Haryana News: भीवानी जिले के सागवान इलाके के डांग गांव में भीवानी-घग्गर नाले के टूट जाने से गांव की स्थिति दयनीय हो गई है। गांव में जलभराव के कारण बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। किसानों ने प्रशासन से जल निकासी कराने, मुआवजा पोर्टल खोलने, विशेष गिरदावरी कराने और एक लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की है। इसके साथ ही पीने के पानी, पशु चारा, मकानों को हुए नुकसान का मुआवजा और प्रभावित मजदूरों के लिए भी सहायता की अपील की गई है।
किसानों की मांग और समस्या
किसान नेता कॉमरेड ओमप्रकाश ने बताया कि गांव की 2500 एकड़ जमीन जलमग्न हो गई है। खरीफ की फसल पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है और रबी की फसल भी प्रभावित होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि बापोड़रा बलियाली रोड पर निकटवर्ती निगाना फीडर डैम पर दो बड़े मोटर लगाकर पानी को उठाना चाहिए। इस से ही सागवान डांग की ओर पानी का रुख रोका जा सकेगा। सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी ने भिकाल गांव के अधिकारियों को पानी निकालने के लिए आदेश दिए हैं, लेकिन जल निकासी की प्रक्रिया धीमी चल रही है।

गांव में हुए नुकसान और हालात
डांग गांव में नाले का पानी गांव के कई महत्वपूर्ण स्थानों में घुस गया है। यहां के पंचायत भवन, शवदाह स्थल, आंगनवाड़ी केंद्र, सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और जल कार्य आदि तीन से चार फीट पानी से भर गए हैं। तेज बहाव के कारण कुछ मकानों में पानी घुस गया है। ग्रामीणों ने अपने घरों के आस-पास बैरिकेड लगाकर पानी को रोकने की कोशिश की है, लेकिन अभी भी भीवानी-घग्गर का पानी गांव की ओर बढ़ रहा है। डांग कलां और सागवान पंचायत मिलकर आपसी सहमति से पानी को रोकने के प्रयास कर रही हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे के कदम
सिंचाई मंत्री ने जल निकासी के लिए अधिकारियों को कड़ी हिदायत दी है और उन्हें कहा है कि तुरंत कार्यवाही करें। फिलहाल पानी निकालने के लिए पाइप मोटर लगाकर पानी को तोशाम की ओर छोड़ा जा रहा है। प्रशासन प्रभावित किसानों और ग्रामीणों की सहायता के लिए मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है। वहीं, ग्रामीण भी पानी की निकासी में तेजी लाने और बचाव कार्यों में प्रशासन का सहयोग करने को तत्पर हैं।
किसानों की आपदा में मदद की अपील
ग्रामीण और किसान प्रशासन से तत्काल राहत और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द गिरदावरी कराकर वास्तविक नुकसान का आकलन करे और उचित मुआवजा प्रदान करे। साथ ही पीने के पानी और पशु चारे की व्यवस्था की जाए ताकि लोगों को और नुकसान न हो। किसानों का कहना है कि यदि स्थिति ऐसी ही रही तो उनकी सारी फसल बर्बाद हो जाएगी और उनका जीवन बहुत प्रभावित होगा। इसलिए प्रशासन से उम्मीद जताई जा रही है कि वे इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र समाधान निकालेंगे।
