ADR Report: हजारों वोट मगर अरबों की आमदनी, छोटे दलों का बड़ा खेल बेनकाब

ADR Report: हजारों वोट मगर अरबों की आमदनी, छोटे दलों का बड़ा खेल बेनकाब

ADR Reportएसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी एडीआर की एक नई रिपोर्ट ने देश की राजनीति से जुड़ी एक बड़ी सच्चाई सामने रखी है। रिपोर्ट के अनुसार जिन राजनीतिक दलों को चुनाव में नाममात्र वोट मिलते हैं उनकी आय में 2022-23 में 223 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ये सभी पार्टियां पंजीकृत तो हैं लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त हैं। देश में कुल 2764 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियां हैं। इनमें से केवल 739 ने ही अपनी वित्तीय जानकारी सार्वजनिक की है। बाकी 2025 पार्टियों ने कोई भी जानकारी नहीं दी है जो इस पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

 सिर्फ वोटों से नहीं आती कमाई

रिपोर्ट में गुजरात की कुछ ऐसी पार्टियों का उदाहरण दिया गया है जिन्हें 5 साल में तीन चुनावों में सिर्फ 22 हजार वोट मिले लेकिन इनकी कमाई 2,316 करोड़ रुपये थी। इनमें से एक पार्टी ने तो एक साल में 1,158 करोड़ रुपये कमाए। इतना पैसा आखिर कहां से आया ये सवाल सबके मन में उठता है। रिपोर्ट में बताया गया कि इन पार्टियों ने दो लोकसभा और एक विधानसभा चुनाव में 17 उम्मीदवार उतारे लेकिन कोई भी चुनाव नहीं जीता। फिर भी करोड़ों की कमाई ने इन पार्टियों की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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 गुजरात में ‘कम वोट ज्यादा चंदा’ का खेल

गुजरात की 5 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों का नाम रिपोर्ट में सामने आया है। भारतीय नेशनल जनता दल को सिर्फ 11,496 वोट मिले लेकिन चंदे के रूप में 957 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी को 9,029 वोट और 608 करोड़ रुपये चंदा मिला। सत्यवादी रक्षक पार्टी को 1,042 वोट पर 416 करोड़ रुपये मिले। जन मन पार्टी को 480 वोट और 134 करोड़ की आमदनी हुई जबकि सौराष्ट्र जनता पार्टी को महज 140 वोटों पर 200 करोड़ रुपये का चंदा मिला। इस खेल ने राजनीति के वित्तीय पक्ष की गहराई से जांच की मांग तेज कर दी है।

हरियाणा की भी स्थिति चिंताजनक

अगर बात हरियाणा की करें तो यहां कुल 102 पंजीकृत राजनीतिक पार्टियां हैं। इनमें से 77 पार्टियों ने अपनी कोई भी वित्तीय जानकारी नहीं दी है। यानी लगभग 75 प्रतिशत पार्टियों का लेखा-जोखा सार्वजनिक नहीं है। इससे यह शक और भी गहरा हो जाता है कि कहीं इन पार्टियों का इस्तेमाल काले धन को सफेद करने के लिए तो नहीं किया जा रहा। एडीआर की रिपोर्ट इसी दिशा में इशारा करती है और सरकार से पारदर्शिता की मांग भी करती है।

एडीआर का काम और उद्देश्य

एडीआर यानी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स एक गैर सरकारी संगठन है जो 1999 में आईआईएम अहमदाबाद के प्रोफेसरों और पूर्व छात्रों द्वारा शुरू किया गया था। इसका मकसद राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है। यह संगठन नेताओं और पार्टियों के आपराधिक रिकॉर्ड, आय-व्यय और पृष्ठभूमि से संबंधित आंकड़े एकत्र करता है और उन्हें जनता के सामने लाता है। इस रिपोर्ट से एक बार फिर साफ हो गया है कि भारतीय राजनीति को शुद्ध करने के लिए सिर्फ वोट नहीं बल्कि सजग निगरानी भी जरूरी है।

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