Haryana: आजादी के आंदोलन में 15 फीसद से ज्यादा भागीदारी रही है हरियाणा की, हरियाणा की माटी से आती है वीरता की खुशबू

Haryana: आजादी के आंदोलन में 15 फीसद से ज्यादा भागीदारी रही है हरियाणा की, हरियाणा की माटी से आती है वीरता की खुशबू

Haryana: कहते हैं किसी भी जगह की माटी में एक अलग खुशबू होती है। किसी की माटी में व्यापार होता है तो किसी की माटी में जंग। किसी की माटी में गद्दारी होती है तो किसी की माटी में खुद्दारी। आज जब हम आधुनिक हरियाणा की बात करते हैं तो देश की सीमा पर लड़ने वाले जवानों में हरियाणा की एक बड़ी भूमिका रहती है। लड़ाई चाहे कोई सी हो 1965 की या 1971 की कारगिल की लड़ाई या कोई और हर लड़ाई में हरियाणा के जवानों ने अपना बलिदान दिया है।

अब बात अगर हम आजादी के आंदोलन की करें तो आज देश की दो प्रतिशत आबादी वाले हरियाणा देश की सेना में 10% अपनी भागीदारी रखता है। लेकिन आजादी के आंदोलन में इस छोटे से हरियाणा की भागीदारी 15 प्रतिशत दर्ज की गई है। अंग्रेजों का रिकार्ड बताता है कि 1857 में एक लाख 82 हजार लोगों ने पूरे देश में शहादत दी, जिसमें से करीब साढ़े 24 हजार हरियाणा के थे। कुछ और रिकॉर्ड खंगालने पर एक जगह पता चला कि 1857 से 1947 में देश के आजाद होने तक 6 लाख लोग शहीद हुए और उनमें से हरियाणा से शहीदों की संख्या 80 हजार थी। एक आंकड़े में करीब 7 लाख 42 हजार लोगों की शहादत की बात कही गई है इस आंकड़े में करीब सवा लाख लोग हरियाणा के बताए गए हैं।

हरियाणा की माटी के जर्रे जर्रे से वीरता की खुशबू आती है। धरती का सीना चीरकर अनाज पैदा करने वाला किसान दुश्मन का सीना भी चीर सकता है, इस बात को उसने समय-समय पर जाहिर किया है।

Haryana: आजादी के आंदोलन में 15 फीसद से ज्यादा भागीदारी रही है हरियाणा की, हरियाणा की माटी से आती है वीरता की खुशबू

असल में हरियाणा की माटी में कुछ तो है, तभी तो भगवान कृष्ण ने भी महाभारत के युद्ध के लिए हरियाणा का चयन किया। यहीं के कुरुक्षेत्र में गीता का ज्ञान दिया और पूरी लड़ाई जींद, कैथल, कुरुक्षेत्र और पानीपत के इलाके में लड़ी गई। यही लड़ाई अगर किसी और धरती पर होती तो उसका अंजाम क्या होता यह कहना तो मुश्किल है लेकिन हरियाणा के लोग न्याय और अन्याय में फर्क करना जानते हैं। यहां के लोग सत्य का साथ देना पसंद करते हैं। यहां के लोगों के लिए उनकी जमीन उनकी मां के समान है ऐसे में देश की सीमा की रक्षा करने में जिस प्रकार वह आज आगे हैं उसी प्रकार से उन्होंने देश की आजादी की लड़ाई में भी भाग लिया।

हरियाणा के पुरुषों ही नहीं बल्कि महिलाओं ने भी आजादी की लड़ाई में अपना खूब योगदान दिया है। आजादी के आंदोलन से जुड़े ग्रंथों में एक महिला का जिक्र आता है। इस महिला का असली नाम तो नहीं पता चल पा रहा है लेकिन बताया गया है की बदली के मोर्चे पर लड़ने वाली अंबाला की एक महिला ऐसी थी कि अंग्रेजों ने डर के मारे उसका नाम जॉन ऑफ आर्क रख दिया। बाद में उसे अंबाला में ही फांसी देती है। जब हमने जॉन ऑफ आर्क का अर्थ जानना चाहा तो पता चला कि “जोन ऑफ आर्क” एक फ्रांसीसी नायिका और सैन्य नेता थीं। उन्हें 15वीं शताब्दी में सैकड़ों साल के युद्ध के दौरान फ्रांसीसी प्रतिरोध को संगठित करने और राजा चार्ल्स अष्टम को ताज पहनाने में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है। बाद में उन पर विधर्म का आरोप लगाया गया और उन्हें जिंदा जला दिया गया। कह सकते हैं कि जोन ऑफ अर्क एक वीरता का नाम है।

लाला लाजपत राय की डायरी के हिस्से बताते हैं कि सुभाष चंद्र बोस ने जब आजाद हिंद फौज बनाई तो उन्हें जो समर्थन हरियाणा के हिसार और रोहतक में मिला वह पूरे देश में कहीं से नहीं। मैं केवल आजाद हिंद फौज बल्कि महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के दौरान दो बार भिवानी आना अपने आप में इस बात को उजागर करता है कि उन्हें हरियाणा से काफी समर्थन मिल रहा था। महात्मा गांधी की दांडी यात्रा में भी हरियाणा से 78 लोग शामिल हुए थे जिसमें सूरजभान और प्यारेलाल के नाम प्रमुख हैं।

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