पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले I-PAC पर हुई ED रेड और उसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कथित हस्तक्षेप को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में प्रवर्तन निदेशालय और ममता बनर्जी की ओर से पेश वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मामले में तत्काल कोई आदेश नहीं दिया है और अगली सुनवाई 2 सितंबर को तय की गई है।
ममता की ओर से CBI जांच का सुझाव
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने सवाल उठाया कि पूरे मामले की जांच CBI को क्यों नहीं सौंप दी जाती।
उन्होंने कहा कि अब सरकार बदल चुकी है, ऐसे में निष्पक्ष जांच के लिए यह विकल्प अपनाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने भी इस सुझाव पर विचार किया।
ED ने कहा- राजनीतिक विवाद नहीं बनाना चाहते
ED की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलीलें रखीं।
तुषार मेहता ने कहा कि वह ऐसी स्थिति नहीं चाहते, जहां यह आरोप लगे कि सरकार बदलने के बाद ममता बनर्जी के खिलाफ राजनीतिक कारणों से CBI जांच शुरू कराई गई।
उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि मामले को राजनीतिक नजरिए से नहीं बल्कि कानूनी तथ्यों और मेरिट के आधार पर देखा जाए।
मौजूदा मुख्यमंत्री की जांच पर उठा सवाल
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना होगा कि क्या किसी मौजूदा मुख्यमंत्री पर अपराध के आरोप लगने की स्थिति में CBI जांच कर सकती है।

उन्होंने इस मामले में कानूनी स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत बताई।
ED ने ममता के खिलाफ FIR की मांग की
ED ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर ममता बनर्जी और बंगाल के कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और मामले की जांच CBI से कराने की मांग की है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि I-PAC पर छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी ने ED की कार्रवाई में हस्तक्षेप किया और पुलिस अधिकारियों ने जांच एजेंसी को अपना काम करने से रोका।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 8 जनवरी 2026 को ED ने I-PAC और उसके संस्थापकों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी।
ED की कार्रवाई के दौरान ममता बनर्जी पहले I-PAC के को-फाउंडर प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचीं और इसके बाद साल्ट लेक स्थित कार्यालय गईं।
ममता बनर्जी ने उस समय आरोप लगाया था कि बीजेपी के कहने पर ED अधिकारी चुनाव से जुड़े दस्तावेज लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्हें कुछ दस्तावेज लेकर निकलते हुए भी देखा गया था।
अगली सुनवाई पर टिकी नजरें
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। अब 2 सितंबर की सुनवाई में यह साफ होगा कि कोर्ट जांच की दिशा को लेकर क्या रुख अपनाता है।
यह मामला बंगाल की राजनीति, जांच एजेंसियों की भूमिका और मुख्यमंत्री के अधिकारों को लेकर बड़ी कानूनी बहस का केंद्र बन गया है।