Haryana: जींद जिले की उचाना विधानसभा चुनाव 2024 के रिजेक्ट वोटों की गणना को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में बुधवार को याचिका पर सुनवाई होगी। इसमें भाजपा विधायक देवेंद्र अत्री और कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह पेश हुए। देवेंद्र अत्री के वकील की तरफ से 10 आब्जेक्शन लगाए गए, जबकि बृजेंद्र सिंह की तरफ से दो आब्जेक्शन लगाए गए हैं। इन सभी आपत्तियों पर तीन सितंबर को बहस होगी। सभी आपत्ति हटने के बाद इस पर फैसला आ सकता है।
आपत्तियां सुनने के बाद जज द्वारा 3 सितंबर को फिर से सुनवाई और इन पर बहस का समय दिया गया है। पूर्व विधायक प्रेमलता के अनुसार जज ने ये भी कहा है कि यह केस सबसे ऊपर रहेगा। दिन में चाहे कितने भी केस हों, सबसे पहले इस पर सुनवाई होगी। बता दें कि उचाना विधानसभा सीट पर रिजेक्ट वोटों की काउंटिंग को लेकर चौथी बार तारीख मिली है। इससे पहले तीन बार इस मामले में सुनवाई हो चुकी हैं।
भाजपा विधायक देवेंद्र अत्री की तरफ से 10 ऑब्जेक्शन लगाए गए। इनमें एक ये है कि बृजेंद्र सिंह संशोधित याचिका देने के लिए खुद नहीं आए। दूसरा ये है कि बृजेंद्र सिंह के अलावा किसी भी दूसरे प्रत्याशियों ने यह ऑब्जेक्शन क्यों नहीं लगाया। इसके अलावा भी 8 और ऑब्जेक्शन हैं।
कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह ने याचिका में कहा है कि उचाना विधानसभा में जीत-हार का अंतर मात्र 32 वोटों का था और रिजेक्ट हुए वोटों की संख्या 215 के करीब है। इसलिए रिजेक्ट वोटों की दोबारा से काउंटिंग होनी चाहिए। याचिका पर इससे पहले 26 अगस्त को सुनवाई हुई थी, जिसमें भाजपा विधायक के सीनियर एडवोकेट की तरफ से दलील दी गई थी। हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह मामले की तेजी से सुनवाई की बात कही थी।

भाजपा विधायक देवेंद्र अत्री के एडवोकेट ने कोर्ट से राहत पाने के लिए यह तर्क दिया कि बृजेंद्र सिंह की संशोधित याचिका CPC के आदेश 7 नियम-11 के तहत सुनने योग्य नहीं है।
उचाना सीट पर भाजपा के देवेंद्र अत्री ने मात्र 32 वोटों से बृजेंद्र सिंह को हराया था। मार्च 2025 में बृजेंद्र सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा था कि जो कैंसिल या रिजेक्ट वोट होते हैं, यदि उसका अंतर इलेक्शन की हार-जीत के अंतर से ज्यादा है, तो गिनती खत्म होने के बाद उन सभी कैंसिल वोटों की दोबारा से जांच रिटर्निंग अधिकारी को मौके पर करनी होती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
उचाना विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र अत्री को 48 हजार 968 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह को 48 हजार 936 वोट मिले थे। इसमें कांग्रेस प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह 32 वोटों से हार गए थे। इस चुनाव में 400 के करीब बैलेट पेपर की काउंटिंग की गई थी, तो इनमें से 215 वोट त्रुटियों के कारण रिजेक्ट या कैंसिल हो गए थे।
बृजेंद्र सिंह ने आरोप लगाए थे कि 150 वोट केवल इसलिए कैंसिल किए गए हैं, क्योंकि पोस्टल बैलेट के लिफाफे के ऊपर जो स्कैनर था, उनकी स्कैनिंग नहीं हो पा रही थी। बृजेंद्र सिंह ने कहा कि जिन वोटों की स्कैनिंग नहीं होती तो उन लिफाफों को कैसे खोलना है, इसकी भी प्रक्रिया है, जो गिनती के दौरान नहीं की गई। उसी को लेकर उन्होंने कोर्ट में याचिका लगाई है। उन्होंने कहा है कि वोटों की जीत-हार का अंतर मात्र 32 वोटों का है, इसलिए यह काउंटिंग जरूरी थी।
हाईकोर्ट ने अत्री के वकील को सबसे बड़ी बात यह कही थी कि इस केस को रैंक ऑन प्रायरिटी पर रखा जाए और इसमें बेवजह देरी के तौर-तरीके न अपनाए जाएं।
