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  • Manesar Municipal Corporation Election: मेयर चुनाव में मिली हार का बदला चुकाने के लिए राव नरबीर कुछ भी करने को तैयार!  सियासी घमासान में फंसी भाजपा की अंदरूनी जंग

    Manesar Municipal Corporation Election: मेयर चुनाव में मिली हार का बदला चुकाने के लिए राव नरबीर कुछ भी करने को तैयार! सियासी घमासान में फंसी भाजपा की अंदरूनी जंग

    Manesar Municipal Corporation Election: गुरुग्राम के मानेसर नगर निगम में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव 5 अगस्त को होना है। तीन दिन बाद होने वाले चुनाव के लिए मानेसर निगम कमिश्नर आयुष सिन्हा इस संबंध में आदेश जारी कर चुके हैं। आज और कल को चुनाव की तैयारी की जाएगी। इसलिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के हेडक्वार्टर छोड़ने पर रोक लगा दी गई है। मानेसर नगर निगम के कमिश्नर आयुष सिन्हा ने इसकी पुष्टि की। अधिकारियों ने तैयारी शुरू कर दी है। चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराए जाएंगे।

    सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव को लेकर भाजपा में भी बड़ा सियासी खेल शुरू हो गया है। यहां से 12 पार्षदों को नेपाल के काठमांडू भेज दिया गया है। इनके साथ भाजपा का एक रणनीतिकार भी है। माना जा रहा है कि इसके पीछे केंद्रीय राज्यमंत्री और गुरुग्राम से सांसद राव इंद्रजीत को झटका देने की कोशिश की जा रही है। पार्षदों को काठमांडू भेजने के पीछे प्रदेश की भाजपा सरकार के ही मंत्री राव नरबीर को माना जा रहा है। हालांकि इस मामले में कोई खुलकर कुछ नहीं कह रहा है।

    इसी साल मार्च महीने में प्रदेश में 10 नगर निगमों के मेयर और पार्षदों का चुनाव हुआ था। भाजपा ने 9 निगमों में मेयर का चुनाव जीता लेकिन मानेसर नगर निगम के पहले ही चुनाव में हार गई। यहां से निर्दलीय डॉ. इंद्रजीत कौर मेयर चुन ली गईं। उन्होंने चुनाव में खुलकर कहा कि वह केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत की करीबी हैं।

    Manesar Municipal Corporation Election: मेयर चुनाव में मिली हार का बदला चुकाने के लिए राव नरबीर कुछ भी करने को तैयार!  सियासी घमासान में फंसी भाजपा की अंदरूनी जंग

    20 पार्षद वाले इस निगम में भाजपा के 7 पार्षद जीते थे। मानेसर निगम से मेयर चुनाव हारने का सबसे बड़ा झटका प्रदेश सरकार में मंत्री राव नरबीर को लगा। उन्होंने भाजपा के मेयर उम्मीदवार सुंदर लाल के लिए खूब प्रचार भी किया था। हालांकि मेयर पद गंवाने के बाद नरबीर ने सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद पर अपने समर्थक पार्षदों को बिठाने की रणनीति तेज कर दी। चुनाव के बाद उन्होंने 7 निर्दलीय पार्षदों को अपने साथ मिला लिया। जिसके बाद भाजपा के पास 20 में से 14 पार्षदों का समर्थन हो गया।

    राव नरबीर के इस दांव को देखकर राव इंद्रजीत का खेमा भी एक्टिव हो गया। उन्होंने पार्षदों को राव इंद्रजीत के प्रभाव से बचाने के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी। इसके बाद पिछले महीने 12 पार्षदों को गुवाहाटी और गोवा की सैर कराई। हालांकि पार्षदों का कहना था कि वह अपने मर्जी से घूमने गए हैं। जब वे वापस लौटे तो राव इंद्रजीत खेमा फिर उनसे संपर्क करने लगा। जिसके बाद उन्हें नेपाल भेज दिया गया। राव नरबीर खेमे का दावा है कि 14 पार्षद साथ होने के बाद 2 और पार्षद उनके संपर्क में हैं। उनके लिए भी काठमांडू जाने की एयर टिकट बुक कराई जा रही है। माना जा रहा है कि राव नरबीर चाहते हैं कि सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के जरिए वह निगम में दबदबा बनाए रखें।

    8 जुलाई को मानेसर की मेयर इंद्रजीत यादव का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वो हयातपुर में भरी पंचायत में फूट-फूट कर रो रहीं थी। उन्होंने मंत्री राव नरबीर पर गंभीर आरोप लगाए थे। मेयर ने आरोप लगाया कि मारपीट की एक एफआईआर में जानबूझ उनके पति राकेश यादव का नाम लिखवा दिया, जबकि वो मौके पर मौजूद भी नहीं थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार के दबाव में पुलिस उनके पति को परेशान कर रही है।

    राव इंद्रजीत और राव नरबीर, दोनों अहीरवाल क्षेत्र के बड़े नेता हैं। नरबीर को राव इंद्रजीत का धुर विरोधी माना जाता है। 2019 के विधानसभा चुनाव में राव नरबीर की टिकट भी कट गई थी। जिसके पीछे राव इंद्रजीत को ही माना गया। हालांकि 2024 के चुनाव में राव नरबीर सीधे दिल्ली गए और अमित शाह से मिलकर टिकट ले आए। इसके बाद बादशाहपुर से चुनाव जीते।

    भाजपा ने अहीरवाल बेल्ट में पावर बैलेंस रखने के लिए नरबीर को मंत्री भी बना दिया। वहीं राव इंद्रजीत का अहीरवाल में दबदबा है। वह गुरुग्राम से 6 बार सांसद हैं। पार्टी बदलने के बावजूद वह चुनाव जीतते आ रहे हैं। इसके अलावा वह लगातार केंद्र की मोदी सरकार में तीसरी बार केंद्रीय राज्य मंत्री बने हैं।