पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत नौसेना को पर्शियन गल्फ में भेजने पर विचार कर रहा

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास संकट के बीच भारत सरकार पर्शियन गल्फ में फंसे जहाजों की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना को तैनात करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, इस मामले में अगले दो दिनों के भीतर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। अगर यह निर्णय लागू होता है तो भारतीय नौसेना के जहाज व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने और एस्कॉर्ट करने का काम करेंगे। इस क्षेत्र में फंसे जहाजों में करीब 10 प्रतिशत भारत से जुड़े हैं, जिनमें शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के तेल और गैस टैंकर भी शामिल हैं।
ऑपरेशन संकल्प और नौसेना का अनुभव
भारतीय नौसेना पहले भी समुद्री सुरक्षा के लिए बड़े अभियान चला चुकी है। इनमें ऑपरेशन संकल्प प्रमुख रहा है, जिसे गल्फ क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चलाया गया था। इस अभियान के दौरान नौसेना ने कई जहाजों को हूती विद्रोही और सोमाली डाकुओं के हमलों से बचाया था। इस बार भी भारतीय जहाजों की तैनाती इसी अनुभव पर आधारित होगी। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन के बयान से भी आशा जताई जा रही है कि पड़ोसी देश पहले हमला नहीं करेगा, जिससे फंसे जहाजों को सुरक्षित आगे बढ़ने का भरोसा मिल सकता है।

भारत ने वैकल्पिक तेल व्यवस्था कर ली
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत ने अपने तेल की वैकल्पिक व्यवस्था पहले ही कर ली है। अब भारत के करीब 70 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति ऐसे रास्तों से की जा रही है जिन्हें होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसलिए फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। वहीं, ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबज़ादेह ने कहा कि भारत के जहाजों को होरमुज में रोकने का कोई इरादा नहीं है और किसी भी खतरे की स्थिति में अमेरिका से पूछना चाहिए कि क्यों हिंद महासागर में ईरानी जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है।
भारतीय बंदरगाहों के लिए नई मानक कार्यप्रणाली
केंद्रीय बंदरगाह एवं जलमार्ग मंत्रालय ने भारत के सभी बंदरगाहों के लिए नई मानक कार्यप्रणाली लागू की है। इसके तहत पश्चिम एशिया जाने वाले माल को अस्थायी रूप से भारतीय बंदरगाहों पर स्टोर करने की अनुमति दी गई है। खराब होने वाले सामान को प्राथमिकता देने और जहाजों की समय पर रफ्तार सुनिश्चित करने के लिए विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। सरकार का मानना है कि इन कदमों से शिपिंग कंपनियों को राहत मिलेगी और वैश्विक समुद्री व्यापार पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सकेगा।