Tag: women protection india

  • Haryana: देश में एक लाख महिलाओं में 66 महिला है पीड़ित, लेकिन हरियाणा में यह संख्या बढ़कर 110! क्या राज्य बन गया महिलाओं के लिए खतरे का मैदान?

    Haryana: देश में एक लाख महिलाओं में 66 महिला है पीड़ित, लेकिन हरियाणा में यह संख्या बढ़कर 110! क्या राज्य बन गया महिलाओं के लिए खतरे का मैदान?

    Haryana में महिलाओं की स्थिति अपराध का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। NCRB की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि प्रदेश में एक लाख महिलाओं में से 110.3 महिलाएं पीड़ित हो रही हैं जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह दर 66.2 है।

    2023 में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के 4,48,211 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2022 में 4,45,256 और 2021 में 4,28,278 मामले दर्ज हुए थे। 2023 में सबसे अधिक अपराध पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता (1.33 लाख मामले, 29.8 प्रतिशत) के थे। इसके बाद महिलाओं के अपहरण (88,605 मामले, 19.8 प्रतिशत) और शीलभंग करने के इरादे से हमले (83,891 मामले, 18.7 प्रतिशत) के थे। हालांकि, महिलाओं के विरुद्ध अपराध की दर लगभग अपरिवर्तित (66.2 प्रति लाख) रही।

    राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट-2023 के अनुसार अपराध दर प्रति लाख महिला जनसंख्या आधार पर हरियाणा 110.3 के साथ चौथे स्थान पर आ गया है। इसमें सबसे ऊपर तेलंगाना 124.9, दूसरे स्थान पर राजस्थान 114.8 और तीसरे स्थान पर ओडिशा 112.4 है। हालांकि प्रदेश में महिलाओं के प्रति अपराध की संख्या में तीन वर्षों में कमी भी दर्ज हुई है। 2022 में 16658 अपराध, 2022 में 16743 और 2023 में 15758 आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं। इसमें राष्ट्रीय दर 66.2 प्रतिशत है।

    Haryana: देश में एक लाख महिलाओं में 66 महिला है पीड़ित, लेकिन हरियाणा में यह संख्या बढ़कर 110! क्या राज्य बन गया महिलाओं के लिए खतरे का मैदान?

    NCRB के आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के खिलाफ होने वाले आपराधिक मामलों में चार्जशीट के रिकॉर्ड में हरियाणा में दर 56 फीसदी रही है जो देश में राजस्थान (53.6 फीसदी) के बाद सबसे कम है। पहले स्थान पर मिजोरम 97.8 फीसदी, दूसरे पर आंध्र प्रदेश 95.2, तीसरे पर बंगाल 93.8, चौथे पर केरल 93.7 और पांचवें पर तमिलनाडु 91 फीसदी है।

    60 फीसदी दुष्कर्म के मामले 18 से 30 साल की महिलाओं के साथ

    2023 में हरियाणा में कुल 1772 दुष्कर्म की घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें 18 से 30 की उम्र की 1105 पीड़िताएं शामिल थीं। 30 से 45 साल की 606 महिलाओं ने शिकायत दर्ज कराई थी और 60 साल से ऊपर की छह महिलाओं का यौन शोषण किया गया। NCRB की रिपोर्ट के अनुसार देशभर में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 448211 मामले दर्ज हुए हैं।

  • NARI 2025 report: दो तिहाई महिलाएं नहीं करवाती अपने उत्पीड़न की शिकायत दर्ज, पड़ोस, जान पहचान और सार्वजनिक परिवहन उत्पीड़न की सबसे बड़ी वजह

    NARI 2025 report: दो तिहाई महिलाएं नहीं करवाती अपने उत्पीड़न की शिकायत दर्ज, पड़ोस, जान पहचान और सार्वजनिक परिवहन उत्पीड़न की सबसे बड़ी वजह

    NARI 2025 report: देश में महिला सुरक्षा को लेकर NARI की 2025 की रिपोर्ट में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर तीन में से दो महिलाएं अपने उत्पीड़न की शिकायत कहीं भी दर्ज नहीं करवाती। केवल एक तिहाई महिलाएं ही उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने का काम करती हैं।

