शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष Sukhbir Singh Badal और पार्टी के अन्य नेताओं को बुधवार को मोहाली में पुलिस ने हिरासत में ले लिया। वे पार्टी नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के समर्थन में मोहाली पहुंचे थे। मजीठिया को disproportionate assets के मामले में मोहाली कोर्ट में पेश किया गया था। सुखबीर बादल का कहना था कि वे अंब साहिब गुरुद्वारे में मत्था टेकने जा रहे थे लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया और थाने ले गई।
आप सरकार पर बादल का सीधा हमला
पुलिस की कार्रवाई के बाद सुखबीर बादल ने आप सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी अकाली कार्यकर्ताओं से डर गई है। उन्होंने कहा, “हमें डराया नहीं जा सकता। हर अकाली कार्यकर्ता आम आदमी पार्टी की दमनकारी नीतियों के खिलाफ डटकर खड़ा रहेगा। भगवंत मान की हताशा यह दिखा रही है कि वे हमारे साहस से घबरा गए हैं।”
‘घोषित नहीं पर आपातकाल है लागू’
सुखबीर बादल ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि राज्य में ‘घोषित नहीं पर आपातकाल लागू’ हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो भी अकाली कार्यकर्ता मोहाली पहुंचना चाहता था, उसे या तो उसके घर में नजरबंद कर दिया गया या फिर रास्ते में चेक पोस्ट पर रोक लिया गया। उन्होंने इसे कायरतापूर्ण कदम बताया और कहा कि भगवंत मान सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए हर हथकंडा अपना रही है।
क्यों गिरफ्तार हुए बिक्रम मजीठिया?
विजिलेंस ब्यूरो ने 25 जून को बिक्रम सिंह मजीठिया को 540 करोड़ रुपये के ड्रग्स मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ यह मामला 2021 में दर्ज NDPS केस की जांच पर आधारित है। मजीठिया पर आरोप है कि उन्होंने नशीली दवाओं से जुड़े धन को वैध रूप में बदलने में मदद की। पहले भी मजीठिया को इसी मामले में पटियाला जेल में 5 महीने तक रहना पड़ा था और अगस्त 2022 में उन्हें जमानत मिली थी।
राजनीति और कानून का टकराव जारी
अकाली दल और आम आदमी पार्टी के बीच यह मामला अब केवल कानूनी नहीं रहा बल्कि खुला राजनीतिक संघर्ष बन चुका है। जहां एक ओर विजिलेंस जांच को सरकार कानून की जीत बता रही है, वहीं अकाली दल इसे बदले की भावना से उठाया गया कदम बता रहा है। ऐसे में पंजाब की राजनीति में यह मामला अब और गर्माने वाला है।