ABVP vs Yogi Govt: उत्तर प्रदेश में इन दिनों छात्र राजनीति और सत्ता के गलियारों में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), जो भारतीय जनता पार्टी से जुड़ा छात्र संगठन है, अपनी ही सरकार पर भड़क उठा है। मामला बाराबंकी की श्रीराम स्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ और लखनऊ तक आ पहुंचा। यहां छात्रों ने योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर के आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। विवाद की जड़ लॉ कोर्स की मान्यता और छात्रों के निलंबन से जुड़ी है।
लॉ कोर्स की मान्यता पर विवाद और पुलिस लाठीचार्ज
सोमवार (1 सितंबर) को एलएलबी कोर्स की मान्यता और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के निलंबन के खिलाफ छात्रों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना है कि 2022 से यूनिवर्सिटी बिना बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की मान्यता के लॉ कोर्स चला रही है, जिससे उनके भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। भारी बारिश के बावजूद छात्र सड़कों पर उतरे, लेकिन भीड़ बढ़ने पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पुलिस बुला ली। इसके बाद छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई और पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसमें 25 से ज्यादा छात्र और पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन के इशारे पर बाहरी लोगों ने भी छात्रों पर हमला किया।

ओपी राजभर के बयान से भड़की आग
घटनाक्रम यहीं खत्म नहीं हुआ। योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर छात्र गुंडागर्दी करेंगे तो पुलिस कार्रवाई करेगी और एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर हुई लाठियां सही थीं। उन्होंने यहां तक कहा कि देश कानून से चलता है और कानून तोड़ने पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक को जेल जाना पड़ सकता है। इस बयान के बाद एबीवीपी कार्यकर्ताओं का गुस्सा और भड़क गया और उन्होंने मंगलवार देर रात लखनऊ में ओपी राजभर के आवास के बाहर पुतला फूंका और जोरदार प्रदर्शन किया।
सीएम योगी का एक्शन और बढ़ती मांगें
मामले ने तूल पकड़ते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने घटना की जांच के आदेश दिए और तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया। बाराबंकी के सीओ सिटी हर्षित चौहान को हटा दिया गया और कोतवाली प्रभारी समेत अन्य पर भी कार्रवाई की गई। सरकार ने अयोध्या रेंज के आईजी और बाराबंकी मंडलायुक्त को जांच सौंपी है। दूसरी ओर, एबीवीपी ने स्पष्ट मांग रखी है कि यूनिवर्सिटी के कुलपति को बर्खास्त किया जाए, निष्कासित छात्रों को बहाल किया जाए और लॉ कोर्स की मान्यता पर स्थिति साफ की जाए।
यूनिवर्सिटी प्रशासन का बचाव
यूनिवर्सिटी के कुलपति विकास मिश्रा ने छात्रों और एबीवीपी पर ही आरोप मढ़े हैं। उन्होंने कहा कि यह विवाद बाहरी लोगों की वजह से भड़का और इसमें यूनिवर्सिटी के छात्रों की भूमिका नहीं थी। कुलपति का दावा है कि यूनिवर्सिटी के पास पहले से 2023 तक बीसीआई की मान्यता है और 2027 तक नवीनीकरण के लिए आवेदन किया जा चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने मुख्य गेट बंद कर दिया था, जिससे अंदर मौजूद हजारों छात्र डर गए और उनके अभिभावक कैंपस पहुंच गए। मिश्रा का कहना है कि प्रशासन और लॉ विभाग के छात्र हिंसा में शामिल नहीं थे।
