सड़क, रेलवे और बिजली जैसी बुनियादी परियोजनाएं देश की विकास यात्रा की रीढ़ हैं, लेकिन उनकी रफ्तार के साथ गुणवत्ता भी उतनी ही जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों को स्पष्ट संकेत दिया कि लापरवाही अब स्वीकार नहीं होगी।
क्वालिटी पर PM मोदी का सीधा सवाल
मासिक प्रगति बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्माण और सार्वजनिक परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई। उन्होंने केंद्र के सचिवों और राज्यों के मुख्य सचिवों से सवाल किया कि अगर थर्ड-पार्टी ऑडिट के बावजूद कमियां सामने आती हैं, तो क्या अब चौथी पार्टी से ऑडिट कराना पड़ेगा?
प्रधानमंत्री का यह सवाल केवल ऑडिट व्यवस्था पर टिप्पणी नहीं था, बल्कि पूरी निगरानी प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल माना जा रहा है।
छह बड़े प्रोजेक्ट्स की समीक्षा
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने रेलवे, सड़क और बिजली क्षेत्र से जुड़े छह इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की। ये परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हैं और इनकी कुल लागत 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
उन्होंने अधिकारियों को परियोजनाओं को अलग-अलग हिस्सों में देखने के बजाय एक एकीकृत व्यवस्था के रूप में मॉनिटर करने पर जोर दिया। इससे निर्माण, कनेक्टिविटी और अंतिम उपयोग के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकता है।

रफ्तार के साथ गुणवत्ता भी जरूरी
सरकार का बड़ा लक्ष्य देश में तेज इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण करना है। लेकिन प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि काम जल्दी पूरा करने की कोशिश में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए।
उन्होंने मंत्रालयों, राज्यों और कार्यान्वयन एजेंसियों से आधुनिक तकनीक अपनाने तथा हर स्तर पर गुणवत्ता की निगरानी मजबूत करने को कहा। सड़क हो या पुल, बिजली लाइन हो या रेलवे परियोजना—कमजोर निर्माण लंबे समय में लागत और जोखिम दोनों बढ़ा सकता है।
बिजली प्रोजेक्ट से जुड़ी अहम सीख
पावर सेक्टर की एक परियोजना की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने एक महत्वपूर्ण उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, जब तक उसके लिए जरूरी ट्रांसमिशन क्षमता मौजूद न हो।
उन्होंने इसे बांध और नहर के उदाहरण से समझाया। बांध बना देने के बावजूद अगर पानी पहुंचाने की व्यवस्था नहीं है, तो अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकता। यही सोच बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर भी लागू होती है।
सिस्टम में जवाबदेही बढ़ाने का संदेश
PM मोदी की टिप्पणी का सबसे अहम पहलू जवाबदेही से जुड़ा है। थर्ड-पार्टी ऑडिट का उद्देश्य ही यह सुनिश्चित करना है कि निर्माण कार्य तय मानकों के अनुसार हो। अगर इसके बावजूद खामियां सामने आती हैं, तो निगरानी तंत्र को और मजबूत करना जरूरी हो जाता है।
तकनीक आधारित मॉनिटरिंग, समय-समय पर स्वतंत्र जांच और जिम्मेदार एजेंसियों की स्पष्ट जवाबदेही इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है।
विकास की असली कसौटी क्या?
इंफ्रास्ट्रक्चर केवल पुल, सड़क या बिजली परियोजना का नाम नहीं है। उसकी असली सफलता इस बात से तय होती है कि वह कितनी सुरक्षित, टिकाऊ और उपयोगी है। प्रधानमंत्री की बैठक से यही संदेश निकलता है कि अब विकास की रफ्तार के साथ उसकी गुणवत्ता पर भी उतना ही ध्यान देना होगा।