Mohan Bhagwat: देश में महंगी शिक्षा व स्वास्थ्य प्रणाली किसी से छिपी नहीं है। सरकारी तौर पर बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है और प्राईवेट संस्थानों में ये दोनों सेवाएं काफी महंगी है। आम आदमी इनको चाहकर भी प्राप्त नहीं कर सकता।
राजकीय स्कूलों में कहीं कमरें नहीं है, कहीं पेयजल नहीं है, कही मैदान नहीं है तो कहीं किताबें नहीं हैं। ठीक इसी प्रकार से स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों, दवाओं और मशीनरी का भारी टोटा है। मजबूरन आदमी प्राईवेट स्कूलों, शिक्षण संस्थानों व अस्पतालों में रूख करता है लेकिन यह भी हर इंसान के बूते की बात नहीं है। गरीब आदमी तो जैसी-तैसी व्यवस्थाएं हैं, उसी के सहारे पर है।

इसी को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इंदौर (मध्यप्रदेश) में गहरी चिंता प्रकट की है। मोहन भागवत ने कहा कि पहले यह सेवा था, लेकिन आज कर्मिशयल कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व स्वास्थ्य के व्यावसायीकरण बढ़ गया है और ये सेवाएं अब आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई हैं।
मोहन भागवत ने कहा, स्वास्थ्य और शिक्षा आज के इस समय में दो ऐसे विषय है, जो समाज के लिए सबसे जरूरी हैं। मनुष्य को ज्ञान के लिए शिक्षा अत्यंत आवश्यक है, इसके लिए वह सारी सीमाएं लांघकर अपना बेच देगा ताकि उसके बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सकें। गौरतलब है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत अपनी हर बात खुलकर रखते हैं। उनके द्वारा रखी जाने वाली बातों को लेकर संघ व भाजपा के रिश्तों में कई बार तलखी भी देखी जाती है। अब इस ब्यान के बाद दोनों के रिश्तों को लेकर फिर से चर्चाएं तेज हो गई है।
ब्यूरो रिपोर्ट सत्यखबर

Leave a Reply