    देश के शहरी क्षेत्रों में 40 प्रतिशत महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करती है। यह रिपोर्ट 31 शहरों की 12770 महिलाओं की राय पर आधारित है।

    NARI 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में 7 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि उन्हें सार्वजनिक जगहों पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। वहीं 18-24 साल की युवतियों को सुरक्षा के लिहाज से सबसे अधिक खलता था। यह राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के नवीनतम 2022 के आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के दर्ज मामलों का 100 गुना है।

    बता दें कि महिलाओं के खिलाफ इस उत्पीड़न में घूरना, छेडखानी, अश्लील टिप्पणी और सड़कों पर छूना शामिल था। इसके लिए उन्होंने अपर्याप्त बुनियादी ढांचे, खराब रोशनी और अकुशल सार्वजनिक परिवहन को ज़िम्मेदार ठहराया।

    पूर्वोत्तर में ज्यादा ‘सेफ सिटी’

    सबसे सुरक्षित : कोहिमा, विशाखापट्टनम, भुवनेश्वर, आइजोल, गंगटोक, ईटानगर, मुंबई
    सबसे असुरक्षित : पटना, जयपुर, फरीदाबाद, दिल्ली, कोलकाता, श्रीनगर, रांची

    NARI 2025 report: दो तिहाई महिलाएं नहीं करवाती अपने उत्पीड़न की शिकायत दर्ज, पड़ोस, जान पहचान और सार्वजनिक परिवहन उत्पीड़न की सबसे बड़ी वजह

    22 प्रतिशत महिलाओं ने अधिकारियों को बताए अनुभव

    रिपोर्ट में कहा गया कि सर्वे में शामिल केवल 22 प्रतिशत महिलाओं ने ही अपने अनुभव अधिकारियों को बताए है। इसके अलावा, 53% महिलाओं को यह भी स्पष्ट नहीं था कि उनके कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम (POSH) नीति है या नहीं, जो कानून द्वारा अनिवार्य है।

    69% महिलाओं ने माना सुरक्षा प्रयास पर्याप्त

    NARI 2025 की रिपोर्ट में बताया गया कि 69 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि मौजूदा सुरक्षा प्रयास कुछ हद तक पर्याप्त हैं, जबकि 30 प्रतिशत से ज़्यादा ने महत्वपूर्ण कमियों या कमियों का ज़िक्र किया। केवल 65 प्रतिशत ने 2023-2024 के दौरान वास्तविक सुधार की उम्मीद जताई।

    हरियाणा पर उंगली

    इस रिपोर्ट में हरियाणा के फरीदाबाद को देश के सबसे सुरक्षित शहरों में गिना गया है। दिल्ली से सटे इस शहर को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा दुनिया का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर माना गया था। स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 में भारत के शीर्ष दस सबसे गंदे शहरों में फरीदाबाद 10वें स्थान पर था। इस रिपोर्ट में फरीदाबाद की असुरक्षित शहरों में गिनती से प्रदेश की बदनामी हुई है। हरियाणा को अब महिला सुरक्षा को लेकर अपने प्रयास और तेज करने होंगे।

    आंकड़ों में असुरक्षा

    -सात प्रतिशत महिलाएं 2024 में सार्वजनिक जगहों पर ’उत्पीडऩ’ का शिकार हुईं।
    -14 प्रतिशत तक रहा 18-24 आयु वर्ग में महिला ’उत्पीडऩ’ का यह आंकड़ा
    -38 प्रतिशत मामलों में महिलाओं का उत्पीड़न पड़ोस में या जान-पहचान में हुआ, 29 प्रतिशत में सार्वजनिक परिवहन में हुआ।
    -3 में से एक पीड़ित महिला ने ही दर्ज करवाई उत्पीड़न की शिकायत।

    क्या बोलीं विजया रहाटकर

    रिपोर्ट पेश करते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि सुरक्षा को केवल कानून-व्यवस्था के मुद्दे के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह महिलाओं के जीवन के हर पहलू को प्रभावित करता है, चाहे वह उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, कार्य के अवसर और आवागमन की स्वतंत्रता हो।