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Chandigarh

सफीदों पालिका के  भ्रष्टाचार के खिलाफ महाराजा अग्रसैन चौंक पर आमरण अनशन दूसरे दिन भी जारी

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अनशन को बाल्मीकि समाज के लोगों ने दिया अपना समर्थन
डाक्टरों ने जांचा अनशनकारी रामदास प्रजापत का स्वास्थ्य
सत्य खबर सफीदों, महाबीर मित्तल: पालिका के भ्रष्टाचार को लेकर नगर के महाराजा अग्रसैन चौंक पर समाजसेवी एवं भाजपा नेता रामदास प्रजापत का आमरण अनशन दूसरे दिन भी लगातार जारी रहा। उनके अनशन में समाजसेवी प्रवीन बंसल, आरटीआई कार्यकत्र्ता प्रदीप गर्ग व वरिष्ठ भाजपा नेता सोमदत्त शर्मा भी सहयोगी के रूप में उपस्थित रहे। वहीं अनशन पर नगर के वार्ड नंबर 3 के निवासी बाल्मीकि समाज के लोगों ने पहुंचकर अपना समर्थन दिया। अनशन पर नागरिक अस्पताल के स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रदीप के नेतृत्व में एक टीम पहुंची और अनशनकारी रामदास प्रजापत का स्वास्थ्य जांचा। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रामदास प्रजापत का बीपी, शुगर व धड़कन समेत अनेक जांचे की। धरने पर आए बाल्मीकि समाज के लोगों का कहना था कि वे सफीदों शहर के वार्ड 3 के निवासी है और उनके वार्ड की हालात बेहद खस्ता है। वार्ड में गलिया पूरी तरह से टूटी हुई है तथा वार्ड में किसी प्रकार का विकास नहीं हुआ है। श्मशान घाट जाने तक का रास्ता ठीक नहीं है। उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया कि जैसे वो सफीदों के निवासी ही नहीं है। वे इस संबंध में अपने वार्ड पार्षद, पडौस के वार्ड 4 के पार्षद, पालिकाध्यक्ष व पालिका सचिव से कई बार मिले लेकिन समस्या को कोई समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बाल्मीकि समाज समाजसेवी रामदास प्रजापत के आमरण अनशन के साथ है।

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अपने संबोधन में रामदास प्रजापत ने कहा कि मनोहर सरकार ने सफीदों के विकास में चार चांद लगाने के लिए यहां 35 करोड़ रूपए की ग्रांट प्रदान की। विकास के इतनी भारी-भरकम राशी सफीदों के इतिहास में कभी भी नहीं आई लेकिन इतनी बड़ी राशी को देखकर पालिका से जुड़े लोगों, अफसरों व कर्मचारियों की आंखे चुंदिया गई और उनके द्वारा इस राशी को हजम करने के लिए साजिशें रची गई। अधिकारी विकास के लिए आया काफी पैसा हजम कर गए। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल, निकाय मंत्री अनिल विज, सीएम विंडों, उपायुक्त जींद व एसडीएम को ज्ञापन व शिकायतें दी लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। थक-हारकर उन्होंने यह आमरण अनशन करने का फैसला लिया है। उन्होंने साफ किया कि तब तक सफीदों पालिका घोटाले की एसआईटी जांच नहीं हो जाती और दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो जाती तब तक वे अनशन से उठने वाले नहीं हैं।

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