कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े छात्र आंदोलनों के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने कहा कि जंतर-मंतर सहित विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन करने वाले निर्दोष छात्रों के खिलाफ फिलहाल कोई पुलिस कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही पुलिस कार्रवाई के आरोपों की निष्पक्ष जांच और सभी डिजिटल व इलेक्ट्रॉनिक सबूत सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्दोष छात्रों को अंतरिम राहत
मंगलवार को विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि जिन छात्रों के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई गंभीर आपराधिक आधार नहीं है, उनके खिलाफ फिलहाल पुलिस कार्रवाई नहीं की जाएगी। अदालत ने नाबालिगों और निर्दोष पाए गए लोगों को तत्काल रिहा करने का भी निर्देश दिया।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन प्रदर्शनकारियों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है, उनके खिलाफ दर्ज मामलों पर यह राहत लागू नहीं होगी।
पुलिस कार्रवाई की होगी स्वतंत्र जांच
सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग के आरोपों का भी उल्लेख किया। शीर्ष अदालत ने कहा कि इन आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच आवश्यक है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और हिंसा से प्रभावित अन्य राज्यों को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है।

लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन संविधान के दायरे में आते हैं। अदालत की टिप्पणी के अनुसार, छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था और ऐसे मामलों में कानून के अनुरूप कार्रवाई तथा निष्पक्ष जांच जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने लाठीचार्ज से जुड़े सभी मामलों को एक साथ जोड़ते हुए अगली सुनवाई 3 अगस्त को तय की है।
सभी इलेक्ट्रॉनिक सबूत सुरक्षित रखने के निर्देश
अदालत ने जांच की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पुलिस को सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। इनमें शामिल हैं:
- CCTV फुटेज
- ड्रोन वीडियो
- बॉडी-वॉर्न कैमरा रिकॉर्डिंग
- वायरलेस संचार रिकॉर्ड
- PCR कॉल रिकॉर्ड
- प्रदर्शनकारियों का डिजिटल डेटा
कोर्ट ने कहा कि जांच पूरी होने तक इन सभी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनका उपयोग किया जा सके।
आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रदर्शनकारियों का भी हुआ जिक्र
सुनवाई के दौरान मीडिया रिपोर्टों का भी उल्लेख हुआ, जिनमें दावा किया गया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पहचाने गए कुछ प्रदर्शनकारियों में कई लोगों का आपराधिक इतिहास सामने आया है। हालांकि, ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम आदेश छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर अदालत ने निर्दोष छात्रों को राहत दी है, वहीं दूसरी ओर पुलिस कार्रवाई के आरोपों की स्वतंत्र जांच और सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश देकर निष्पक्ष जांच पर जोर दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।