एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, रामपुर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ED के लखनऊ जोनल ऑफिस की टीम ने रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में कुल 10 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 17 के तहत की गई है।
सरकारी फंड के दुरुपयोग के आरोपों की जांच
ED की जांच सरकारी ठेकों से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं पर केंद्रित है। आरोप है कि कुछ निजी ठेकेदारों के जरिए सरकारी धन को दूसरी जगह इस्तेमाल किया गया और बाद में उसी पैसे से ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी के नाम पर संपत्तियां तैयार की गईं।
जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी परियोजनाओं से जुड़े पैसों का प्रवाह किस तरह हुआ और उसका इस्तेमाल कहां किया गया।
ठेकेदारों और ट्रस्ट के बीच लेन-देन की जांच
जांच में कथित तौर पर ठेकेदारों और ट्रस्ट के बीच आर्थिक लेन-देन की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि सरकारी कामों से लाभ पाने वाले कुछ ठेकेदारों ने दान और निर्माण कार्यों के माध्यम से ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी में पैसा लगाया।
ED की तलाशी का उद्देश्य वित्तीय रिकॉर्ड, दस्तावेज और डिजिटल सबूतों को जुटाना है, जिससे कथित लेन-देन की वास्तविकता सामने आ सके।

क्या है जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ा विवाद
मामला तब और चर्चा में आया जब रामपुर विकास प्राधिकरण ने जौहर यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों को कथित रूप से मानकों के अनुरूप नहीं बताते हुए नोटिस जारी किया था।
15 जुलाई को जारी इस नोटिस के बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन में हलचल मच गई थी। प्रबंधन ने इसे एकतरफा कार्रवाई बताते हुए अदालत जाने की बात कही थी।
यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने रखा अपना पक्ष
यूनिवर्सिटी प्रबंधन का कहना है कि सभी इमारतों का निर्माण स्वीकृत नक्शों के आधार पर किया गया था। उनका तर्क है कि जब यूनिवर्सिटी का निर्माण हुआ था, तब यह क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल नहीं था।
अब ED की जांच में सामने आने वाले दस्तावेज और सबूत यह तय करेंगे कि वित्तीय लेन-देन में कोई अनियमितता हुई है या नहीं।
जांच के दायरे में वित्तीय रिकॉर्ड
ED की कार्रवाई के बाद अब सभी की नजर जांच के अगले चरण पर है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर सरकारी धन के इस्तेमाल और ट्रस्ट की संपत्तियों के बीच कोई संबंध है या नहीं।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आगे की कार्रवाई जांच में मिले सबूतों के आधार पर तय होगी।