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  • मोदी के 75वें जन्मदिन पर हरियाणा में भाजपा का सेवा मिशन शुरू, रक्तदान, पौधरोपण और राहत कार्यों की श्रृंखला

    मोदी के 75वें जन्मदिन पर हरियाणा में भाजपा का सेवा मिशन शुरू, रक्तदान, पौधरोपण और राहत कार्यों की श्रृंखला

    हरियाणा भाजपा ने फैसला किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर से लेकर महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्तूबर तक सघन सेवा प्रकल्प आयोजित किए जाएंगे। इसमें रक्तदान शिविर, पौधारोपण, शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम और अन्य सामाजिक गतिविधियां होंगी। प्रधानमंत्री मोदी के 75वें जन्मदिन पर सेवा कार्यों में ‘75’ की संख्या को मानक बनाया गया है। जैसे 75 पौधे लगाना, 75 लोगों को रक्तदान हेतु प्रेरित करना या अन्य गतिविधियां। भाजपा ने कहा है कि सेवा का क्षेत्र असीमित है और इसमें जितना कार्य किया जाए, उतना ही समाज को लाभ मिलेगा।

    पंचकूला में आयोजित प्रदेश भाजपा की बैठक में बाढ़ से प्रभावित इलाकों की विस्तृत समीक्षा की गई। सभी मंत्रियों, विधायकों और प्रत्याशियों को फील्ड में जाकर नुकसान का आकलन करने और जनता के बीच रहकर राहत कार्यों में जुटने के निर्देश दिए गए। उनकी रिपोर्ट लेकर आगे की राहत नीति पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

    मोदी के 75वें जन्मदिन पर हरियाणा में भाजपा का सेवा मिशन शुरू, रक्तदान, पौधरोपण और राहत कार्यों की श्रृंखला

    प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिवस 17 सितंबर से लेकर गांधी जयंती 2 अक्तूबर तक सेवा पखवाड़ा पूरे जोश और जनभागीदारी के साथ मनाया जाएगा। इस दौरान गांवों और शहरों में स्वच्छता अभियान, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और अस्पतालों में नए ब्लॉकों का उद्घाटन, रक्तदान व स्वास्थ्य शिविर, पौधरोपण अभियान, बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता व युवाओं के लिए सांसद खेल स्पर्धाएं आयोजित होंगी। साथ ही जागरूकता के लिए डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सेवा पखवाड़ा केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के लिए भाजपा का संकल्प और सेवा पर्व है।

    पंचकूला स्थित प्रदेश कार्यालय पंचकमल में प्रदेश प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, प्रदेश अध्यक्ष पंडित मोहनलाल बडौली, प्रदेश महामंत्री (संगठन) फणीन्द्र नाथ शर्मा ने हरियाणा के सभी मंत्री, विधायक, जिलाध्यक्ष एवं जिला प्रभारियों से लगभग डेढ़ घंटे तक बातचीत की। प्रदेश प्रभारी ने केंद्र से मिले कुछ दिशा निर्देश उपस्थित नेताओं के सामने रखे। साथ ही कुछ काम आगामी दिनों में करने हैं, उनकी रूपरेखा रखी। बाढ़ राहत कार्यों की जानकारी सीधे सीएम नायब सैनी से सांझा किए जाने के आदेश पहले से ही दिए हुए हैं।

  • हरियाणा: डिफाल्टरों के कारण संकट में फंसे बिजली निगम, 7700 करोड़ बकाया लेकिन नहीं हो पा रही वसूली

    हरियाणा: डिफाल्टरों के कारण संकट में फंसे बिजली निगम, 7700 करोड़ बकाया लेकिन नहीं हो पा रही वसूली

    हरियाणा के बिजली निगम बिजली के बकायादारों के कारण संकट में फंसकर रह गई हैं। असल में सरकार द्वारा सरचार्ज माफी की योजना के बावजूद बिजली निगम को कोई खास लाभ नहीं हो पा रहा है।

    उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) पर उपभोक्ताओं का बकाया जून 2025 तक बढ़कर 7,695.62 करोड़ रुपए हो गया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, न केवल ग्रामीण और शहरी घरेलू उपभोक्ता बल्कि औद्योगिक इकाइयां और सरकारी विभाग भी बिल चुकाने में पीछे हैं। बिजली निगम सरकारी तंत्र से बिलों की वसूली नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति और कमजोर हुई है।

    हरियाणा में बिजली बिल बकाएदारों को राहत देते हुए सरकार ने वन टाइम सेटलमेंट स्कीम लागू की है। इस योजना के तहत वन टाइम बिल का भुगतान करने पर 10% की छूट और 100% सरचार्ज में छूट दी जा रही है। किश्तों में बिल भरने वाले उपभोक्ताओं को 100% सरचार्ज माफ किया जाएगा। घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा औद्योगिक और अन्य उपभोक्ताओं को भी 50% सरचार्ज माफ की सुविधा दी गई है। यह योजना छह महीने तक लागू रहेगी। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बिजली बिल बकाएदारों से अपील की है कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

    हरियाणा: डिफाल्टरों के कारण संकट में फंसे बिजली निगम, 7700 करोड़ बकाया लेकिन नहीं हो पा रही वसूली

    प्रदेश में 22 लाख 21 हजार 315 उपभोक्ता समय पर बिजली बिलों का भुगतान नहीं कर पाए हैं और अब डिफाल्टर बन चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे उपभोक्ताओं की भी शामिल है, जिनकी बिजली आपूर्ति अभी भी चालू है, जबकि काफी उपभोक्ताओं के कनेक्शन पहले ही काट दिए गए हैं।

    57% राशि केवल ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं की तरफ बकाया

    ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं की तरफ बकाया लगभग 4,400 करोड़ रुपए है। यह कुल बकाया का करीब 57% है। इस बकाया राशि को निकालना बिजली निगम के लिए काफी मुश्किल हो रहा है। शहरी घरेलू उपभोक्ताओं का करीब 834 करोड़ रुपए।
    कृषि क्षेत्र के किसानों पर 194 करोड़ रुपए का बकाया।

    गैर-घरेलू (वाणिज्यिक प्रतिष्ठान) का लगभग 770 करोड़ रुपए।
    औद्योगिक इकाइयों का 1,063 करोड़ रुपए से अधिक। सरकारी विभागों का 389 करोड़ रुपए का बकाया है। अन्य श्रेणियों का लगभग 43 करोड़ रुपए बकाया है।

    लाचार बिजली निगम

    डिफॉल्टर बिजली उपभोक्ताओं को लेकर बिजली निगम लाचारी की स्थिति में है। बिजली बिल न भरने पर पहले जुर्माना और ब्याज लगाया जाता है, इसके बाद कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा वह कोई और अन्य कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। वर्तमान में जो 22 लाख उपभोक्ता डिफाल्टर है उनमें से करीब आधे के कनेक्शन कटे हुए हैं।

    योजना के बावजूद नहीं मिल रहा लाभ

    बिजली निगम के अधिकारी बताते हैं कि यह योजना पिछले 3 महीने से चल रही है लेकिन इस योजना के बावजूद बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है। जितनी राशि का भुगतान इन पुराने डिफाल्टर बकायेदारों से किसी तरीके से करवाया जा रहा है उससे ज्यादा राशि हर महीने और डिफाल्टर हो जाती है।

  • Haryana News: सरकार की नीतियों पर बड़ा सवाल! हुड्डा का वार- ‘बीजेपी राज में उद्योग छोड़ रहे हैं हरियाणा

    Haryana News: सरकार की नीतियों पर बड़ा सवाल! हुड्डा का वार- ‘बीजेपी राज में उद्योग छोड़ रहे हैं हरियाणा

    Haryana News: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसकी उद्योग विरोधी नीतियों के कारण हरियाणा से लगातार उद्योग पलायन कर रहे हैं। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, बीते 3 वर्षों में राज्य के 100 से अधिक राइस मिल्स मध्य प्रदेश शिफ्ट हो चुके हैं। यह न केवल राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है, बल्कि सरकार की नाकामी का प्रमाण भी है। इस पलायन से हर साल लगभग 100 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा और 20 से 25 हजार लोगों की नौकरियां छिन जाएंगी।

     राइस इंडस्ट्री की हालत खस्ता, निवेशकों ने बदला ठिकाना

    हुड्डा ने बताया कि यमुनानगर, करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र, सिरसा, रतिया जैसे शहरों से दर्जनों राइस मिल्स और व्यापारी मध्य प्रदेश में भूमि खरीदकर नई यूनिट्स स्थापित कर रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है हरियाणा में 4% मार्केट फीस, जबकि मध्य प्रदेश में यह मात्र 1.20% है। इसके अलावा, बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी और बढ़ते अपराधों ने कारोबारियों को डराने का काम किया। हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस शासन में हरियाणा चावल निर्यात में देश में 60% हिस्सेदारी रखता था, जो अब घटकर 40% रह गई है।

    Haryana News: सरकार की नीतियों पर बड़ा सवाल! हुड्डा का वार- ‘बीजेपी राज में उद्योग छोड़ रहे हैं हरियाणा

    यमुनानगर की प्लाईवुड और पंचकूला की इकाइयां भी बंदी की कगार पर

    हुड्डा ने बताया कि न केवल राइस मिल्स बल्कि यमुनानगर की पहचान बनी प्लाईवुड इंडस्ट्री भी अब यूपी की ओर रुख कर रही है। उत्तर प्रदेश सरकार उद्योगों के लिए क्लस्टर बनाकर रियायतें दे रही है, जबकि हरियाणा सरकार की तरफ से कोई सहायता नहीं मिल रही। 2017 में जहां 380 यूनिट्स थीं, अब केवल 160 ही रह गई हैं। इसी तरह, पंचकूला की यूनिट्स हिमाचल के बद्दी की ओर और गुरुग्राम-फरीदाबाद की यूनिट्स नोएडा-गाजियाबाद की ओर पलायन कर रही हैं।

    नए निवेश पर सन्नाटा, पुराने उद्योग भी हो रहे विदा

    हुड्डा ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक और सोनीपत जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश हुआ था। मगर पिछले 11 वर्षों में भाजपा सरकार न तो कोई नया बड़ा उद्योग ला पाई, न ही कोई नया IMT (इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप) स्थापित हुआ। उल्टा रेल कोच फैक्ट्री और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जैसे मंजूरशुदा प्रोजेक्ट भी राज्य से बाहर चले गए। इससे हरियाणा निवेश, रोजगार, और औद्योगिक विकास में पिछड़ता चला गया।

    बेरोजगारी, अपराध और भ्रष्टाचार में अव्वल बना हरियाणा

    हुड्डा ने भाजपा सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि राज्य बेरोजगारी, अपराध, नशाखोरी, पलायन और भ्रष्टाचार जैसे मामलों में देश में पहले स्थान पर आ गया है। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार को तत्काल प्रभाव से उद्योगों को राहत देने वाली नीतियां लागू करनी चाहिए, ताकि पलायन रोका जा सके और हरियाणा दोबारा औद्योगिक हब बन सके।

  • Haryana News: भाजपा सरकार की गलत नीतियों के चलते हरियाणा से चावल उद्योग का हो रहा है पलायन- कुमारी सैलजा

    Haryana News: भाजपा सरकार की गलत नीतियों के चलते हरियाणा से चावल उद्योग का हो रहा है पलायन- कुमारी सैलजा

    Haryana News। प्रदेश में भाजपा सरकार की विफल और जनविरोधी औद्योगिक नीतियों के कारण प्रदेश से उद्योगों का बड़े पैमाने पर पलायन हो रहा है, जिससे प्रदेश को दोहरी क्षति हो रही है, एक ओर युवाओं का रोजगार छिन रहा है और दूसरी ओर सरकार को भारी राजस्व घाटा उठाना पड़ रहा है। हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में हरियाणा से 90 से अधिक चावल मिलें मध्य प्रदेश में शिफ्ट हो चुकी हैं। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है और प्रदेश के औद्योगिक भविष्य पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है। सरकार को अपनी नीतियों पर चिंतन और मंथन करना होगा, हाल ही में बिजली की दरों में की गई वृद्धि से अनेक उद्योग पलायन की तैयारी में हैं।

