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  • आज Teachers’ Day पर विशेष, ‘गाड़ी वाला आया, बैग से किताबें निकाल’, ई-रिक्शा चलाकर जगा रहे गरीब बच्चों में शिक्षा की अलख

    आज Teachers’ Day पर विशेष, ‘गाड़ी वाला आया, बैग से किताबें निकाल’, ई-रिक्शा चलाकर जगा रहे गरीब बच्चों में शिक्षा की अलख

    आज Teachers’ Day पर हम एक ऐसे शिक्षक की चर्चा कर रहे हैं जो गरीब बच्चों में शिक्षक जल रहे हैं और उसने अपनी ई-रिक्शा को ही शिक्षा का मंदिर बना दिया है।

    नोएडा की सड़कों पर राह चलते आपको ‘गाड़ी वाला आया, बैग से किताबें निकाल’ सुनाई दे, तो चौंकिएगा नहीं। यह आवाज सेक्टर-53 में रहने वाले प्रिंस शर्मा की है, जो नौ वर्षों से ई-रिक्शा चलाकर झुग्गी-झोपड़ी और कॉलोनी में रहने वाले गरीब बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। उन्होंने अब तक एक हजार से अधिक गरीब बच्चों को बेसिक शिक्षा देकर स्कूल और कॉलेज में दाखिला कराया।

    आज Teachers' Day पर विशेष, 'गाड़ी वाला आया, बैग से किताबें निकाल', ई-रिक्शा चलाकर जगा रहे गरीब बच्चों में शिक्षा की अलख

    प्रिंस शर्मा ने एमकॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद नोएडा समेत एनसीआर के कई स्थानों पर चैलेंजर्स की पाठशाला लगानी शुरू की। हालांकि, उन्होंने कभी किसी स्कूल या कॉलेज में बच्चों को नहीं पढ़ाया है। वह गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा, किताब, दवाएं उपलब्ध कराते हैं। भूतपूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और वर्तमान राष्ट्रपति उनकी पीठ थपथपा चुकी हैं।

    प्रिंस शर्मा ने अपनी पढ़ाई के दौरान ही अनुभव किया कि समाज में अनेक ऐसे बच्चे हैं जो संसाधनों और परिस्थितियों की कमी के कारण पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं। यही अनुभव उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।

  • हरियाणा मानवाधिकार आयोग का जींद और नूंह के डीसी और एसपी को नोटिस जारी, 4 नवंबर को देना होगा अधिकारियों को जवाब

    हरियाणा मानवाधिकार आयोग का जींद और नूंह के डीसी और एसपी को नोटिस जारी, 4 नवंबर को देना होगा अधिकारियों को जवाब

    जींद। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने जींद जिले में एक 15 वर्षीय बिहारी किशोर को बंधुआ मजदूर बनकर रखने और बाद में उसे घायल अवस्था में छोड़ने के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए जींद और नूंह के डीसी और एसपी, नूंह के सिविल सर्जन, जींद के सहायक श्रम आयुक्त, नूंह के बाल सुरक्षा अधिकारी को नोटिस जारी कर 4 नवंबर को इस मामले में आयोग के सामने विस्तृत रिपोर्ट रखने को कहा है।आयोग ने नोटिस जारी कर जींद के आरोपी डेयरी संचालक के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।

    बिहार के किशनगंज जिला के का रहने वाला 15 वर्षीय संतोष 26 मई को यह बच्चा काम की तलाश में हरियाणा आया था। इस मामले में संतोष के भाई जितेंद्र ने बताया कि उसका भाई 26 में को बहादुरगढ़ पहुंचा था और यहां से उसे कोई अज्ञात व्यक्ति अपने साथ 10000 रुपए महीने की मजदूरी पर रखने की बात कह कर ले गया था। जितेंद्र ने बताया कि संतोष यह नहीं बता पा रहा है कि वह किस जिले में था और मालिक का नाम क्या था। संतोष को एक डेरी में बंधुआ बनाकर रखा गया। यहां उस काम दिया जाता था और उससे मारपीट भी की जाती थी लेकिन उसे दिया कुछ नहीं जाता था। खाना भी उसे समय पर नहीं मिलता था। जितेंद्र ने बताया कि संतोष का कहना है कि जहां उसे रखा गया था वहां आसपास जंगल था और वहां कोई फसल भी नहीं हो रही थी।

