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नौकरी का झांसा देकर रूस भेजा गया युवक युद्ध में मारा गया परिवार का आरोप

Satyakhabarindia

पंजाब के Ludhiana का 21 वर्षीय युवक समरजीत सिंह बेहतर भविष्य और परिवार की आर्थिक मदद के सपने लेकर पिछले साल विदेश गया था। परिवार को उम्मीद थी कि बेटा विदेश में नौकरी करेगा और घर की हालत सुधरेगी। लेकिन आठ महीने बाद जब उसका शव घर पहुंचा तो पूरे परिवार और इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। शुक्रवार 14 मार्च को लुधियाना के डाबा इलाके में समरजीत सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार के दौरान परिवार के लोगों के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। बेटे के पार्थिव शरीर को देखकर माता पिता और रिश्तेदारों का रो रोकर बुरा हाल था। जिस बेटे को परिवार ने उम्मीदों के साथ विदेश भेजा था वही अब ताबूत में लिपटकर घर लौटा। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

नौकरी का झांसा देकर रूस भेजे जाने का आरोप

परिवार का आरोप है कि समरजीत सिंह को नौकरी का झांसा देकर रूस भेजा गया था। उनके अनुसार जुलाई 2025 में कुछ भर्ती एजेंटों ने समरजीत को विदेश में अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी दिलाने का वादा किया था। परिवार को बताया गया था कि वहां उसे किसी कंपनी में काम मिलेगा और वह आसानी से पैसे कमा सकेगा। लेकिन रूस पहुंचने के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। परिवार का कहना है कि वहां पहुंचते ही समरजीत को जबरन रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया। इतना ही नहीं उसे किसी तरह का सैन्य प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया और सीधे युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया गया। समरजीत ने एक बार फोन पर अपने परिवार को इस मुश्किल हालात के बारे में बताया था और कहा था कि वह बेहद परेशान है। उस कॉल के बाद परिवार की चिंता लगातार बढ़ती चली गई।

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सितंबर के बाद लापता हुआ समरजीत

परिवार के अनुसार समरजीत सिंह से उनकी आखिरी बार सितंबर 2025 में बात हुई थी। उस समय उसने बताया था कि वह युद्ध क्षेत्र में है और स्थिति बेहद खतरनाक है। इसके बाद अचानक उससे संपर्क टूट गया और कई महीनों तक परिवार को उसकी कोई खबर नहीं मिली। परिवार लगातार उसके बारे में जानकारी पाने की कोशिश करता रहा लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। आखिरकार गुरुवार को समरजीत के पार्थिव अवशेष Indira Gandhi International Airport नई दिल्ली पहुंचे। वहां से शव को लुधियाना लाया गया जहां पूरे परिवार ने भारी मन से उसका अंतिम संस्कार किया। जैसे ही शव घर पहुंचा पूरा मोहल्ला शोक में डूब गया और लोगों की आंखें नम हो गईं।

पिता की भावुक अपील और सरकार से सवाल

समरजीत के पिता Charanjit Singh अपने बेटे की चिता के पास खड़े होकर बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने लोगों से अपील की कि एजेंटों के झूठे वादों में आकर अपने बच्चों को विदेश न भेजें। उन्होंने बताया कि वह अमरापुरी इलाके में एक छोटी किराना दुकान चलाते हैं और आर्थिक तंगी के कारण ही उनका बेटा विदेश गया था। पिता ने कहा कि अगर देश में ही रोजगार के अच्छे अवसर होते तो उनका बेटा कभी विदेश जाने का फैसला नहीं करता। वह सिर्फ परिवार की मदद करना चाहता था और बेहतर भविष्य का सपना देख रहा था। रोते हुए पिता ने यह भी कहा कि उन्हें आज तक यह नहीं पता कि उनके बेटे के आखिरी पल कैसे बीते। परिवार का आरोप है कि बेटे के लापता होने के बाद उन्होंने महीनों तक अधिकारियों से मदद मांगी लेकिन उन्हें कोई ठोस सहायता नहीं मिल सकी।

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