Faridabad News: दशहरे पर रावण दहन की तैयारियों के बीच नगर निगम फरीदाबाद ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। इससे यहां रावण के पुतले तो बन चुके हैं लेकिन अब समस्या यह है कि इनका दहन कहां किया जाए। निगम ने साफ कर दिया है कि विकसित एवं उच्च श्रेणी के निगम पार्कों में बिना अनुमति किसी भी तरह का बड़ा सार्वजनिक आयोजन, खासकर रावण के विशालकाय पुतलों का दहन नहीं किया जाएगा। अगर किसी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) या अन्य संस्था ने इस आदेश की अवहेलना की तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
दशहरे पर रावण-दहन की परंपरा पुराणों से जुड़ी हुई है। रामायण के अनुसार रावण महान विद्वान और शिवभक्त था, लेकिन उसके भीतर अहंकार, काम और अधर्म का वास बढ़ गया। जब उसने माता सीता का हरण किया, तब भगवान राम ने धर्म की रक्षा के लिए उसका वध किया। इसीलिए दशहरे को ‘असत्य पर सत्य की विजय’ और ‘अधर्म पर धर्म की जीत’ के प्रतीक रूप में मनाया जाता है। रावण का पुतला जलाना हमें यह स्मरण कराता है कि चाहे व्यक्ति कितना भी शक्तिशाली या ज्ञानवान हो, यदि वह अन्याय और अहंकार के मार्ग पर चलता है तो उसका पतन निश्चित है।
आज के संदर्भ में, रावण-दहन केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि एक सामाजिक और नैतिक संदेश भी है। आधुनिक जीवन में रावण के दस सिरों को अहंकार, लोभ, ईर्ष्या, आलस्य, क्रोध, हिंसा, अन्याय, छल, नशा और कामवासना जैसी बुराइयों का रूपक माना जाता है। पुतला जलाकर लोग यह संकल्प लेते हैं कि वे इन दोषों को स्वयं से दूर करेंगे और समाज को बेहतर बनाएंगे।

रावण दहन की तैयारी काफी समय पहले से शुरू हो जाती है। रावण के पुतले बनाने वाले लोग बहुत कम बचे हैं और ऐसे में इन लोगों के पास बड़ी संख्या में ऑर्डर होते हैं और यह लोग उसी के अनुरूप काफी समय से उनकी तैयारी में लग जाते हैं। बात अगर फरीदाबाद की की जाए तो यहां दर्जनों पुतले बनकर तैयार हो चुके हैं। केवल उन्हें अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। अब नगर निगम में नए फरमान में रावण दहन को टाल दिया है ऐसे में बड़ी समस्या यह है कि इन पुतलों का क्या किया जाए?
क्यों लगा प्रतिबंध
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि हर साल विभिन्न सेक्टरों और कॉलोनियों में दशहरा पर्व के दौरान लोग निगम के पार्कों में पुतला दहन करते हैं। इससे जहां पार्कों की संरचना और हरियाली को नुकसान पहुंचता है। वहीं आग लगने या हादसे जैसी बड़ी घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इस बार ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगम ने पहले ही आरडब्ल्यूए और अन्य संस्थाओं को चेतावनी जारी कर दी है। निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व अनुमति आयोजन करने पर संबंधित आरडब्ल्यूए की मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी जाएगी। साथ ही निगम की ओर से मिलने वाला विकास फंड और अन्य सहायता राशि भी रोक दी जाएगी।
निगम ने जिम्मेदारी तय करते हुए कहा है कि अगर आयोजन के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना, आगजनी या जनहानि होती है, तो उसकी पूरी जवाबदेही आयोजनकर्ता संस्था या आरडब्ल्यूए की होगी। इस स्थिति में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। निगम आयुक्त धीरेंद्र खड़गटा ने कहा कि यह कदम नागरिकों की सुरक्षा और जनहित को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। उन्होंने सभी अधिकारियों, स्थानीय निकायों और आरडब्ल्यूए से अपील की है कि निगम के आदेशों का पालन करें, अन्यथा सख्त कदम उठाने पड़ेंगे।