    हरियाणा मानवाधिकार आयोग का जींद और नूंह के डीसी और एसपी को नोटिस जारी, 4 नवंबर को देना होगा अधिकारियों को जवाब

    इस मामले में प्रारंभिक तौर पर जींद का नाम सामने आया था। तब कहा गया था कि बच्चा जींद से तावड़ू पहुंचा और वहां वहां उसे अरविंद नामक एक शिक्षक मिला और उसकी मदद के बाद इस बच्चे को खाना मिला और साथ ही चिकित्सा भी। नूंह की पुलिस को बच्चे की पहचान और उसके भाई को ढूंढने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी।

    संतोष का कहना है कि नौकरी दिलाने के बहाने ले जाकर लड़के को एक कमरे में बंद कर दिया गया। न तो उसे पैसे दिए गए और न ही ठीक से खाना दिया गया। सिर्फ मोटर से चलने वाली चारा काटने वाली मशीन चलाने के लिए ही बाहर निकाला जाता था। उसे जींद में ही कहीं भैंस डेयरी में रखा गया था। फिर एक दिन मशीन से चारा काटते समय उसका हाथ कट गया। चोट लगने के बाद उसके मालिक ने उसे कोई दवा दी, जिससे उसे नींद आ गई। जब वह नींद से जागा तो वह एक डिस्पेंसरी में था। उसकी जेब में कुछ पैसे भी थे। इसके बाद वह फिर से सो गया। जब वह उठा तो पैसे और उसके कपड़े गायब थे। डिस्पेंसरी वाले ने उसे वहां से जाने को कहा। तभी वह पैदल ही बिहार अपने घर की ओर चल पड़ा। फिर वह पैदल ही नूह पहुंच गया था। जब वह तावडू पहुंचा उसे समय उसके शरीर पर केवल एक अंडरवियर था।

    इस मामले में वह पूरी तरह से बच्चे के परिवार से संपर्क में है। उनके पास आयोग का नोटिस आया है, उसका जवाब दिया जाएगा। लेकिन इस मामले में जिस प्रकार का एरिया बताया जाता है ऐसा एरिया जींद में नहीं है।
    –राजेश चौहान, अस्सिटेंट लेबर कमिश्नर, जींद

  • Manisha murder case: परिवार और कमेटी ने पुलिस की सुसाइड थ्योरी को किया खारिज और जांच के नए मोड़ ने पूरे जिले में पैदा किया सस्पेंस

    Manisha murder case: परिवार और कमेटी ने पुलिस की सुसाइड थ्योरी को किया खारिज और जांच के नए मोड़ ने पूरे जिले में पैदा किया सस्पेंस

    Manisha murder case: हरियाणा के भिवानी में हुए शिक्षिका-कम-छात्रा मनीषा हत्याकांड में फॉरेंसिक साइंस लैब और पुलिस की अब तक की जांच के आधार पर जो सुसाइड थ्योरी तैयार हुई है उसे परिवार और इस मामले में बनी कमेटी ने सिरे से खारिज कर दिया है। सोमवार देर शाम को सुनारिया लैब से मेडिकल जांच रिपोर्ट भिवानी पुलिस को मिल गई है। इसके बाद पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार ने बताया कि रिपोर्ट में चिकित्सकों के अनुसार मनीषा की मौत कीटनाशक की वजह से हुई। मनीषा की बिसरा रिपोर्ट में कीटनाशक मिला है।

    एसपी ने बताया कि चिकित्सकों से हुई बातचीत में अब तक चार बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट हो पाई हैं, जिसमें पहला मनीषा की बिसरा रिपोर्ट में कीटनाशक के अंश मिले हैं, दूसरा मनीषा के शरीर पर कोई सीमन नहीं मिला है, जिससे दुष्कर्म की कोई बात सामने नहीं आई है। तीसरा यह है कि मनीषा के चेहरे पर कोई भी एसिड या कैमिकल नहीं मिला है। जबकि चौथी बात मनीषा की मौत के बाद ही उसके शरीर के अंग गायब हुए हैं, जो जंगली जानवरों द्वारा नोंच कर खाए गए हैं। मनीषा के सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग भी मैच हो गई है।
    भिवानी पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार का कहना है कि मनीषा की मौत मामले में पुलिस विस्तृत जांच कर रही है। अभी इस मामले में पुलिस किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंची हैं। पुलिस ने लैब से बिसरा जांच रिपोर्ट परिजनों को भी दी है। परिजनों के पुलिस को लेकर कुछ सवाल हैं, लेकिन इस मामले में परिजनों की पुरी संतुष्टि की जाएगी। पुलिस की जांच अभी बंद नहीं हुई है, पुलिस इस मामले की हर पहलु से जांच कर इसकी तह तक जाने में लगी है।

