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राज्यसभा चुनाव के बाद हरियाणा कांग्रेस में बढ़ा अंतर्कलह

अब उन लोगों के नाम सार्वजनिक किए जाने की मांग जिनके वोट हुए रद्द

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

Discord in Congress : कांग्रेस के पांच विधायकों द्वारा राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने के बाद अब कांग्रेस में अंतर्कलह खुलकर सामने आ रही है। कांग्रेस के सामने इस समय समस्या यह है कि अगर वह इन विधायकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करती है तो सवा 2 साल बाद होने वाले दो सीटों के राज्यसभा चुनाव में पार्टी को दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। अगर वह कार्रवाई नहीं करती है तो कांग्रेस के साथ खड़े विधायक इसका विरोध करेंगे।

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क्रॉस वोटिंग करने वालों के नाम सार्वजनिक हो चुके हैं। इनमें दो महिलाएं, दो मुस्लिम समुदाय से हैं। अगर बात करें जातिय आधार की तो दो अनुसूचित जाति से आते हैं। अब इस बात की भी मांग उठने लगी है कि कांग्रेस को उन लोगों के नाम भी सार्वजनिक करने चाहिएं, जिनके वोट रद्द हुए हैं।

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस किसी प्रकार से अपने उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध को जितवाने में सफल रही है लेकिन उसकी पूरी रणनीति पूरी तरह से फेल हो गई। कांग्रेस के पास 37 विधायक थे और वह आसानी से अपनी सीट जीत सकते थे लेकिन कांग्रेस के पांच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की और चार विधायकों के वोट रद्द हो गए। ऐसे में कांग्रेस के कर्मवीर बहुत को केवल 28 वोट मिले और वह एक वोट से भी काम के अंतर से चुनाव जीतने में सफल हुए।

1 अगस्त 2028 को हरियाणा से निर्दलीय चुनाव जीतकर राज्यसभा पहुंचे कार्तिकेय शर्मा और निर्विरोध चुनकर राज्यसभा गई रेखा शर्मा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि अगर आज वह इन पांच विधायकों को पार्टी से निकाल देती है तो इनकी सदस्यता नहीं जाएगी लेकिन इन पर पार्टी का कोई दबाव ही नहीं बचेगा। ऐसे में यह लोग खुलकर सरकार के साथ जुड़ जाएंगे। कांग्रेस के पास केवल 32 विधायक बचेंगे और चुनाव जीतने के लिए उसे 30 के समर्थन की जरूरत होगी। अगर ऐसी स्थिति में उसके तीन विधायकों को भी तोड़ लिया गया तो उनकी सीट खतरे में पड़ जाएगी।

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जिन विधायकों के नाम सामने आए हैं, वे अब खुलकर बयान दे रहे हैं और जिन विधायकों के वोट रद्द हुए हैं उनके नाम सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। अगर यह टकराव और बढ़ा तो पार्टी के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आ सकती है। बगावत की स्थिति में कांग्रेस को संगठनात्मक नुकसान के साथ-साथ राजनीतिक छवि का भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कांग्रेस नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह अनुशासन बनाए रखने के लिए कार्रवाई करे या फिर 2028 के चुनावी गणित को देखते हुए नरम रुख अपनाए। ज्यादा सख्ती करने से संख्या घट सकती है, जबकि नरमी दिखाने से पार्टी में अनुशासन कमजोर होने का संदेश जाएगा। यही दुविधा आने वाले फैसलों को प्रभावित कर सकती है।

यदि जांच में कैंसिल वोट करने वाले विधायकों के नाम भी सामने आते हैं, तो विवाद और बड़ा हो सकता है। इससे कार्रवाई का दायरा बढ़ेगा और पार्टी के भीतर असंतोष और फैल सकता है। ऐसे हालात में कांग्रेस को एक साथ कई मोर्चों पर राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।

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मोहम्मद इजराइल तो खुलकर कह चुके हैं कि उन्होंने ‘अंतरात्मा की आवाज़’ पर वोट दिया। वह कहते हैं कि कार्यकर्ताओं से सलाह-मशविरा करके अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को झूठा बताते हुए पार्टी के कुछ नेताओं की कार्यशैली पर नाराजगी भी जाहिर की है। शैली चौधरी का कहना हैं कि कांग्रेस में पसंद नापसंद का खेल चल रहा है जिसको ना पसंद किया जाता है तो उनको वह लोग निपटा देते हैं। अगर इस बात में सच्चाई नहीं है तो मैं राजनीति छोड़ दूंगी। वह कहती हैं, मैं क्यों इस्तीफा दूं , मेरा फैसला नारायणगढ़ की जनता करेगी।

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