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Haryana

स्टांप शुल्क में वृद्धि वापस ले सरकार : सुरजेवाला

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सत्यखबर

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा सरकार द्वारा स्टांप ड्यूटी रुरल (ग्रामीण) एरिया में दो प्रतिशत की भारी वृद्धि के फैसले की कड़ी निंदा करते हुए इस जनविरोधी फैसले को तुरंत प्रभाव से वापिस लेने की मांग की है।

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सुरजेवाला ने कहा कि यह सरकार केवल जनता पर बोझ डालना जानती है और इस इस फ़ैसले से ग्रामीण इलाक़ों में रजिस्ट्री कराना महंगा हो जाएगा। अभी तक रुरल एरिया में अगर किसी महिला के नाम रजिस्ट्री होती थी तो उसे केवल 3 प्रतिशत ही स्टांप ड्यूटी देनी होती थी, लेकिन अब इसे 66 प्रतिशत ज़्यादा यानि 5 प्रतिशत कर दिया गया है। इसी प्रकार यदि कोई पुरुष रजिस्ट्री कराता है तो उसे 5 प्रतिशत की बजाए 40 प्रतिशत ज़्यादा यानि 7 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी देनी होगी। इसका सीधा मतलब है कि अब रजिस्ट्री कराने पर ज्यादा राजस्व स्टांप ड्यूटी के तौर पर सरकार को देना होगी।

सुरजेवाला ने कहा कि अचल संपत्तियों के कुछ हस्तांतरणों पर मिलने वाली छूट भी अब रोक दी गई है और उन पर भी अब यही स्टांप ड्यूटी लगेगी। सबसे हैरत की बात है कि सरकार ने बजट का भी इंतज़ार नहीं किया और यह फ़ैसला बजट से एकदम पहले लिया है।

सुरजेवाला ने कहा कि खट्टर-चौटाला सरकार पहले ही नित रोज बढ़ रही महंगाई की मार झेल रही आम जनता की ऐसे फैसले लेकर एक प्रकार से कमर तोडऩे का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के यह फैसले बताते हैं कि यह सरकार किस तरह से आम आदमी की जेब हल्की करने का निरंतर प्रयास कर रही है।

सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा ने पिछले सात साल में जनता पर लगातार आर्थिक बोझ डाला है। जब हरियाणा प्रदेश में कांग्रेस ने 2014 में सरकार छोड़ी, तो पेट्रोल पर वैट 21 प्रतिशत था जिसे भाजपा सरकार में बढ़कर 30 प्रतिशत यानि आज के मूल्य पर 18 रुपए हो गया है। डीज़ल पर वैट 9.24 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 21.40 प्रतिशत यानि आज के मूल्य पर 12 रुपए हो गया है, जिसका मतलब है कि खट्टर सरकार ने आज के पेट्रोल के मूल्य पर लगभग 6 रुपए और डीज़ल पर 7 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए, जिससे सरकार ने पचास हज़ार करोड़ से ज्यादा वसूले हैं। इन्हीं कारणों से आज कच्चे तेल के सस्ते दामों के बावजूद पेट्रोल व डीजल के दाम प्रदेश में आसमान छू रहे हैं, लेकिन खट्टर सरकार उस बढ़ोतरी को वापस लेने के बजाय जनता पर अतिरिक्त बोझ लादती जा रही है।