गर्भावस्था के दौरान छुट्टी मांगने पर छुट्टी देने की जगह नौकरी समाप्त करना उचित नहीं : हाईकोर्ट

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अदालत ने चार सप्ताह में दोबारा नियुक्ति के दिए आदेश, अगली सुनवाई 28 जनवरी 2027 को

सत्य खबर हरियाणा

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High Court News : पंजाब से हरियाणा उच्च न्यायालय ने प्रदेश के शिक्षा विभाग को एक संविदा अध्यापिका की सेवाएं समाप्त करने को लेकर डांट पिलाई है। हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को साफ तौर पर आदेश दिए हैं कि कर सप्ताह के अंदर इस शिक्षिका की दोबारा नियुक्ति के आदेश जारी किए जाएं। हाईकोर्ट ने महिला शिक्षक द्वारा गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य जटिलताओं को देखते हुए विभाग से अवकाश मांगने और विभाग द्वारा अवकाश देने की जगह उसकी सेवाएं समाप्त करने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई की। इस मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी 2027 को होगी।

क्या है मामला

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याचिकाकर्ता की नियुक्ति 16 मार्च 2024 को हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से हुई थी। उन्हें सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, चांदपुर में टीजीटी (साइंस) के रूप में नियुक्त किया गया था। गर्भावस्था के दौरान गंभीर चिकित्सकीय जटिलताएं आने पर डॉक्टरों ने उन्हें नौ माह तक पूर्ण बेड रेस्ट की सलाह दी थी।उन्होंने 9 अक्तूबर 2025 को मेडिकल अवकाश मांगा था। हालांकि, अवकाश पर निर्णय लेने के बजाय 16 मार्च 2026 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। याचिका में बताया गया कि 15 अप्रैल 2026 को उन्होंने बच्चे को जन्म दिया था। इससे स्पष्ट है कि मेडिकल अवकाश वास्तविक चिकित्सकीय कारणों से मांगा गया था। शिक्षिका ने अदालत को बताया कि वह अनुपस्थिति अवधि का वेतन नहीं चाहती हैं। वह अब पूरी तरह स्वस्थ होकर दोबारा कार्य करने को तैयार हैं। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड से यह प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता ने मजबूरी में चिकित्सकीय आधार पर अवकाश मांगा था।अदालत ने यह भी कहा कि उसी पद पर कार्यरत अन्य संविदा शिक्षकों की सेवाएं बढ़ा दी गईं। इसके बावजूद केवल मेडिकल अवकाश मांगने वाली शिक्षिका की सेवा समाप्त करना उचित नहीं दिखता।

क्या कहा हाईकोर्ट ने

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि जब अन्य संविदा शिक्षकों की सेवाएं बढ़ाई गईं तो केवल मेडिकल आधार पर अवकाश मांगने वाली शिक्षिका की सेवा समाप्त करना उचित नहीं दिखता। हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए संबंधित अधिकारी को चार सप्ताह के भीतर टीजीटी (साइंस) शिक्षिका के पक्ष में नया तैनाती पत्र जारी करने और उसे दो सप्ताह के भीतर कार्यभार ग्रहण कराने का आदेश दिया।

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महिला शिक्षिका ने अदालत से अपनी सेवा बहाल करने, संविदा अवधि बढ़ाने, वेतन सहित मातृत्व अवकाश, मेडिकल बोनस, अन्य सभी मौद्रिक लाभ, ब्याज तथा मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न के लिए मुआवजा दिलाने की मांग की है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास चतरथ अदालत में पेश हुए। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि टीचर की नियुक्ति 16 मार्च 2024 को हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएनएल) के माध्यम से सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, चांदपुर में टीजीटी (साइंस) के रूप में हुई थी।

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