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Haryana

प्रदूषण रहित दीपावली को बढ़ावा दे युवा

सत्यखबर निसिंग (सोहन पोरिया) – दीपावली पर्व पर अक्सर कुछ लोग आतिशबाजी व पटाखों से मनाना अधिक पसंद करते है। जिससे हमारा पर्यावरण प्रदूषित होता है। पटाखों की जहरीली गैस से दमा के रोगियों को सांस लेने में परेशानी होती है। इसके साथ ही पटाखों से अस्वच्छता को बढ़ावा मिलता है। ध्वनि प्रदूषण होने के […]

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सत्यखबर निसिंग (सोहन पोरिया) – दीपावली पर्व पर अक्सर कुछ लोग आतिशबाजी व पटाखों से मनाना अधिक पसंद करते है। जिससे हमारा पर्यावरण प्रदूषित होता है। पटाखों की जहरीली गैस से दमा के रोगियों को सांस लेने में परेशानी होती है। इसके साथ ही पटाखों से अस्वच्छता को बढ़ावा मिलता है। ध्वनि प्रदूषण होने के साथ ही पटाखों की चिंगारी से हादसा होने का भी निरंतर अंदेशा रहता है। खासकर बच्चों के चोटिल होने का अधिक डर रहता है। दीपावली पर्व दीपों का त्यौहार है। हमें पारंपरिक तरीके से अधिक से अधिक दीप जलाकर पर्व मनाना चाहिए। एक दूसरे को खुशियां बांटने के साथ ही घरों को जगमग करना चाहिए। आईये जानते है कि बुद्धिजीवियों के अनुसार दिपावली कैसे मनाए।

पारंपरिक तरीके से मनाए दीपावली
मंजूरा निवासी समाजसेवी कृष्ण कुमार के अनुसार दीपावली को पारंपरिक तरीके से मनाना चाहिए। पर्व पर मिट्टी के दीप जलाने चाहिए। जिससे देश का पैसा देश में रहेगा। वहीं किसी गरीब परिवार का सामान बिकने से उनके घर में भी खुशियों की दीपावली मनेगी। तेल के दीपक जलाने से देवता भी प्रसन्न होते है।

दीपावली खुशियां बाटने का पर्व
कर्मचंद बरास के अनुसार दीपावली पर्व आपसी गिले शिकवे भूलकर एक दूसरे को मिठाईयों के रूप में प्यार बांटने का पर्व है। हमें सामूहिक रूप से एकत्रित होकर अपने परिवार के साथ पर्व पर्व मनाते हुए शुशियां साझ़ी करनी चाहिए। वहीं एक दूसरे को पर्व की बधाई देनी चाहिए। घरों को सुंदर ढ़ंग से सजाना चाहिए।

देव पूजा का पर्व दीपावली
सरपंच बस्तली प्रदीप कुमार के अनुसार दीपावली पर्व पर हमें स्मयक कर्म करने चाहिए। शुद्ध मन, कर्म व वचन से देव अर्चना करनी चाहिए। यही पूर्वजों द्वारा विरासत में दी गई प्राचीन परंपरा है। पर्व पर हमें गणेश, महालक्षी व अपने पूर्वजों की भक्तिभाव से आराधना करनी चाहिए।

पर्यावरण का ध्यान रखना चाहिए
समाजसेवी रमेश चंद के अनुसार दीपावली पर हमें सावधानी पूर्वक कम से कम पटाखे बजाने चाहिए। ताकिे पर्यावरण प्रदूषित न हो। पटाखों से निकलने वाला धुआं सांस के रोगियों के लिए घातक है। पटाखों से छोटे बच्चें को भी परेशानी होती है। हमें पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के प्रयास करने चाहिए।

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