जब रेड टीम के डॉक्टर उनके अस्पताल में पहुंचे, तो उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं डॉक्टर हूँ। जब मैंने जवाब दिया, तो उन्होंने मुझे अपने कमरे से जाने के लिए कहा। उन्होंने सवाल उठाया कि एक अस्पताल संचालक को इस तरह क्यों बाहर भेजा गया।

    आयुष्मान कार्ड वालों के मरीजों को गलत मार्गदर्शन

    डॉ. प्रियांका ने यह भी आरोप लगाया कि उनके अस्पताल ने भारतीय मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों का इलाज नहीं किया। बावजूद इसके, मरीजों ने अपने स्वीकृति पत्र के साथ इलाज कराया। उन्हें गलत जानकारी दी गई और मरीजों को भ्रमित करने का प्रयास किया गया।

    अस्पताल और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ा

    इस घटना ने यमुनानगर में प्राइवेट अस्पताल और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ा दिया है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि अगर ऐसे व्यवहार को रोका नहीं गया, तो वे और बड़े पैमाने पर विरोध करेंगे। प्रशासन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है।

  • हांसी में कैंडल मार्च के दौरान हुआ सनसनीखेज मामला! मनीषा की मौत से गुस्साए युवक ने CM सैनी को अपशब्द बोलते हुए की फायरिंग

    हांसी में कैंडल मार्च के दौरान हुआ सनसनीखेज मामला! मनीषा की मौत से गुस्साए युवक ने CM सैनी को अपशब्द बोलते हुए की फायरिंग

    हांसी में सोमवार शाम शिक्षक मनीषा की मौत के विरोध में आयोजित कैंडल मार्च के दौरान एक युवक ने ऐसा काम किया जिसने सभी को चौंका दिया। मंच से माइक्रोफोन पर बोलते समय युवक ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समेत कई नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और हाथ में पिस्तौल लहराते हुए हवा में तीन राउंड फायर किए।

    वीडियो हुआ वायरल, पुलिस में मचा हड़कंप

    इस घटना का वीडियो मौके पर मौजूद किसी ने रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। वीडियो के वायरल होते ही पुलिस सक्रिय हुई। तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई। इस सनसनीखेज घटना ने हांसी शहर में हलचल पैदा कर दी और लोगों में डर का माहौल बन गया।

    हांसी में कैंडल मार्च के दौरान हुआ सनसनीखेज मामला! मनीषा की मौत से गुस्साए युवक ने CM सैनी को अपशब्द बोलते हुए की फायरिंग

    क्रोध में की गई फायरिंग

    सूचना के अनुसार, सोमवार को शिक्षक मनीषा मामले में शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला गया। कार्यक्रम के समापन के बाद आयोजकों के संबोधन के दौरान शमशेर अचानक मंच पर आया और भीड़ के सामने पिस्तौल से गोली चला दी। हालांकि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है, लेकिन现场 मौजूद लोगों में आतंक फैल गया।

    युवक की पहचान और गिरफ्तारी की तैयारी

    पुलिस के अनुसार, वीडियो में दिखाई देने वाला युवक शमशेर है, जो तोशाम थाना क्षेत्र के पटौदी गांव का निवासी है। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पहचान कर ली गई है और उसे जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। जांच के दौरान यह भी पता लगाया जा रहा है कि युवक ने फायरिंग क्यों की और उसके पीछे कोई राजनीतिक या व्यक्तिगत कारण तो नहीं था।

    शहर में बढ़ी सुरक्षा की स्थिति

    इस घटना के बाद हांसी शहर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे मामले को फैलाने वाले अफवाहों से दूर रहें। सुरक्षा की दृष्टि से शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। जांच पूरी होने तक प्रशासन सतर्क है।

  • गुरुग्राम में कचरा और जलभराव के खिलाफ कांग्रेस ने किया जोरदार प्रदर्शन! राज बब्बर भी हुए शामिल बोले- तिगुनी सरकार के बावजूद शहर की हालत खराब

    गुरुग्राम में कचरा और जलभराव के खिलाफ कांग्रेस ने किया जोरदार प्रदर्शन! राज बब्बर भी हुए शामिल बोले- तिगुनी सरकार के बावजूद शहर की हालत खराब

    गुरुग्राम में स्वच्छता और जलभराव की समस्याओं को लेकर कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस के कार्यकर्ता सेक्टर-34 स्थित नगर निगम गुरुग्राम (MCG) कार्यालय पहुंचे और धरना प्रदर्शन शुरू किया। इस दौरान लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी और फिल्म अभिनेता राज बब्बर भी मौजूद रहे। प्रदर्शन का नेतृत्व जिला अध्यक्ष अर्बन पंकज डावर और ग्रामीण अध्यक्ष वर्धन यादव ने किया।

