प्रधानमंत्री के रूप में दो बार जींद आने वाले नरेंद्र मोदी बनेंगे पहले नेता

Satyakhabarindia

अटल प्रधानमंत्री के रूप में कभी जींद नहीं आए, मनमोहन सिंह ने नहीं किया जींद का कभी दौरा, जवाहरलाल नेहरू और राजीव गांधी प्रधानमंत्री रहे थे एक-एक बार आए जींद

Narendra Modi : हरियाणा के दिल जींद को हरियाणा की राजनीतिक राजधानी की कहा जाता है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर अब तक प्रधानमंत्री के रूप में जींद आने वाले नेताओं में जवाहरलाल नेहरू, राजीव गांधी और नरेंद्र मोदी शामिल हैं। अटल बिहारी वाजपेई प्रधानमंत्री रहते हुए कभी जींद नहीं आए लेकिन, पार्टी के कार्यक्रमों में उन्होंने चार बार जींद में कार्यक्रम किए। राजीव गांधी 1991 में अपनी हत्या से ठीक एक सप्ताह पहले जींद के अर्जुन स्टेडियम में एक जनसभा को संबोधित करने आए थे। उस समय वह विपक्ष में थे। कांग्रेस के सत्ता में रहते सोनिया गांधी भी जींद आई थी लेकिन वह प्रधानमंत्री नहीं थी वह यूपीए की अध्यक्ष थी। जो उस समय सत्ता में था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 साल 9 महीने और 6 दिन बाद जींद के दौरे पर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद जींद का यह उनका दूसरा दौरा है। इससे पहले 11 अक्टूबर 2014 को हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान के प्रचार में उन्होंने जींद में रैली की थी। प्रधानमंत्री के रूप में जींद में एक से अधिक बार आने वाले नरेंद्र मोदी पहले व्यक्ति हैं। 2014 के चुनाव के बाद 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान जींद जिले में नहीं आए। इसके अलावा भी प्रधानमंत्री का जींद में आने का कोई कार्यक्रम नहीं बना।

जब प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार नरेंद्र मोदी 11 अक्टूबर 2014 को जींद आए थे, उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों और आज के राजनीतिक हालातों में भाजपा के नजरिए से एक बड़ा अंतर देखने को मिलता है। प्रधानमंत्री की रैली के बावजूद 2014 के विधानसभा चुनाव में जींद जिले में भाजपा को पांच में से केवल एक विधानसभा सीट पर जीत हासिल हुई थी जबकि तीन पर इनेलो और एक पर निर्दलीय उम्मीदवार को जीत हासिल हुई थी। भाजपा ने उस समय उचाना में जीत दर्ज की थी। यहां से भाजपा उम्मीदवार के रूप में चौधरी वीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता विधायक चुनी गई थी।

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बात अगर राजनीतिक समीकरणों की करें तो 2014 के चुनाव में उचाना की सीट पर प्रेमलता को अपने परिवार के प्रभाव के कारण जीत मिली थी न की बीजेपी की टिकट के कारण वह चुनाव जीती।

पिछले 11 सालों में जींद जिले के राजनीतिक हालात तेजी से बदले हैं। 2024 के विधानसभा चुनाव में जींद में पांच में से चार सीटों पर भाजपा को जीत नसीब हुई है। एक सीट बीजेपी थोड़े मार्जिन से हारी है। जीती हुई सीटों में से एक पर कानूनी दांवपेंच की लड़ाई चल रही है।

प्रधानमंत्री बनने के बाद जब पहली बार नरेंद्र मोदी जींद आए थे, उस समय आचार संहिता लगी हुई थी और वह कोई बड़ी घोषणा नहीं कर सकते थे लेकिन जींद के लोगों को अब उनसे उम्मीद है कि वह जींद को कोई विशेष तोहफा देकर जाने का काम करेंगे।

प्रधानमंत्री 17 जुलाई को जींद से चलने वाली देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के साथ-साथ जींद के नए बने रेलवे स्टेशन का भी उद्घाटन करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री जींद में बने मेडिकल कॉलेज का भी उद्घाटन करेंगे। जींद के लोगों को नेशनल हाईवे की सौगात तो मिली लेकिन जींद में कोई बड़ा उद्योग अब तक नहीं आ पाया है जिससे लोगों को रोजगार मिलता। हरियाणा में प्रति व्यक्ति आय के मामले में जींद 13वें स्थान पर है और यहां के लोगों की प्रति व्यक्ति आय साढ़े दस हजार रुपए मासिक से भी कम है।

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जोंगा जीप से मार्च 1987 में राजीव गांधी भी पहुंचे थे

मार्च 1987 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी अचानक नरवाना के गांव भीखावाला पहुंचे थे। उस दौरान उनके साथ कांग्रेस नेता शमशेर सिंह सुरजेवाला थे। राजीव गांधी जोंगा जीप को खुद चला कर गांव भिखावाला पहुंचे थे। उन्होंने माइनर पर कपड़े धो रही महिलाओं से और राहगीरों से भी बातचीत की थी और समस्यों को जाना था।

1952 में जींद आए थे जवाहर लाल नेहरू

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू 1952 में नरवाना जाते समय कुछ समय के लिए रेलगाड़ी से जींद जंक्शन पर उतरे थे। इस दौरान उन्होंने किसानों से बातचीत की थी, जिसके बाद वे नरवाना पहुंचे थे और गांव धनौरी निवासी कवि हरिकेश पटवारी को सम्मानित किया था।

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इंदिरा गांधी की जींद में रैली

इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री रहते हुए कभी जींद नहीं आई। 1977 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद, वे दिल्ली से खुली जीप में हरियाणा के दौरे पर निकली थीं। इस दौरान उन्होंने जींद के अर्जुन स्टेडियम में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया था। 1978 में आयोजित इस रैली में भारी संख्या में भीड़ जुटी थी, जिसमें महिलाओं की उपस्थिति उल्लेखनीय थी। भाषण के दौरान जब इंदिरा गांधी ने पार्टी की हार की जिम्मेदारी खुद पर ली, तो जनसभा में मौजूद कई महिलाएं भावुक होकर रोने लगी थीं। इस दौरे के दौरान लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया और आगामी चुनावों में उनके नेतृत्व का समर्थन करने का विश्वास दिलाया। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस ने फिर से शानदार जीत दर्ज की और इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री बनीं।

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