हरियाणा में कांग्रेस की गुटबाजी कोई नई बात नहीं है। रणदीप सुरजेवाला और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गुट आमने-सामने होते रहे हैं मंगलवार को हरियाणा विधानसभा में उस समय भूपेंद्र सिंह हुड्डा और रणदीप सुरजेवाला के बेटे आमने-सामने हो गए जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस द्वारा दिए गए काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा की मांग कर रहे थे और रणदीप सुरजेवाला के बेटे आदित्य सुरजेवाला ने किसानों का मामला विधानसभा में उठा दिया।
हरियाणा विधानसभा में कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने किसानों की समस्याओं पर भाजपा सरकार से सवाल किए। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं और फसल नुकसान से प्रभावित किसानों के लिए त्वरित कार्रवाई और मुआवजे की मांग की। सुरजेवाला ने कहा कि क्विक रिस्पॉन्स टीम अभी तक नहीं बनाई गई और मुआवजे की घोषणा नहीं हुई।
उन्होंने पूछा कि क्या अगले 15 दिनों में यह टीम गठित होगी और प्रभावित किसानों को तुरंत राहत मिलेगी। उन्होंने मुआवजे के वितरण की समय-सीमा और दोबारा बुआई की लागत के बारे में स्पष्ट जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि धान की कई किस्मों का संक्रमण 80-90 प्रतिशत तक है।

उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि क्या इन किस्मों के प्रतिरोधी संस्करण विकसित करने के लिए अनुसंधान को समर्थन दिया जा रहा है और किसानों को बीज सब्सिडी, मूल्य गारंटी और तकनीकी सहायता कब तक मिलेगी। सुरजेवाला ने मुआवजे के मुद्दे पर कहा कि यदि फसल नुकसान का डेटा मौजूद है, तो प्रभावित किसानों को मुआवजा क्यों नहीं दिया जा रहा? उन्होंने जोर देकर कहा कि कुछ गांवों में भारी नुकसान हुआ है और वहां के किसानों को न्याय और मुआवजा मिलना चाहिए।
जब आदित्य सुरजेवाला ने प्रश्न पूछा तो भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा की मांग की। हालांकि आदित्य और भूपेंद्र हुड्डा के बीच कोई विवाद तो नहीं हुआ लेकिन दोनों ने एक दूसरे से खुद को ऊपर साबित करने का प्रयास जरूर किया। इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष ने यह कहकर भूपेंद्र सिंह हुड्डा को चुप करवाया कि काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा विधायी कार्यों के बाद होगी।
राजनीतिक गलियारों में इस घटना की चर्चा है क्योंकि वर्तमान में कांग्रेस के सभी विधायक बराबर की हैसियत रखते हैं और कोई भी कांग्रेस का नेता अभी नहीं चुना गया है। अपने ही दल के विधायक के प्रश्न पर इस प्रकार से भूपेंद्र सिंह हुड्डा का उठकर खड़ा होना और पहले अपने प्रस्तावों पर चर्चा की मांग करना कांग्रेस की गुटबाजी का सीधा-सीधा संकेत माना जाता है।