    Manisha murder case: परिवार और कमेटी ने पुलिस की सुसाइड थ्योरी को किया खारिज और जांच के नए मोड़ ने पूरे जिले में पैदा किया सस्पेंस

    सुसाइड थ्योरी पर परिजनों ने उठाए सवाल

    मनीषा हत्याकांड मामले में पुलिस की थ्योरी से परिजन भी अनभिज्ञ हैं। मनीष की मौत के पांच दिन बाद परिजनों को सोशल मीडिया से सोमवार को पता चला कि सुसाइड नोट मिला है। जबकि परिजनों ने सुसाइड थ्योरी पर गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं। वहीं मीडिया के सामने मनीषा के दादा रामकिशन भी फफक पड़े। रामकिशन ने बताया कि पौती सारी बातें सांझा करती थी। पौती मनीषा तीन साल का नर्सिंग कोर्स करना चाहती थी। दादा ने मनीषा को कोर्स के लिए खर्चा देने की बात कही थी। वहीं मनीषा के परिजनों ने बताया कि सुसाइड करने वाला कैसे अपना गला काट लेगा और चेहरे पर तेजाब कैसे छिड़ेगा? हालांकि पुलिस ने मनीषा के चेहरे पर तेजाब मिलने की बात को न कर दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस ने पहले सुसाइड नोट की कोई भी बात उन्हें नहीं बताई थी।

    मनीषा मामला संक्षेप में

    19 वर्षीय महिला शिक्षिका मनीषा 11 अगस्त की सुबह ढाणी लक्ष्मण अपने घर से सिंघानी प्ले स्कूल जाने के लिए रोजाना की तरह तैयार होकर निकली थी। लेकिन दोपहर बाद वह घर नहीं लौटी तो देर शाम तक परिजन उसकी तलाश में जुटे रहे। परिजनों ने उसी दिन रात को लोहारू थाना में भी शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने कोई केस दर्ज नहीं किया। मनीषा की तलाश करने की बजाए पुलिस ने लड़की के चरित्र पर ही सवाल उठा दिया। इसके बाद निराश परिजन वापस घर लौट आए। 13 अगस्त की सुबह सिंघानी नहर के पास किसी ने शव पड़ा होने की सूचना पुलिस को दी। जिसके बाद परिजनों ने मौके पर पहुंचकर मृतका की पहचान मनीषा के रूप में कर दी। गला कटा हुआ था। चेहरा भी पहचान में नहीं आ रहा था वहीं दोनों आंखे भी गायब थी। महिला की पूरी गर्दन ही धड़ से अलग थी, मात्र पांच इंच ही गर्दन धड़ से जुड़ी थी। कपड़े भी फटे थे। वहीं वारदात स्थल के पास ही मनीषा का दुपट्टा और जूती भी पड़ी थी।

    मनीषा के शव के बाद की कार्रवाई

    14 अगस्त को मनीषा के परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद एक कमेटी का गठन किया गया और भिवानी जिले की कई मंडियां इस हत्या के विरोध में बंद हुई। पुलिस पर भी कई तरह के आरोप लगे और इसके बाद 15 अगस्त को मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कार्रवाई करते हुए एसपी का तबादला कर दिया और चार पुलिस वालों को दिन में एक इंस्पेक्टर भी शामिल थे सस्पेंड कर दिया। एक एसपीओ को बर्खास्त कर दिया गया। लेकिन इसके बावजूद अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पुलिस ने हालांकि सुसाइड थ्योरी पर काम भी किया है लेकिन इसके बावजूद जांच जारी होने की बात कही जा रही है।