विधानसभा में Dada Gautam ने एक अहम मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि समाज में आजकल लड़के-लड़कियों के घर से भागकर शादी करने की घटनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं। कई बार यह रिश्ते सामाजिक, धार्मिक और पारिवारिक विवाद का कारण भी बन जाते हैं। इसलिए सरकार को ऐसा कानून लाना चाहिए जिसमें शादी से पहले मां-बाप की अनुमति अनिवार्य हो।
क्यों ज़रूरी है यह कानून?
दादा गौतम का कहना है कि जब लड़का और लड़की परिवार से छुपकर शादी करते हैं तो कई समस्याएँ खड़ी हो जाती हैं। पहला, दोनों परिवारों में टकराव और तनाव बढ़ता है। दूसरा, कई बार ऐसे रिश्तों को समाज से स्वीकार्यता नहीं मिलती, जिससे नई-नई मुश्किलें सामने आती हैं। तीसरा, घर से भागकर शादी करने वाले युवा अक्सर आर्थिक और सामाजिक रूप से असुरक्षित रह जाते हैं।
परिवार की भूमिका
भारतीय संस्कृति में परिवार का महत्वपूर्ण स्थान है। मां-बाप न केवल बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा के लिए जिम्मेदार होते हैं बल्कि उनके भविष्य के निर्णयों में भी मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। शादी जीवन का सबसे अहम फैसला है और इसमें परिवार की सहमति से स्थिरता और सामाजिक स्वीकृति मिलती है। दादा गौतम का मानना है कि यदि मां-बाप की मंजूरी जरूरी हो जाएगी तो घर से भागकर शादी करने की घटनाएँ कम होंगी और समाज में सामंजस्य बना रहेगा।
सरकार और समाज से अपील
विधानसभा में दादा गौतम ने सरकार से अपील की कि इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाए और कानून बनाया जाए। उन्होंने कहा कि अगर यह कानून लागू होता है तो न केवल पारिवारिक विवादों में कमी आएगी बल्कि समाज में होने वाले आपसी झगड़ों और मान-सम्मान की हानि को भी रोका जा सकेगा। साथ ही, यह कदम युवाओं को जिम्मेदारी का एहसास कराएगा और उन्हें जीवन के महत्वपूर्ण फैसले सोच-समझकर लेने के लिए प्रेरित करेगा।