    तिगुनी सरकार पर हमला: जनता परेशान

    पंकज डावर ने कहा कि गुरुग्राम में तिगुनी सरकार होने के बावजूद, यानी नगर निगम, राज्य और केंद्र की सरकार होने के बावजूद शहर की हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर सड़क और मोहल्ले में कचरे के ढेर लगे हैं और जनता इससे परेशान है। मीडिया द्वारा पूछे गए सवालों पर महापौर के पास कोई जवाब नहीं है।

    गुरुग्राम में कचरा और जलभराव के खिलाफ कांग्रेस ने किया जोरदार प्रदर्शन! राज बब्बर भी हुए शामिल बोले- तिगुनी सरकार के बावजूद शहर की हालत खराब

    केंद्र और नगर निगम की निष्क्रियता

    कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा सरकार ने शहर को विकास की राह पर नहीं बल्कि “कुदाग्राम” बना दिया है। उन्होंने कहा कि नगर निगम और प्रशासन छोटे ठेले वालों पर कार्रवाई करते हैं, टैक्स वसूलते हैं, लेकिन बड़े कब्जाधारियों और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती।

    किसानों और मजदूरों के हितों की उपेक्षा

    ग्रामीण अध्यक्ष वर्धन यादव ने कहा कि मजदूरी करने वाले लोगों की आजीविका झोंपड़ियों और ठेलों पर JCB चलाकर छीन ली जा रही है, जबकि बड़े अवैध कब्जाधारियों पर प्रशासन चुप बैठा है। यह दोहरा मापदंड सीधे तौर पर जनता के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि अब गुरुग्राम के लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    कांग्रेस जनता की आवाज बनेगी

    वर्धन यादव ने यह भी कहा कि अब हर कांग्रेस कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि वह जनता की आवाज बने और सरकार की असफलताओं को उजागर करे। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वे जनता के हितों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी और नगर निगम एवं प्रशासन की लापरवाही को बेनकाब करेगी।

  • आयुष्मान के इलाज पर SHA और IMA के बीच टकराव की स्थिति! हड़ताल के पहले ही दिन मिले साढ़े सात करोड रुपए के इलाज बिल

    आयुष्मान के इलाज पर SHA और IMA के बीच टकराव की स्थिति! हड़ताल के पहले ही दिन मिले साढ़े सात करोड रुपए के इलाज बिल

    आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत लाभार्थियों का इलाज नहीं करने वाले निजी अस्पतालों को हरियाणा सरकार ने चेतावनी जारी की है। हरियाणा की स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए) और डॉक्टरों की यूनियन आई एम ए के बीच अब टकराव की स्थिति बन गई है। एसएचए की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) संगीता तेतरवाल ने बयान जारी कर कहा कि पैनल से जुड़े अस्पताल के खिलाफ अगर मरीजों का इलाज करने से मना किए जाने की शिकायत मिलती है तो जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा उनको आयुष्मान भारत के पैनल से बाहर करने व लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

    उन्होंने चेतावनी दी कि अगर फीस लेने संबंधी भी कोई शिकायत मिलती है तो उन पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) और एसएचए द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार सख्ती बरती जाएगी। दूसरी तरफ प्रदेश के निजी अस्पतालों मेंं लगातार दूसरे दिन योजना के तहत मरीजों का इलाज नहीं हुआ। किसी भी जिले में ऑपरेशन नहीं किया गया। डॉक्टर दो दिन से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की हरियाणा शाखा के आह्वान पर बकाया भुगतान की मांग को लेकर विरोध जता रहे हैं। उन्होंने सभी 22 जिलाें में सभी सेवाएं बंद कर रखी हैं। उनकी बकाया राशि को लेकर राज्य की स्टेट हेल्थ एजेंसी के मुताबिक, सूचीबद्ध अस्पतालों को सभी भुगतान एफआईएफओ (पहले आओ पहले पाओ) पद्धति के अनुसार जारी किए जा रहे हैं। निजी अस्पतालों को कहा गया है कि सभी लंबित बकाया राशि का विधिवत भुगतान किया जाएगा।

    आयुष्मान के इलाज पर SHA और IMA के बीच टकराव की स्थिति! हड़ताल के पहले ही दिन मिले साढ़े सात करोड रुपए के इलाज बिल

    सीईओ ने बताया कि एसएचए जिला कार्यान्वयन इकाइयों और अन्य माध्यमों से सभी सूचीबद्ध अस्पतालों के साथ निरंतर संपर्क में है। राज्यभर के सूचीबद्ध अस्पतालों को आश्वस्त किया गया है कि लंबित भुगतान जल्द से जल्द जारी कर दिया जाएगा। एसएचए का कहना है कि आईएमए और सूचीबद्ध अस्पतालों की कई जायज मांगों पर विचार किया गया है और उनका समाधान भी किया गया है। उनकी मांगों के अनुसार ही आईएमए के सदस्यों व निजी अस्पतालों के कई प्रतिनिधियों को राज्य पैनल समिति, राज्य शिकायत निवारण समिति और जिला शिकायत निवारण समितियों में शामिल किया गया है। साथ ही उनके नवीनतम पैकेज की बात भी मानी गई है। एसएचए के मुताबिक यदि उन्हें सीएम विंडो, जन संवाद पोर्टल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म/एसएमजीटी पोर्टल, ईमेल या किसी अन्य चैनलों के माध्यम से शिकायत मिली तो सख्ती की जाएगी।

    स्टेट हेल्थ एजेंसी के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवाएं निलंबित करने का कोई वैध कारण नहीं है, क्योंकि उनकी सभी मांग व मुद्दों का पहले ही समाधान कर दिया है। कई सूचीबद्ध अस्पतालों ने यह भी सूचित किया है कि वे इस योजना के तहत सेवाओं को वापस लेने के आईएमए के आह्वान में भाग नहीं ले रहे हैं। सरकार की ओर से यह भी दावा किया गया है कि जिस दिन हड़ताल का दावा किया जा रहा है, उस दिन यानी सात अगस्त को निजी अस्पतालों से 2.5 करोड़ रुपये के पूर्व-अधिकृत क्लेम (दावे) प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा मई 2025 के पहले सप्ताह तक के भुगतान मंजूर कर दिए गए हैं।

    आईएमए के पूर्व प्रधान डाॅ. अजय महाजन ने दावा किया कि राज्य के सभी निजी अस्पताल हड़ताल में शामिल हैं। राज्य सरकार की ओर जानबूझ कर भ्रम फैला रही है। जिन मरीजों को पहले तारीख दी जा चुकी है, सिर्फ उन्हीं का इलाज किया जा रहा है। नए मरीजों का इलाज अस्पताल नहीं कर रहे हैं। जो भुगतान का दावा किया जा रहा है, वह पहले के क्लेम हैं।

  • Haryana News: विकास शर्मा की जान जाने पर भड़के नवीन जयहिंद बोले– न्याय के लिए आखिरी सांस तक लड़ूंगा

    Haryana News: विकास शर्मा की जान जाने पर भड़के नवीन जयहिंद बोले– न्याय के लिए आखिरी सांस तक लड़ूंगा

    Haryana News: जय हिंद सेना के संयोजक और समाजसेवी नवीन जयहिंद मंगलवार को सफीदों के मुआना गांव पहुंचे जहां उन्होंने हाल ही में मारे गए अस्पताल संचालक विकास शर्मा के परिवार से मुलाकात की। उन्होंने पिता शिवकुमार शर्मा को ढांढस बंधाया और इस नृशंस जान जाने की कड़ी निंदा की। जयहिंद ने कहा कि वे परिवार के साथ हर स्थिति में खड़े हैं और न्याय के लिए पूरी ताकत से लड़ेंगे।

    सिस्टम और सरकार पर उठे सवाल

    पत्रकारों से बातचीत में जयहिंद ने कहा कि युवा डॉक्टर विकास की जान जाने बेहद दुखद और चिंताजनक है। यह न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज और प्रशासन के लिए एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले की गहराई से जांच कर सभी दोषियों को सजा दिलवानी चाहिए। इसे रोड रेज बताकर खत्म कर देना न्याय के साथ अन्याय होगा।

    Haryana News: विकास शर्मा की जान जाने पर भड़के नवीन जयहिंद बोले– न्याय के लिए आखिरी सांस तक लड़ूंगा

    जेल मंत्री पर लगाए गए गंभीर आरोप

    परिवार द्वारा जेल मंत्री डॉक्टर अरविंद शर्मा पर लगाए गए आरोपों को लेकर जयहिंद ने साफ कहा कि यदि मंत्री के पिता ने पीड़ित परिवार को फोन करके कहा कि आरोपी उनके आदमी हैं, तो यह पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि किसी को बचाने वाला व्यक्ति असली दोषी होता है। ऐसे में जेल मंत्री को खुद मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई या हाईकोर्ट से जांच करवाने की मांग करनी चाहिए।

    कानून व्यवस्था पर गंभीर चिंता

    जयहिंद ने कहा कि प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जेलों से गैंग ऑपरेट हो रहे हैं और फिरौती मांगी जा रही है। बदमाशों में कानून का कोई डर नहीं बचा है। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सैनी से मांग की कि वे इस अपराध की निष्पक्ष जांच करवाएं और दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलवाएं। साथ ही विपक्ष को भी घेरते हुए कहा कि वह गहरी नींद में है और सड़कों पर नहीं उतर रहा।

    आत्मदाह की धमकी पर दी सलाह

    शर्मा परिवार द्वारा आत्मदाह की बात कहने पर जयहिंद ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि डरकर कोई लड़ाई नहीं जीती जाती। अगर मरना ही है तो लड़कर मरना चाहिए। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि पूरी बिरादरी और समाज उनके साथ है और यह लड़ाई मिलकर लड़ी जाएगी।