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स्वामी विवेकानन्द के जीवन से प्रेरणा ले नई पीढ़ी  : प्रो. चौहान

असन्ध : रोहताश वर्मा अमेरिका के शिकागो शहर में 125 साल पहले 11 सितंबर के दिन विश्व धर्म संसद में अपने जादुई संबोधन के द्वारा भारतीय संस्कृति का परचम लहराने वाले स्वामी विवेकानंद भारत की नई पीढ़ी के आदर्श हैं। उनके विचारों ने जैसे स्वाधीनता संग्राम में शामिल युवाओं को प्रेरणा और ऊर्जा दी ठीक […]

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असन्ध : रोहताश वर्मा
अमेरिका के शिकागो शहर में 125 साल पहले 11 सितंबर के दिन विश्व धर्म संसद में अपने जादुई संबोधन के द्वारा भारतीय संस्कृति का परचम लहराने वाले स्वामी विवेकानंद भारत की नई पीढ़ी के आदर्श हैं। उनके विचारों ने जैसे स्वाधीनता संग्राम में शामिल युवाओं को प्रेरणा और ऊर्जा दी ठीक वैसे ही ऊर्जा और दिशा नवीन भारत निर्माण के कार्य में जुटी वर्तमान पीढ़ी को दे रहे हैं। हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष और निदेशक प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह चौहान ने स्थानीय एम एम पब्लिक स्कूल में आयोजित नवीन भारत शिक्षा संवाद में यह टिप्पणी की। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के संचालक एवं प्राचार्य आरवी भारद्वाज ने की। मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल के सदस्य डॉक्टर बूटी राम और असन्ध नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि थे।
प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के शिकागो उद्बोधन के सवा सौ साल पूरे होने पर भारत की नई पीढ़ी को एक बार पुनः नए सिरे से स्वामी जी के उस उद्बोधन और समूचे जीवन दर्शन को पढ़ना और समझना चाहिए। हरियाणा ग्रंथ अकादमी द्वारा इस सिलसिले में विद्यालयों और महाविद्यालयों में विचार प्रबोधन का सिलसिला प्रारंभ किया हुआ है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति  जो कि प्राचीन हिंदू संस्कृति है, विश्व की  सर्वोत्कृष्ट  संस्कृति  और ज्ञान परंपरा है। वसुधैव कुटुंबकम जैसा  अद्भुत विचार  हमारे ही ऋषि मनीषियों  द्वारा  हजारों साल पहले  प्रतिपादित और प्रसारित किया गया था । स्वामी विवेकानंद ने इसी विचार को दुनिया के सामने रखा  और दुनिया उनकी दीवानी हो गई ।
 मुख्य अतिथि  वीरेंद्र सिंह चौहान ने विद्यार्थियों से कहा कि वे स्वाध्यायशील बने और अच्छी किताबों से दोस्ती करें। उन्होंने कहा कि इंसानी दोस्त तो धोखा दे सकता है मगर अच्छी किताब जीवन में हमेशा रास्ता ही दिखाती है।
प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान ने विद्यार्थियों और शिक्षकों का आवाहन कि वे हिंदी और अंग्रेजी सहित अधिक से अधिक भाषाओं में  महारत हासिल करें। उन्होंने कहा कि करियर जिस भी क्षेत्र में बनाना हो ,भाषा पर पकड़ हमेशा मददगार साबित होती है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य आर वी भारद्वाज ने विद्यार्थियों से कहा कि वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें क्योंकि जीवन में सीखने का विद्यालय से बेहतर स्थान कोई नहीं होता। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रेरणा लेने के लिए भी विद्यार्थियों का आवाहन किया।
इस अवसर पर प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान, डॉ बूटी राम और हरि  कृष्ण अरोड़ा ने ‘मेरे सपनों का असंध’  विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में प्रतिभागिता करने वाले एम एम  विद्यालय के छात्र छात्राओं को प्रमाण पत्र भी वितरित किए। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने विद्यालय के सभागार और पुस्तकालय का भी मुआयना किया। इस अवसर पर अरविन्द नारायण, उप प्रधानाचार्य सुरेश कुमार, पी. टी. आई.संजय शास्त्री, विनोद शर्मा आदि का सक्रिय योगदान रहा।
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