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हरियाणा के वेटलिफ्टर जीतू का UP में एनकाउंटर, रोहतक में चलाता था जिम

हरियाणा के झज्जर का बदमाश जितेंद्र उर्फ जीतू का यूपी के मेरठ में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। जितेंद्र वेटलिफ्टर रह चुका था। उसने दो बार मेडल जीते। बदमाश बनने से पहले रोहतक में जिम चलाता था।

हरियाणा के झज्जर का बदमाश जितेंद्र उर्फ जीतू का यूपी के मेरठ में पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। जितेंद्र वेटलिफ्टर रह चुका था। उसने दो बार मेडल जीते। बदमाश बनने से पहले रोहतक में जिम चलाता था।

साल 2016 में जितेंद्र पर अपने ही गांव के सरपंच और उसके पिता के मर्डर का आरोप लगा था। इसके बाद वह फरार हो गया और फिर एक के बाद एक हत्या जैसी संगीन वारदातों को अंजाम देता चला गया।

जीतू के परिवार का कहना है कि उसे बेदखल कर दिया गया है। अगर डेडबॉडी मिलेगी तो अंतिम संस्कार कर देंगे। उसके चाचा ने जीतू के खिलाड़ी से वांटेड बदमाश बनने की कहानी बताई….

खिलाड़ी से कैसे मोस्ट वांटेड बदमाश बना जितेंद्र जीतू

1. वेटलिफ्टर था जीतू, जतिन उसके साथ रहकर पढ़ता था
जीतू के चाचा जयप्रकाश ने बताया कि वह शुरू से ही खेलों में रूचि थी। वह सभी तरह के खेल खेलता था। उसे जमि करने का शौक था, इसलिए उनसे रोहतक में अपना जिम खोल लिया। जीतू रोहतक में बनाए हुए अपने पिता के घऱ में रहता था। जिम के साथ जीतू ने प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरु किया। वह वेटलिफ्टिंग का बढ़िया खिलाड़ी था। उसे मौका मिला तो वह ऑस्ट्रेलिया जाकर 2 बार मेडल जीतकर लाया।

2. अपना उम्मीदवार नहीं जीता तो सरपंच को घर में घुसकर मारा
चाचा जय प्रकाश ने आगे बताया- 2016 में गांव में सरपंच के चुनाव हुए थे। उस समय हमारी तरफ से एक उम्मीदवार खड़ा था। उसके पक्ष में जीतू ने भी काफी प्रचार किया। इसके बाद भी वह उम्मीदवार सरपंच न बन सका। इस बात का गुस्सा जीतू के अंदर था।

पता नहीं कहां से उसे पिस्टल मिल गई और वह सरपंच का चुनाव जीते रामबीर के घर में घुस गया। उसी दौरान जीतू ने रामबीर को गोली मार दी। मौके पर रामबीर के पिता भी थे, इसलिए जीतू ने उनकी भी गोली मारकर हत्या कर दी।

3. मेरा बेटा भी साथ था, वह भी कत्ल केस में फंस गया
जीतू के चाचा ने बताया कि वह और मेरा बेटा जतिन गांव में एक साथ ही पले-बढ़े। जब जीतू ने रोहतक में अपना जिम शुरु किया तो उस समय मेरा बेटा जतिन भी उसके साथ ही था। इसलिए वह भी फंस गया। दोनों को उस केस में सजा हो चुकी थी।

4. परिवार ने कर दिया जायदाद से बेदखल
सरपंच और उसके पिता की हत्या के बाद जीतू के पिता ने उसे प्रॉपर्टी से बेदखल कर दिया था। उसे जेल से बेल जरूर दिलाई थी। उसके पिता ने सोचा था कि जेल से बाहर आने के बाद वह सुधर जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, तो उससे दोबारा इसकी जमानत भी नहीं करवाई।

5. पिता घर से बाहर गए, चाचा बोले- हमारे लिए तो कब का मर चुका
जीतू के चाचा ने बताया कि गांव में कई सालों से जीतू को नहीं देखा। पुलिस ने तो उसे आज मारा है लेकिन वह न जाने कब का मर चुका था। हमें तो ये भी मालूम नहीं कि जीतू जेल से बाहर कब आया और कब फरार हो गया। जीतू के चाचा जयप्रकाश ने कहा कि जीतू के मरने का हमें दुख है। हमें दुख तब भी हुआ था, जब उसने गांव में हत्याएं की थीं।

6. जीतू का एक बेटा, वह भी पहलवान जैसा दिखता है
जीतू की शादी हो चुकी थी। उसका एक बेटा भी है। उसकी पत्नी और बच्चा रोहतक में ही रहते हैं। बेटा भी जीतू की तरह पहलवान जैसा दिखता है। अभी लगभग 14-15 साल उम्र है।

7. पिता DTC से रिटायर ड्राइवर
चाचा का कहना था कि जीतू के पिता दिल्ली ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन की बस चलाते थी। अब वह रिटायर हो चुके हैं। जीतू का पालन पोषण उन्होंने बहुत अच्छे तरीके से किया था। जीतू 12वीं पास था। उसे बचपन से ही उसे पहलवानी का शौक था।

8.भाई पढ़ा-लिखा, भाभी आंखों की डॉक्टर
जयप्रकाश का कहना है कि मैं और भाई खुद ज्यादा पढ़ें लिखे नहीं है। लेकिन बच्चों को पढ़ाकर अच्छा बनाने का प्रयास किया। जीतू का छोटा भाई रोहतक में नौकरी करता है और उसकी पत्नी आंखों की डॉक्टर है।

9. परिवार में 20 साल तक रही सरपंची
जीतू के दादा खजान सिंह ने बताया कि जिस सरपंच और उसके बेटे की जीतू ने हत्या की थी वह उनके परिवार की ओर से बनाया गया सरपंच था। सरपंच बनवाने में उनके परिवार का बड़ा योगदान था। 20 साल तक उनके परिवार में गांव की सरपंची रही है। मेरे चाचा मांगे राम और पिता विजय सिंह चार बार सरपंच रहे हैं। शायद जीतू की मनपसंद का सरपंच नहीं बन पाया इसलिए उसने यह कदम उठाया। अगर वह बता देता तो परिवार ऐसा होने ही नहीं देता। जीतू जिसे बताता उसे ही सरपंच बनवा देते।

10. 2016 में ही गांव छोड़ गया था सरपंच का परिवार
जीतू ने जिस सरपंच का मर्डर किया था उसका परिवार 2016 में गांव छोड़ गया। लोगों ने बताया की जीतू के घर से तीन घर छोड़कर ही उस सरपंच का घर था जिसको जीतू ने मार दिया था। इसके बाद परिवार डर गया और ‌दोबारा गांव वापस नहीं आया।

 

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