    मीडिया को जारी बयान में सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि देश में चावल निर्यात में हरियाणा की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत रही है जो अब घटकर 40 प्रतिशत रह गई है। इतना ही नहीं एक ओर जहां हर साल प्रदेश को कम से कम 100 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा वहीं हर साल 15 से 20 हजार रोजगार भी कम हो जाएंगे। तीन साल में हरियाणा के करनाल, कैथल, अंबाला, यमुनानगर, फतेहाबाद, सिरसा, तरावडी, चीका, घरौंडा, कुरूक्षेत्र, निसिंग, टोहाना और रतिया से करीब 90 राइस मिल का मध्य प्रदेश पलायन हो चुका हैै।

    Haryana News: भाजपा सरकार की गलत नीतियों के चलते हरियाणा से चावल उद्योग का हो रहा है पलायन- कुमारी सैलजा

    इसके साथ ही 20 से 30 उद्योगपतियों ने मध्य प्रदेश में नए राइस मिल और गोदाम बनाने के लिए जमीन तक खरीद ली है। राइस मिल मालिक काफी समय से सरकार से मार्केट फीस कम करने की मांग कर है साथ ही कुछ रियायतें भी मांग रहे है पर सरकार है कि कान में तेल डालकर बैठी हुई है। ऊपर से प्रदेश की भाजपा सरकार ने हाल ही में बिजली की दरों में वृद्धि की हैै जिसका उद्योगपतियों ने विरोध किया है और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है ऐसा न होने पर उद्योगपतियों ने दूसरे राज्यों में पलायन की चेतावनी तक दी है।

    सैलजा ने कहा है कि हरियाणा में चावल उद्योग पर 4 प्रतिशत मार्केट फीस हैे जबकि मध्य प्रदेश में 1.20 प्रतिशत है। उद्योगपतियों को बिजली के भारी फिक्स चार्ज और अनावश्यक नियमों का सामना करना पड़ रहा है। नीति निर्धारण में स्थायित्व और पारदर्शिता का अभाव है। राइस मिल मालिक एक ही बात कहते है कि अगर हरियाणा में सेला राइस मिल लगानी हो तो उस पर 14 से 15 करोड़ का खर्च आता है जबकि यही मिल मध्य प्रदेश में 07 से 08 करोड़ मेें लग जाती है।

    इतना ही नहीं एमपी में राइस मिल मालिक को प्लांट लगाने या गोदाम बनाने के लिए 60 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है जबकि हरियाणा में नहीं है, इसके साथ ही एमपी में नए उद्योगपति को पांच साल तक 05 करोड़ रुपये मार्केट फीस में छूट मिलती है। प्रदेश सरकार की गलत नीतियों के चलते हर वर्ष करीब 15 से 20 हजार लोगों का रोजगार छिन रहा है, राज्य की चावल निर्यात में हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से घटकर अब मात्र 40 प्रतिशत रह गई है। सरकार को 100 करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक राजस्व घाटा होने की आशंका है।

    सैलजा ने कहा कि यह पलायन भाजपा सरकार की उद्योग विरोधी नीतियों का परिणाम है। यदि सरकार ने समय रहते नीति में संशोधन नहीं किया, तो अन्य उद्योग भी प्रदेश छोड़ने को मजबूर होंगे। कुमारी सैलजा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मार्केट फीस और टैक्स की दरें पड़ोसी राज्यों के समतुल्य की जाएं, बिजली शुल्कों में व्यावहारिक संशोधन किया जाए, उद्योगपतियों के लिए अनुकूल और स्थिर औद्योगिक वातावरण तैयार किया जाए। कुमारी सैलजा ने हरियाणा के युवाओं के भविष्य, रोजगार और आर्थिक समृद्धि को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाना समय की मांग है।