सत्य खबर हरियाणा
Bank Fraud : बैंकों में आम खाताधारकों के साथ धोखाधड़ी के मामले तो अक्सर सामने आते हैं, लेकिन इस बार मामला सीधे प्रदेश सरकार से जुड़ा है। हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के खातों से करीब 590 करोड़ रुपए की बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। इस मामले में बैंक अधिकारियों और कुछ सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है। सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आई.डी.एफ.सी. फर्स्ट बैंक और ए.यू. स्मॉल फाइनैंस बैंक में संचालित सभी सरकारी खातों को बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं। दोनों बैंकों को ब्लैकलिस्ट करने का भी फैसला लिया गया है। बैंक ने खुद स्टॉक एक्सचेंज को सूचना देकर बताया कि उसके ही कुछ कर्मचारियों ने अनधिकृत और गलत तरीके से ये गड़बड़ी की, जिसमें बाहर के कुछ लोग शामिल है। बैंक ने चार कर्मचारियों को सस्पेंड भी किया है। 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामले सामने आने के बाद आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) के शेयरों का बुरा हाल है। कंपनी के शेयरों की कीमतों में 15 प्रतिशत की गिरावट आज सुबह दर्ज की गई है।
हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद कर राशि दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। इस प्रक्रिया के दौरान खाते की वास्तविक शेष राशि और विभाग द्वारा बताई गई राशि में अंतर पाया गया। 18 फरवरी 2026 से अन्य हरियाणा सरकारी संस्थाओं ने भी अपने खातों के संबंध में बैंक से संपर्क किया। जांच के दौरान उनके बताए गए बैलेंस और बैंक रिकॉर्ड में दर्ज बैलेंस में अंतर पाया गया।
कैसे क्या हुआ
प्रारंभिक जांच के अनुसार यह मामला केवल हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ विशेष खातों तक सीमित है, जो चंडीगढ़ शाखा के माध्यम से संचालित हो रहे थे। यह मामला शाखा के अन्य ग्राहकों से संबंधित नहीं है। चिन्हित खातों में मिलान (रिकन्सिलिएशन) के तहत कुल लगभग 590 करोड़ रुपये की राशि शामिल है। जांच पूरी होने तक चार संदिग्ध अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। बैंक ने पूरे मामले की गहन जांच के लिए बाहरी स्वतंत्र एजेंसी से फॉरेंसिक ऑडिट करवाने का निर्णय लिया है। बोर्ड स्तर पर विशेष कमेटी गठित कर रिपोर्ट तलब की गई है। दोषी कर्मचारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक, सिविल और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।
जाग गई हरियाणा की सरकार
घोटाले के बाद हरियाणा के वित्त विभाग ने सभी विभागों, बोर्ड-निगमों और स्वायत्त निकायों को निर्देश जारी किए हैं कि भविष्य में केवल राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही सरकारी खाते खोले जाएंगे। यदि किसी निजी बैंक में खाता खोलना आवश्यक हुआ तो वित्त विभाग की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी। सभी प्रशासनिक सचिवों, उपायुक्तों, मंडलायुक्तों, विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों और सरकारी कंपनियों के प्रबंध निदेशकों को इस संबंध में निर्देश भेज दिए गए हैं। सभी विभागों को 31 मार्च तक अपने बैंक खातों और सावधि जमाओं का मिलान कर 4 अप्रैल तक अनुपालन रिपोर्ट वित्त विभाग को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। वित्त विभाग ने यह भी माना है कि कई मामलों में बैंक स्पष्ट निर्देशों के बावजूद धनराशि को उच्च ब्याज वाली सावधि जमा में स्थानांतरित करने के बजाय बचत खातों में रोके हुए थे, जिससे सरकार को वित्तीय नुकसान हुआ।
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