Faridabad News: ओवरलोडिंग पर प्रशासन के दावे फेल, सड़कों पर मंडरा रहा खतरा

Faridabad News: प्रशासन ओवरलोडिंग के खिलाफ अभियान चलाने के कितने ही दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। सड़कों पर ऐसे ट्रैक्टर-ट्रेलर धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं, जिन पर जरूरत से ज्यादा सामान लदा होता है। हालात इतने खराब हैं कि ट्रेलर के पीछे 10 से 12 फीट तक सामान लटकता रहता है, जिससे अन्य वाहन चालकों की जान खतरे में पड़ जाती है। इन वाहनों के लिए कोई समय सीमा तय नहीं है, जबकि पुलिस ने नो-एंट्री का समय निर्धारित कर रखा है। गुरुवार को इसी लापरवाही का खामियाजा स्वास्थ्य मंत्रालय में नियुक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भुगतना पड़ा।
30 फीट पीछे खड़ी कार में घुस गए सीमेंट के खंभे
दरअसल, स्वास्थ्य मंत्रालय में कार्यरत मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नारायण प्रसाद की कार के आगे चल रहा एक ओवरलोडेड ट्रेलर अचानक संतुलन खो बैठा और पीछे की ओर आने लगा। ट्रेलर पर रखे सीमेंट के खंभे उनकी कार में जा घुसे, जो करीब 30 फीट पीछे खड़ी थी। सौभाग्य से, डॉक्टर और उनके दो बच्चों ने समय रहते खुद को संभाल लिया और झुक गए, जिससे उनकी जान बच गई। अन्यथा यह एक बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। घटना की शिकायत सूरजकुंड थाने में दर्ज कराई गई, जिसके बाद पुलिस ने ट्रॉली चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया।
कार के परखच्चे उड़े, ड्राइवर के पास नहीं थे लाइसेंस और आरसी
डॉ. नारायण प्रसाद ने शिकायत में बताया कि वह स्वास्थ्य मंत्रालय के एनएच-4 स्थित अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनात हैं। 3 अप्रैल को वह अपने बेटे और बेटी को स्कूल से लेने के बाद घर लौट रहे थे। इसी दौरान, डेयलाबाग रोड पर रिलायंस फ्रेश के पास एक ट्रैक्टर-ट्रेलर 10 सीमेंट के खंभे लेकर तेजी से निकला और शिव मंदिर की ओर चढ़ने लगा। अधिक भार के कारण ट्रेलर संतुलन खो बैठा और तेजी से पीछे आने लगा। डॉक्टर की कार ठीक पीछे खड़ी थी और यह ट्रेलर उनकी कार से टकरा गया। टकराने से कार का शीशा, बोनट, डैशबोर्ड और केबिन पूरी तरह चकनाचूर हो गया। इस दौरान ड्राइवर के पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस था और न ही गाड़ी के कागजात।
थाने में पांच घंटे बैठाए रखा, पुलिसकर्मी पीते रहे हुक्का
डॉ. नारायण ने आरोप लगाया कि वह दोपहर 3:30 बजे डेयलाबाग पुलिस चौकी पहुंचे थे, लेकिन वहां उन्हें रात 8 बजे तक बैठाए रखा गया और मामला दर्ज नहीं किया गया। इस दौरान ट्रैक्टर-ट्रेलर चालक के समर्थन में कई लोग वहां पहुंचे और उन पर समझौते के लिए दबाव बनाने लगे। डॉक्टर का कहना है कि पुलिस चौकी में आरोपी के परिचित पुलिसकर्मियों के साथ हुक्का पी रहे थे, जिससे उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद खत्म होती दिखी। ऐसी स्थिति देखकर वह घर लौट आए। हालांकि, बाद में पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया।