कुरुक्षेत्र के सर्वेश्वर मंदिर में ब्रह्मा जी करते थे शिव जी की पूजा
सत्य खबर हरियाणा
First Monday of Sawan : हरियाणा और भगवान शिव का बहुत पुराना नाता है। यहां ऐसे अनेक उदाहरण है जहां सतयुग, द्वापर और त्रेता युग में देवताओं ने भगवान शिव की पूजा कर आशीर्वाद ग्रहण किया। कुरुक्षेत्र में स्थित स्थानेश्वर मंदिर के बारे में मान्यता है कि पांडवों ने यहां पर भगवान शिव की पूजा कर युद्ध से पहले उनका आशीर्वाद लिया।

आज सावन के पहले सोमवार को हम हरियाणा के कुछ ऐसे ही मंदिरों की चर्चा करने वाले हैं। भगवान शिव को समर्पित इन मंदिरों का अपना इतिहास है।
हरियाणा में कई प्राचीन शिव मंदिर हैं, जिनमें पेहोवा (कुरुक्षेत्र) में स्थित 9वीं-10वीं शताब्दी का प्राचीन शिव मंदिर सरस्वती नदी के किनारे एक प्रमुख और संरक्षित स्थल हैं।
भगवान शिव को समर्पित स्थानेश्वर महादेव एक प्राचीन मंदिर है, जिसे कुरुक्षेत्र की 48 कोस परिक्रमा में महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि महाभारत युद्ध से पहले पांडवों ने यहां भगवान शिव की आराधना की थी।
18वीं शताब्दी में सरदार फतेह सिंह द्वारा निर्मित भूतेश्वर महादेव एक ऐतिहासिक मंदिर, जो भगवान शिव को समर्पित है और जींद के केंद्र में स्थित है। यह मंदिर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के तर्ज पर बना हुआ है।
मायअध्यात्म के अनुसार, पलवल में जंगेश्वर शिव मंदिर 375 वर्ष पुराना है और अपने स्वयंभू शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है।
गुरुग्राम के चकरपुर स्थित सेक्टर 28 में स्थित प्राचीन शिव मंदिर इस क्षेत्र का एक प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर है। जहां लोगों की आस्था जुडी हुई है।
अंबाला शहर में स्थित नीलकंठ महादेव प्राचीन शिव मंदिर एक ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर शिव को “नीलकंठ” (नीले गले वाले) के रूप में समर्पित है और पौराणिक समुद्र मंथन से जुड़ा हुआ माना है।
कुरुक्षेत्र के सर्वेश्वर महादेव मंदिर, जिसे आमतौर पर ब्रह्मा सरोवर मंदिर के नाम से जाना जाता है, भगवान शिव को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान ब्रह्मा इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा करते थे।
हरियाणा का सबसे ऊंचा शिव मंदिर गांव कवि (पानीपत) में है। करीब 151 फीट ऊंचा यह मंदिर अपनी विशालता और सुंदर बनावट के कारण दूर से ही चमकता हुआ दिखाई देता है और राज्यभर के भक्तों के लिए आस्था का मुख्य केंद्र है।
करनाल के सर्राफा बाजार में 8 बाई 8 फुट की जगह में 125 फीट ऊंचा भव्य मंदिर बना हुआ है। जो लोगों के आकर्षण का केंद्र है।
मंडी आदमपुर से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित सीसवाल धाम में हरियाणा का सबसे लंबा प्राकृतिक शिवलिंग मौजूद है। इस शिवलिंग की लंबाई 4 फुट से ज्यादा है तथा यह शिवलिंग सैकड़ों साल पुराना है। सावन माह व फाल्गुन माह में शिवरात्रि के अवसर पर शिवालय में कांवड़ियों के जमघट और उनके बम-बम के उद्घोषों से पूरा गांव शिवमय हो जाता है। यहां पर कांवड़िये 300 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर कांवड़िये जल चढ़ाने आते हैं।
किरमारा धाम हिसार से 32 किलोमीटर दूरी पर किरमारा से सिवानी बोलान मार्ग पर स्थित है। धाम के पास में लगभग 50 एकड़ जमीन पर टिल्ला भी है, जो अपने आप में प्राचीन इतिहास समेटे हुए है। यहां स्थित कामेश्वर धाम का इतिहास सदियों पुराना है। हरियाणा में यह धाम सबसे प्राचीन है। हरियाणा के अलावा राजस्थान, पंजाब, दिल्ली सहित कई राज्यों के भोले बाबा के भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बना है। यहां पर वर्ष में सावन व फागुन मास में दो बार मेले लगते हैं। धाम की खास बात है कि पूरे वर्ष खुला भंडारा चलता रहता है। किरमारा धाम का ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व इस तथ्य से साफ हो जाता है कि पुरातत्व विभाग के पास धाम का लगभग 800 वर्ष पुराना रिकाॅर्ड है।
भिवानी का सबसे बड़ा और प्रसिद्ध शिव मंदिर जोगीवाला मंदिर (जोगीवाला महादेव मंदिर) है। यह ऐतिहासिक मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और शहर के मुख्य क्षेत्र में स्थित है। यह पावन धाम लगभग 300 वर्ष पुराना है, जिसकी स्थापना बाबा मेहुनाथ जी ने की थी। मंदिर का परिसर बहुत बड़ा है, जिसमें भगवान शिव की ध्यान मुद्रा में एक भव्य प्रतिमा, संतों की समाधियां, एक पुराना वट वृक्ष, धर्मशाला और गौशाला बनी हुई है।
कैथल के कलायत में पिंजूपुरा गांव का शिव मंदिर का अपना महत्व है।
जींद का ठिठारी महादेव मंदिर एक प्राचीन और महाभारत कालीन स्थल है, जो भगवान शिव को समर्पित है। स्थानीय मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है, लेकिन ऐतिहासिक दस्तावेजों और मुख्यधारा के साहित्य में जींद के अन्य प्रसिद्ध मंदिरों (जैसे रानी तालाब स्थित भूतेश्वर मंदिर) की तरह इसके बारे में बहुत विस्तृत लिखित इतिहास या जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसे महाभारत कालीन मंदिर माना जाता है जहां दूर-दूर से शिव भक्त सावन और महाशिवरात्रि जैसे पवित्र अवसरों पर पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। यह प्राचीन धरोहर आज भी जींद क्षेत्र के धार्मिक और आस्थालय केंद्रों में गिनी जाती है।
#LordShiva #ShivaTemples #HaryanaTemples #SpiritualJourney #DivineWorship #HinduCulture #SacredSites #ReligiousHeritage #TempleTourism #ShivaDevotion #CulturalExploration #HaryanaHeritage #PilgrimageSites #SpiritualAwakening #HinduFaith #Mythology #SacredPlaces #WorshipInHaryana #DivineBlessings #ExploreHaryana